अधिकारियों को करनी ही पडे़गी कानून की पालना

Karnal Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सीनेट हाल में नेशनल ह्यूमन राइटस के सौजन्य से बंधुआ मजदूर और बाल मजदूरी की समाप्ति को लेकर एक वर्कशाप का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रदेश के सभी जिलों के डीसी, एसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य और जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीसी पटेल ने कहा कि देश में पिछड़े लोगों के कानून के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा। देश के सभी अधिकारियों को कानून की पालना करनी होगी। बंधुआ मजदूरी व बाल मजदूरी पूरे देश की समस्या है। इसको समाप्त करना देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। वे वर्कशाप में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बंधुआ मजदूरों और बाल मजदूरी को लेकर देश में बनाए गए कानून के प्रति जागृति लाने के लिए ही सभी अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। कानून की पालना करने के लिए हर अधिकारी को ईमानदारी से काम करना होगा। ईंटों के भट्ठों और ऐसी जगहों पर जाकर निरीक्षण भी करना होगा कि कहीं मजदूरों का शोषण तो नहीं किया जा रहा। सभी अधिकारियों का फर्ज बनता है कि वे पिछड़े लोगों को उनके हक दिलाएं और किसी भी कीमत पर शोषण नहीं होने दें। उन्होंने जिला उपायुक्त व पुलिस अधीक्षकों को कहा कि सरकार द्वारा बंधुआ व बाल मजदूरी को लेकर बनाए गए कानूनों का पालन करवाया जाए और इस संबंध में मिली शिकायत की जांच करवाकर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जाए। न्यायमूर्ति बीसी पटेल ने कहा कि 14 वर्ष तक के आयु वर्ग के बच्चों को शिक्षित करना अनिवार्य है। सभी अधिकारियों को भावी पीढ़ी को शिक्षित करने और देश को प्रगति की राह पर लाने के लिए इन बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस आयु वर्ग का कोई भी बच्चा काम करने वाली जगह पर नहीं पाया जाए। जिस भी जगह पर 14 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों से काम करवाया जा रहा है, वहां जाकर मामले की निष्पक्ष और बारीकी से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

ये अधिकारी रहे उपस्थित
इस वर्कशाप को राष्ट्रीय मानव आयोग के सदस्य आरके शर्मा, रजिस्ट्रार लॉ एके गर्ग, न्यायमूर्ति के निजी सचिव राजीव सेठ, श्रम आयुक्त हरियाणा सतवंती अहलावत, संयुक्त श्रम आयुक्त आनंद स्वरूप आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर रोहतक डिवीजन की कमिश्नर सुप्रभा दहिया, महानिदेशक बीएस मलिक, अंबाला डिवीजन के कमिश्नर आरके गुप्ता, सभी जिलों के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, डीएसपी और स्थानीय अतिरिक्त उपायुक्त सुमेधा कटारिया सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

चप्पे-चप्पे पर दिखी चीफ जस्टिस की पटेल की टीस
एक ओर वर्कशाप दूसरी और बाल मजदूरी
डीसी की फर्जी रिपोर्ट का जिक्र किया पटेल ने
वर्कशाप में मीडिया का नहीं हुआ प्रवेश

राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। ‘बाऊजी, मैं तो रोटी लेने आया हूं, ये आज बड़े भाई की जगह काम पर आया है, मैं मजदूरी नहीं करता’ बाल मजदूरों और जिनके पास ये लोग काम करते हैं उनके उनकी कथनी और करनी जो भी हो, मगर बाल और बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने का जिम्मा संभालने वालों की करनी और कथनी क्या है, ये साफ नजर आती है। एक ओर केयू के वातानुकूलित सीनेट हाल में बालश्रम और बंधुआ मजदूरी को रोकने पर घंटों विचार-विमर्श हुआ। वहीं, कुरुक्षेत्र में विभिन्न जगहों पर बाल और बंधुआ मजदूरी की तस्वीर देखने को मिली। हालांकि बंधुआ मजदूरी पर अंकुश कैसे लगेगा? इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी क्या हो? इन पहलुओं पर कई घंटे केयू के सीनेट हाल में हुई बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर के पूर्व चीफ जस्टिस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य बीसी पटेल ने विस्तार से चर्चा भी की। उन्होंने अधिकारियों को सख्ती से कार्रवाई करने की हिदायत देते हुए अपना दायित्व निभाने को कहा। पटेल इस बात पर काफी सख्त दिखे कि कई जगह पुलिस की मिलीभगत के कारण भी कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने इसके लिए अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई। इसके साथ जस्टिस पटेल ने अधिकारियों द्वारा भेजी जाने वाली झूठी रिपोर्ट बारे भी टीस को व्यक्त किया। उन्होंने बाकायदा एक डीसी द्वारा भेजी गई झूठी रिपोर्ट का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे एक डीसी ने बाल मजदूरी की फर्जी रिपोर्ट भेजकर मानवाधिकार आयोग को गुमराह किया। इस फर्जी रिपोर्ट का खुलासा होने पर उन्हें फटकार लगाई गई, तो उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों का हवाला देकर बचाव का प्रयास किया। पटेल ने बड़ी साफगोई से इस वर्कशाप में अधिकारियों को सचेत किया कि वे बंधुआ और बाल मजदूरी पर अंकुश लगाएं और ये सिर्फ उनकी ड्यूटी का ही हिस्सा नहीं, बल्कि मानवता के नाते भी जिम्मेदारी है। यहां खास बात ये है कि इस कार्यक्रम में मीडिया का प्रवेश नहीं था।

कहां सोए हैं लेबर आफिसर
जस्टिस बीसी पटेल ने अन्य अधिकारियों के अलावा लेबर महकमे की भी जमकर खिंचाई की। वहीं, कुरुक्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर हो रही बाल मजदूरी इस बात का प्रमाण है कि लेबर आफिसर सोए हुए हैं।

जब सामने आई रिश्वत लेने वाले पुलिस वालों की एंट्री
वर्कशाप के दौरान जस्टिस बीएस पटेल ने एक ऐसा रहस्योद्घाटन किया, जिसमें पुलिस की रिश्वतखोरी को प्रमाणित कर दिया। पटेल ने जिला के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से खचाखच भरे सीनेट हाल में उस रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें बंधुआ मजदूरों संबंधित मामले की शिकायत मिलने पर जब छापामारी हुई, तो वहां 110 एंट्री ऐसी मिली, जिसमें पुलिसवालों के नाम के साथ उन्हें दी जाने वाली रिश्वत का ब्योरा था।

देश में कहीं भी नहीं हो रही पालना
वर्कशाप में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य ने साफ किया कि देश में बंधुआ मजदूरी और चाइल्ड लेबर पर संबंधित बने कानून पर कहीं भी पालना नहीं हो रही। उन्होंने इसके लिए फर्जी रिपोर्ट को बड़ा जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि ये शोषण है और मानवता के नाते इस पर अंकुश लगाना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

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