मुख्य सचिव से डीसी की शिकायत

Karnal Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
करनाल। भ्रष्टाचार का संरक्षण देने व वादाखिलाफी करने पर निगदू पंचायत के सदस्यों ने उपायुक्त रेनूएस फुलिया की शिकायत मुख्य सचिव से की है, जबकि उपायुक्त इन आरोपाें को निराधार बता रही है। वहीं, वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव पंचायत एवं विकास पी. राघवेंद्र राव से भी शिकायत की गई है। उन्होंने तीन दिन के भीतर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। पंचों का कहना है कि उन्होंने लिखित रूप से शिकायत मांगी है और न्याय का आश्वासन दिया है।
वहीं, राव ने पंचायत के मामले में अधिकारियों के तुरंत हस्तक्षेप करने और रिपोर्ट देने के लिए कहा है। चीफ सेकेटरी को दी गई शिकायत में सात पंचों ने उपायुक्त की कार्यप्रणाली व भ्रष्टाचार के संरक्षण देने के खिलाफ स्वतंत्रता दिवस पर सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने का ऐलान किया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्यमंत्री के आगमन पर धरना देने और प्रशासन की कारगुजारी की पोल खोलने का ऐलान किया था। आरोप है कि अधिकारी पूरी तरह से लापरवाह और भ्रष्टाचार में लिप्त हो गए हैं, इसी वजह से भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
अधिकारियों में हड़कंप
पंचायत के इस निर्णय से अधिकारियों में हड़कंप मच गया था, और उन्होंने तुरंत कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब वे अपनी बात से फिर मुकर गए हैं। गांव निगदू के पंच और ग्रामीण उपायुक्त रेनूएस फुलिया व उनके कार्यालय में भ्रष्टाचार के संरक्षण देने का आरोप लगा चुके हैं। उन्हीं पर लगे आरोपों की प्रति सौंपी गई थी। पंच रामदिया, पंच धूमसिंह, पंच रमेश, पंच गुड्डी देवी, पंच महेंद्रो, पंच सुरेंद्र कौर, पंच ममता ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी।
सरपंच को बचाने का आरोप
गांव की पंचायत में 11 पंच हैं। आरोप है कि गांव की सरपंच ने कई घोटाले किए हैं और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाने के बजाय उन्हें रियायतें दीं। शिकायत में कहा गया है कि जिला न्यायालय भी आरोप सिद्ध कर चुका है, पर सरपंच के खिलाफ कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, जबकि अन्य मामलों में प्रशासन तुरंत हरकत में आ जाता है। आरोप है कि जानबूझकर सरपंच को बचाया जा रहा है और भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। कई जांच एडीसी और बीडीपीओ केपास लंबित होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता कप्तान सिंह ने मुख्य सचिव से इस मामले की जांच की मांग भी की गई है और डीसी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।

डीसी पर ये लगे आरोप
1. जुलाई 2010 और अगस्त 2010 में मृतक व्यक्तियों की पेंशन का गबन, जांच के बाद उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस दिया, लेकिन अब तककोई कार्रवाई नहीं की गई। बीडीपीओ ने जांच में आरोपों को सत्य बताया।
2. 13 अक्टूबर 2011 को कैश इन हैंड 25 हजार से छह लाख रुपये प्रतिमाह रखने के आरोपों को भी बीडीपीओ ने रिपोर्ट में सत्य बताया। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं हुई।
3. इससे पूर्व दो बार पंचायत फंड में गबन और मृतकों की पेंशन के गबन के आरोप लगे हैं। बीडीपीओ ने आरोप सिद्ध किए, पर कार्रवाई करने की बजाए उपायुक्त ने सरपंच कोे भविष्य में ऐसी गलती न करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया।

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