अब सुरक्षित रखे जाएंगे बच्चों के नाडू

Karnal Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
करनाल। क्रयाओ ब्लड बैंक इंटरनेशनल के क्षेत्रिय (पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़) प्रभारी अनीष मलिक ने कहा कि महिला की डिलीवरी के समय अब व्यर्थ में फेंक दी जाने वाली नाडू (ऑरनाल) संरक्षित की जाएगी। नाडू को फेंकने के दौरान बहने वाले खून को अब व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।
इस खून से स्टेम सेल संरक्षित किए जाएंगे, जो आवश्यकता पड़ने पर करीब 75 गंभीर बीमारियों का उपचार करने में सहायक साबित हो चुके हैं। वर्तमान में 106 बीमारियों पर ट्रायल चल रहा है, जो फोर्थ स्टेज (फाइनल चरण) पर है। यह स्टेम सेल-196 डिग्री पर सुरक्षित रखा जाता है, जो पूरे सौ साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। क्षेत्रिय प्रभारी मलिक सेक्टर आठ के जिमखाना कल्ब में सोमवार को स्टेम सेल को संरक्षित करने के लिए महिलाओं को जागरूक करने के लिए आयोजित जागरूकता कैंप को संबोंधित कर रहे थे।
जागरूकता कैंप का आयोजन फ्लोरिडा (अमेरिका) के क्रयाओ बैंक इंटरनेशनल की क्षेत्रिय शाखा की ओर से किया गया। उन्होंने कहा कि क्रयाओ बैंक इंटरनेशनल की ओर से हरियाणा के गुड़गांव में भी शाखा खोली गई है। इसके मेडिकल एडवाइजर विश्व प्रसिद्ध डा. नरेश त्रेहन है। अनीष मलिक ने कहा कि बरसों से डिलीवरी के समय मां और बच्चे को जोड़ कर रखने वाली नाडू को व्यर्थ समझा जाता रहा है, लेकिन वह व्यर्थ नहीं होता। इसके भीतर प्रचुर मात्रा में स्टेम सेल पाए जाते हैं। डिलीवरी के दौरान मां के शरीर से बच्चे को अलग करने के लिए नाडू को काट कर फेंक दिया जाता है। उसे अब फेंकने की जरूरत नहीं है।

बचाएंगे बच्चे को बीमारियों से
इस नाडू से निकलने वाले खून के जरिए मिलने वाले स्टेम सेल इंसान को करीब 75 बीमारियों से बचाने की क्षमता रखते हैं। खास तौर पर थैलीसीमिया के मरीजों पर स्टेम सेल से तैयार किया गया इंजेक्शन बेहद कारगर साबित हुआ है। जिन बच्चों को स्टेम सेल के जरिए उपचार दिया गया है, उन्हें दोबारा खून चढ़वाने की जरूरत नहीं पड़ी है। अन्यथा बच्चों को तीन महीने बाद रक्त चढ़वाना पड़ता है। कई बार चोट लगने पर इंसान के स्टेम सेल या तो मर जाते हैं या फिर कमजोर पड़ जाते हैं। ऐसे में भी यह स्टेम सेल काफी लाभदायक साबित होते हैं। ऐसे में स्टेम सेल से उपचार दिया जाने पर व्यक्ति पूरी तरह सही हो जाता है।

कैंसर में भी सौ फीसदी कारगर
कैंसर की बीमारी में भी स्टेम सेल सौ फीसदी कामयाब साबित हुआ है। हार्ट डिजिज और स्पाइन कोड इंजरी में कामयाब है। डायबिटीज और अर्थराइटिक्स समेत 106 बीमारियों पर देश के एम्स और चंडीगढ़ के पीजीआई समेत कई बडे़ संस्थानों और विदेशों में भी अनुसंधान का काम चल रहा है। डिलीवरी से पूर्व महिला और बच्चे के परिजनों को अस्पताल के डाक्टरों से नाडू को संरक्षित करने के लिए आग्रह करना चाहिए। सीधा क्रयाओ बैंक इंटरनेशनल से भी संपर्क किया जा सकता है। परिजनों की सहमति के बाद डाक्टर नाडू को फेंकने के बजाए संरक्षित कर पाएंगे। जो बेहद कारगर साबित होगा।
85 महिलाओं ने लिया भाग
जिमखाना कल्ब की महिला विंग की करीब 85 महिलाओं ने जागरूकता कैंप में हिस्सा लिया। विंग की सचिव एडवोकेट हरविंद्र कौर समेत कई महिलाओं ने जागरूकता कैंप के दौरान अनीष मलिक से कई सवालों के जवाब जाने। महिलाओं ने कहा यह नया विषय है। इसे राष्ट्र हित और समाज हित में कामयाब बनाने के लिए काम करना चाहिए।

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