बच्चे की मौत के बाद इंजेक्शन सील

Karnal Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
करनाल। सिविल अस्पताल में बुधवार को उस हड़कंप मच गया जब रेबिज का इंजेक्शन देने के कुछ देर बाद एक पांच साल के बच्चे की मौत हो गई। अभी यह पुष्टि नहीं हुई कि बच्चे की मौत इंजेक्शन के रिएक्शन करने से हुई या फिर किसी अन्य कारण से, लेकिन बच्चे की मौत के बाद उसके शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। बच्चे की मौत का मामला नोटिस में आने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। जानकारी होते ही ड्रग कंट्रोलर परविंद्र मलिक ने अस्पताल सप्लाई में आए रेबिज के बाकी बचे 24 इंजेक्शन सील कर दिए हैं, जो जांच के लिए हिमाचल प्रदेश की कसौली प्रयोगशाला में भेजे जाने हैं।
चौथा टीका लगवाने आए थे
शहर के पावर हाउस कालोनी निवासी गीता देवी के अनुसार वह अपने पांच साल के भतीजे अभिषेक को कुत्ता काटे का टीका लगवाने आई थी। उसे बुधवार को चौथा टीका लगा था। वह टीका लगवा कर अस्पताल के बाहर आटो की इंतजार कर रही थी। इसी दौरान उसके भतीजे को चक्कर आ गए और उसके शरीर पसीना-पसीना हो गया। हाथ-पांव मुड़ गए और बच्चे के मुंह से झाग आ रहे थे। राहगीर बच्चे को तुरंत ट्रामा सेंटर ले गई। चिकित्सकों ने जब तक बच्चे को संभाला वह दम तोड़ चुका था।
एक महीने से बुआ के पास था
भतीजे की मौत से बुरी तरह दुखी गीता ने कहा करीब एक महीने पहले से भतीजा उसके पास आया था। वह पानीपत चांदनी बाग का रहने वाला है। वहां उसका मायका है। करीब एक महीने पूर्व ही बच्चे को कुत्ता काट गया था। तब से ही वह बच्चे को इंजेक्शन दिलवा रही थी। बच्चे को तीन टीके पहले लग चुके हैं। यह चौथा टीका था। वह मंगलवार को भी टीका लगवाने आई थी, लेकिन देरी से पहुंचने के कारण अस्पताल बंद हो गया था और इंजेक्शन नहीं लग सका था। बच्चे का पिता समीश कुमार पानीपत नगरपालिका में सफाई कर्मचारी है।

रोजाना लगाते हैं इंजेक्शन
अस्पताल के फार्मासिस्ट ने कहा कि उसने बुधवार को रेबिज के करीब 28 इंजेक्शन लगाए हैं। इस बच्चे को करीब 22 वां या 23वें नंबर पर इंजेक्शन लगाया गया है। इससे पहले भी रोजाना इंजेक्शन लगाए जा रहे है। कोई अन्य शिकायत अभी नहीं आई है।

मौत के कारणों का पता नहीं
ट्रामा सेंटर में लाते ही बच्चे का चेकअप शुरू किया गया। बच्चे को वह लोग बचाव में कुछ दे भी नहीं सके। इस दौरान ही बच्चा दम तोड़ चुका था। अब यह नहीं कहा जा सकता कि बच्चे की मौत इंजेक्शन के रिएक्शन से हुई या फिर अन्य किसी कारण से। बच्चे के हाथ-पांव नहीं मुड़े थे। ठीक से लक्षण समझने का समय भी नहीं लगा।
डा. नीरज सिंह
ट्रामा सेंटर, करनाल

जांच के लिए इंजेक्शन सील
तमिलनाडु की ह्युमन बायोलॉजिक इंस्टीट्यूट से बने रेबिज के इंजेक्शन बैच नंबर एवाईबी85/11 है। यह अस्पताल सप्लाई में करनाल के सिविल अस्पताल में 500 आए थे। इनमें से 370 करनाल सिविल अस्पताल में रखे गए थे। बाकी 130 ग्रामीण इलाकों को भेज दिए गए थे। करनाल अस्पताल में कुल 24 इंजेक्शन अभी तक बचे हैं। यह सील कर दिए गए हैं। उन्हें जांच के लिए कसौली भेजा जा रहा है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
परविंद्र मलिक
ड्रग कंट्रोलर, करनाल

पुलिस को सौंपा शव
बच्चे के परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन चाहता था बच्चे का पोस्टमार्टम कराया जाए। अस्पताल प्रशासन ने बच्चे का शव उसकी बुआ को नहीं पुलिस को सौंपा है।
डा. अमर बजाज
पीएमओ, करनाल

बच्चे के परिजनों ने नहीं कराया पोस्टमार्टम
बच्चे के परिजनों के आग्रह पर शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया है। बच्चे की बुआ काफी दुखी थी। वह बच्चे की मौत के बाद केवल अपने भतीजे का शव चाहती थी। वह किसी हाल में पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुई। वह कानूनी पचडे़ में नहीं पड़ना चाहती थी।
गुरविंद्र सिंह, थाना प्रभारी
सिविल लाइन, करनाल

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