लौटने लगे हैं वार्ड में भरती मरीज

Karnal Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
कैथल। स्वास्थ्य कर्मचारियों की हड़ताल के कारण इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में शुक्रवार को भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। परेशान होकर वार्ड में भरती कई मरीज इलाज के लिए दूसरी जगह जाने लगे हैं। आलम यह रहा कि ओपीडी में आए सैकड़ों मरीजों में से महज आठ की ही रजिस्ट्रेशन हो पाई। राहत की बात यह रही कि कई चिकित्सकों ने वगैर रजिस्ट्रेशन के ही इलाज किया। लेकिन उन्हें बाहर से महंगी दवा लेनी पड़ी। हड़ताल के कारण सभी जांच केंद्र बंद रहे।
केवल 8 ओपीडी हुई
हड़ताल के कारण ओपीडी कम हुई। सामान्य तौर पर ओपीडी में सात से आठ सौ मरीज आते हैं। लेकिन शुक्रवार को सुबह 8 से 2 बजे केवल 8 ओपीडी दर्ज हो पाई। अस्पताल कर्मियों से मिली रिपोर्ट के अनुसार 4 मरीज छुट्टी लेकर चले गए। वीरवार रात्रि तक 8 रोगी ही एडमिट हो पाए। हालांकि स्टाफ का कहना है कि सभी बेड फुल हैं।
कई विभागों की ओपीडी बंद
शुक्रवार को भी अटेंडेंट, लैब टेक्निशियन, सफाई कर्मचारी सहित कई कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इस कारण कई विभागोें की ओपीडी बंद रहीं।

दवा नहीं मिलने से मायूसी
रजिस्ट्रेशन और दवा काउंटर बंद रहे। इस कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि डॉक्टरों ने बिना रजिस्ट्रेशन मरीजों की जांच की। लेकिन दवा नहीं मिलने से मरीजों और तीमरदारों में मासूसी देखी गई।
सामान्य से कम आए मरीज
नेत्र चिकित्सा ओपीडी में बैठी डॉक्टरों ने बताया कि लगभग 20 मरीज ही अपनी आंखों की जांच करवाने आए जबकि सामान्य तौर पर 100 के आसपास मरीज जांच के लिए आते थे। इसी तरह दंत ओपीडी में बैठे डॉ. कमल मल्होत्रा ने बताया कि वे सुबह से आने वाले मरीजों की जांच कर दवाइयां लिख रहें हैं। उन्होंने बताया कि आज लगभग 15 से 20 मरीज ही इलाज के लिए आए हैं जबकि सामान्य तौर पर 70 के आसपास रोगी जांच के लिए आते थे।
मरीजों को हुई खासी परेशानी
अंबाला रोड कैथल से अपनी बेटी का इलाज करवाने आई सुलोचना ने बताया कि उसे लड़की की ब्लड टेस्ट करवाने थे, लेकिन हड़ताल के कारण उसे वापस लौटना पड़ेगा।
चंद्रभान बालू ने बताया कि उसके परिजन की हड्डी टूटी हुई और वे 4 दिन से यहां एडमिट हैं, लेकिन बिना देखभाल और इलाज के वे वापस लौट रहें हैं।
कमर रोग से पीडि़त शिमला से आए रणधीर ने बताया कि यहां कोई परचियां काटने वाला भी नहीं है। प्रशासन को रोगियों के इलाज के लिए कोई न कोई तो व्यवस्था तो करनी चाहिए।
हार्ट की बीमारी से पीडि़त सुरेश कुमार कहना था कि उसे निरंतर दवाई लेनी पड़ती है, लेकिन काउंटर बंद होने के कारण आज उसे अस्पताल से कोई दवाई नहीं मिली।
खुराना रोड वासी गीता राम ने बताया कि उसके एक परिजन को दो दिन से अस्पताल में भर्ती ही नहीं किया जा रहा। इसके अलावा टीबी के रोगी चंदाना वासी काका, रोहताश, गांव रमाणी की मामो देवी, अमन, जाखौली के बलदेव सिंह, रणसिंह भाणा, हरि सिंह, रमेश सिणंद, पिरथी सेरधा समेत अन्य को निराश होकर लौटना पड़ा।
जगह-जगह बिखड़ा पड़ा है कचरा
दो दिनोें से सफाई न होने से जगह-जगह गंदगी एवं कचरा बिखरा पड़ा है। प्रशासन की ओर से सफाई के लिए नगर परिषद के सफाई कर्मियों को भेजा गया था, जिन्हें धरने पर बैठे लोगों ने वापस लौटा दिया।
कोट
हड़ताल से मरीजों की परेशानी चिंता का विषय है। सर्वकर्मचारी संघ मर्यादित संस्था है। कुछ लोग इसका फायदा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। जो गलत है। प्रयास किया जा रहा है स्वास्थ्य सेवाएं शीघ्र बहाल हों।
दिनेश सिंह यादव
एडीसी, कैथल।
तालमेल कमेटी के साथ बैठक के बाद आपसी मतभेद सुलझा लिए गए हैं। सभी ने मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने की सहमति बनाई है। शुक्रवार शाम से स्वास्थ्य सेवाएं बहाल हो गई हैं। डा. सुरेंद्र नैन, सीएमओ

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