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800 विद्यार्थियों को हॉस्टल खाली करने का फरमान

Karnal Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
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कुरुक्षेत्र। आगरा के छात्र तेजस्वी की भाखड़ा में डूबने से हुई मौत के बाद भड़के एनआईटी के विद्यार्थियों ने दूसरे दिन भी कक्षाओें का बहिष्कार जारी रखा। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में विद्यार्थियों ने दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रखा। इसी बीच बुधवार को एनआईटी प्रशासन ने आठ सौ से अधिक विद्यार्थियों को फौरन हॉस्टल खाली करने का नोटिस छात्रावासों में चस्पा कर दिया। आदेश देने से पहले एनआईटी प्रशासन भूल गया कि उनके यहां अधिकांश विद्यार्थी दूर प्रांतों के रहने वाले हैं, जिनका यहां से एकदम हॉस्टल छोड़कर जाना संभव नहीं। कुछ विद्यार्थी इसे संस्थान प्रबंधन का तुगलकी फरमान बता रहे हैं। नोटिस के लगते ही विद्यार्थियों ने धरनास्थल पर जमकर बवाल काटा। एनआईटी प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी कर उन्होंने संस्थान के मुख्य गेट पर ‘तेजस्वी को न्याय दो’ शब्द लिखकर पोस्टर चिपका दिए। एनआईटी मुख्यालय पर साइन बोर्ड और सिंबल पर ‘एनआईटी निदेशक भगोड़ा’ और ‘एनआईटी डायरेक्टर आनंद मोहन तुरंत इस्तीफा दो’ जैसी पंक्तियां लिखे बैनर लगे नजर आए। इसी बीच संस्थान के साइन बोर्ड से भी बड़ा एक पोस्टर तेजस्वी के चित्र का एनआईटी के भवन पर टांगा गया। मंगलवार के प्रदर्शन की तरह बुधवार को भी एनआईटी में भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि बुधवार को किसी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं हुई, मगर बुलंद आवाज में छात्र-छात्राओं के नारे लगते रहे। एनआईटी प्रशासन मुर्दाबाद से संस्थान का परिसर दिनभर गूंजता रहा। मंगलवार रात भी विद्यार्थी संस्थान प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। बुधवार सुबह 9 बजे ही एनआईटी निदेशक कार्यालय के बाहर विद्यार्थियों का हुजूम लगने लगा था। इसके बाद एक-एक कर ये विद्यार्थी धरने पर बैठ गए और नारेबाजी करते रहे। इसी बीच उन्हें सूचना मिली की विद्यार्थियों से जबरन हॉस्टल खाली करवाए जा रहे हैं। विद्यार्थियों का पता चला कि बीटेक तृतीय वर्ष बैच के हॉस्टलर्स को तुरंत कमरा खाली करने का नोटिस दिया गया है। नोटिस के बाद छात्र आग-बबूला हो उठे। इन्होंने यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों, वार्डन, चीफ वार्डन व अन्य अधिकारियों को घेरकर खरी-खोटी सुनाई। विद्यार्थियों ने एनआईटी प्रशासन पर आरोप लगाया कि ये कार्रवाई उनके आंदोलन को दबाने के लिए की गई है। एनआईटी प्रशासन अपनी मनमर्जी चलाकर विद्यार्थियों के खिलाफ तानाशाही रवैया अपना रहा है। मगर विद्यार्थी इसका डटकर मुकाबला करेंगे।
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आदेश अथॉरिटी के हैं : चीफ वार्डन
विद्यार्थियों को अचाक हॉस्टल खाली कराने के आदेशों संबंधित जानकारी जब एनआईटी के चीफ वार्डन राजेंद्र प्रसाद से मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि ये उनके नहीं, अथॉरिटी के आदेश हैैं।

एनआईटी निदेशक की माता का देहांत
एनआईटी के निदेशक आनंद मोहन की माता की तबीयत पिछले काफी समय से खराब चल रही थी। बताया गया है कि वे उनका उपचार चंडीगढ़ और स्थानीय निजी अस्पताल में चल रहा था। बुधवार को जब निदेशक के मोबाइल पर संपर्क किया तो ज्ञात हुआ उनकी माता का निधन हो गया है।

साइड स्टोरी...
सर, डेड बाडी के लिए क्या एंबुलेंस भी नहीं थी
तेजस्वी के शव को हमें आटो रिक्शा में लाना पड़ा
अनिश्चितकालीन हड़ताल की जिम्मेदार असुरक्षा की भावना

अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। ‘सर, तेजस्वी के शव को उठाने के लिए क्या एनआईटी प्रशासन एक एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करा सका’? ऐसे ही अनेक सवाल थे, जिनका जवाब एनआईटी अधिकारियों के पास नहीं था। बुधवार एनआईटी अधिकारियों के एक शिष्टमंडल को उस समय भारी शर्मिदिंगी उठानी पड़ी, जब विद्यार्थियों ने उन्हें एक के बाद एक खामियां बताकर राष्ट्रीय महत्व के इस संस्थान की पोल खोली। रूंदे गले से एक विद्यार्थी ने कहा ‘सर, तेजस्वी की0 मौत के बाद उसके शव को हम उठाकर आटो रिक्शा में डालकर पोस्टमार्टम हाउस तक लाए’। विद्यार्थियों ने कहा कि तेजस्वी की मौत एक हादसा है, जिसमें सीधे तौर पर एनआईटी का भले कोई कसूर नहीं हो, मगर घटना के बाद प्रशासन का जो चेहरा सामने आया है और इसी वजह से अब विद्यार्थियों कक्षाओं का बहिष्कार कर आंदोलन की राह पर आए हैं। बुधवार को एनआईटी के हॉस्टल खाली कराने संबंधित लगाए गए नोटिस के बाद जो हलचल हुई, इसके साथ एक बैठक हॉस्टल परिसर में बुलाई गई थी। बैठक में एनआईटी के प्रोफेसर, सुरक्षा प्रबंधों से जुडे़ अधिकारी, चीफ वार्डन, वार्डन और अन्य अधिकारी शामिल रहे। बैठक में सूचना थी कि एनआईटी के निदेशक यहां पहुंच सकते हैं, लेकिन निदेशक नहीं पहुंचे और उनके बगैर ही बैठक बुलाई गई। बैठक के शुरू होने से पहले यहां पहुंचे एनआईटी के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाने और आंदोलन की जिद छोड़ने और एनआईटी की कोई गलती नहीं होने की बात कही, लेकिन जब विद्यार्थियों ने पूरा कच्चा चिट्ठा खोला, तो उनकी बोलती बंद हो गई। विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें मंगलवार से धमकियां मिल रही हैं कि या तो आंदोलन से पांव पीछे खींच लें, वरना देख लेंगे कि यहां से डिग्री कैसे लेकर जाएंगे।

दिन भर भूखे पेट डटे रहे
सहपाठी की मौत के गम में सैकड़ों विद्यार्थियों ने मंगलवार को खाना नहीं खाया। विद्यार्थियों के भूखा रहने के चलते हॉस्टलों की मेस में भारी मात्रा में भोजन खराब हुआ। एनआईटी से सटे केयू में जहां छात्र संगठनों और विद्यार्थियों के आंदोलन आमतौर पर होते रहते हैं, वहीं, एनआईटी में ऐसी गतिविधियां कम रहती हैं।

तीन छात्रों की हुई डूबने से मौत
तेजस्वी के भाखड़ा नहर में डूबने की घटना के बाद ऐसे क्या हालात बने, जो तोड़फोड़ और अनिश्चितकालीन हड़ताल की नौबत आई? इसके पीछे एनआईटी प्रशासन की अनेक खामियां हैं। पिछले डेढ़ दशक में भाखड़ा नहर में डूबने से एनआईटी के छह से अधिक विद्यार्थियों की मौत हो चुकी हैं। इनमें से चार की एक ही घटना में डूबने से मौत वर्ष 2001 में हुई थी, लेकिन तब एनआईटी प्रशासन ने मौका संभाल लिया था।

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