पीएफ के पैसे काटे, खाते में जमा ही नहीं

Karnal Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में आउटसोर्सिगिं नीति के तहत काम कर रहे 134 कर्मचारियों ने पीएफ राशि लाखों रुपये के घालमेल की आशंका जताई है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें प्रति माह वेतन से काटे जा रहे ईपीएफ की कोई जानकारी नहीं दी जा रही, जबकि ठेकेदार का कहना है कि पूरा पैसा जमा कराया गया है। कर्मचारियों ने ठेकेदार पर 26 लाख से अधिक राशि के घपले का आरोप लगाया है। अस्पताल प्रबंधन ने फरवरी 2011 में आउटसोर्सिगिं के तहत सुरक्षा गार्ड, वार्ड अटेंडेंट, धोबी, माली, इलैक्ट्रीशियन समेत अन्य पदों के लिए सेवाएं शुरू की थीं। इस समय कुल 134 कर्मचारी अनुबंध पर काम कर रहे हैं। इनमें से 39 सिक्योरिटी गार्ड, 50 वार्ड अटेंडेंट, 28 सफाई कर्मचारी, 4 सुपरवाइजर, 4 इलैक्ट्रीशियन, 2 माली, 2 धोबी, 3 लिफ्ट ऑपरेटर, 4 पंप ऑपरेटर लगाए गए हैं।
प्रति माह कटती है राशि
वार्ड अटेंडेंट, सिक्योरिटी गार्ड, सफाई कर्मचारी, धोबी, माली को मिलने वाले 4800 में से 535 रुपये ईपीएफ राशि काटकर 4265 रुपये दिए जा रहे हैं। जबकि सुपरवाइजर, इलैक्ट्रीशियन, लिफ्ट एवं पंप ऑपरेटर को 618 रुपये ईपीएफ के काटने के बाद 4837 रुपये दिए जा रहे हैं। इस तरह से एक माह में सभी कर्मचारियों का कुल 72 हजार 769 रुपये ईपीएफ के तौर पर काटा जा रहा है। जो लगभग 19 महीने का 13 लाख 26 हजार 611 हो गया है। ईपीएफ अकाउंटस में जमा होने के बाद कर्मचारियों का यह लगभग 26 लाख 53 हजार 222 रुपये हो जाना चाहिए था।
खाते में सिर्फ एक माह का पैसा
इन कर्मचारियों के आनलाइन ईपीएफ खाते में सिर्फ फरवरी 2011 की जमा हुई राशि ही पता चल रही है। शेष राशि जमा हुई या नहीं, इस बारे में कर्मचारियों को कोई जानकारी नहीं हैं।
कर्मचारी एसोसिएशन के प्रधान रामपाल सैनी, कुलदीप सिंह सहित अन्य कर्मचारियों ने बताया कि फरवरी 2011 से उनका लगातार ईपीएफ के नाम पर पैसा काटा जा रहा है। लेकिन खाते में एक महीने की राशि जमा हुई दिखाई जा रही है। उन्हें आशंका है कि उनकी करीब 26 लाख से अधिक की राशि में भारी गड़बड़ी है। उन्हें पूरी पूरी आशंका है कि अभी तक ठेकेदार ने यह राशि जमा ही नहीं करवाई। इस बारे में वे एसएमओ, सीएमओ डीसी कैथल सहित कई नेताओं से भी गुहार लगा चुके हैं। लेकिन आज तक भी कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हो पाई है। उनकी मांग है कि उनका यह पैसा दिलवाया जाए।
सिक्योरिटी मनी भी नहीं लौटाने का आरोप
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि ठेकेदार ने भर्ती के समय प्रत्येक कर्मचारी से 1500 रुपये बतौर सिक्योरिटी जमा करवाई थी। जो आज तक लौटाई नहीं गई। अनुबंध के दौरान दो या तीन महीने में वापस देने की बात कही गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें वेतन भी समय पर नहीं मिलता। अगस्त महीने का वेतन उन्हें आज तक नहीं दिया गया है।
दो हफ्ते भर में सब दुरुस्त हो जाएगा
इस बारे में ठेकेदार उमेश शर्मा का कहना है कि उन्होंने पूरा का पूरा पैसा जमा करवाया हुआ है। अक्तूबर के पहले सप्ताह में पूरा पैसा ऑनलाईन हो जाएगा। इसके साथ-साथ 1500 रुपये की सिक्योरिटी राशि भी इस महीने के वेतन के साथ दे दी जाएगी।

सीएमओ डा. सुरेंद्र नैन ने कहा कि कर्मचारियों की मांग पर ठेकेदार से बात की गई है। 30 सितंबर तक यदि ठेकेदार ने कोई समाधान नहीं किया तो ठेकेदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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