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जरूरत 43 की डाक्टर केवल 13

Karnal Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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कैथल। इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के नाम से ही विशेष सुविधाएं होने का बोध होता है। सच्चाई यह है कि अस्पताल इस समय सबसे बड़ी जरूरत डाक्टरों के लिए ही तरस गया है। यहां जरूरत के 43 डॉक्टरों में से इस समय मात्र 13 डॉक्टर अस्पताल में कार्यरत हैं। इनके भरोसे ओपीडी, आपातकाल विभाग एवं पोस्टमार्टम सहित सभी कार्य रेंग रहे हैं। ऐसे में मरीजोें के साथ-साथ अस्पताल कर्मचारियों एवं चिकित्सकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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पिछले वर्ष शुरू हुए इंदिरा गांधी मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल में कुल 43 चिकित्सकों के पद हैं। इसमें से जैसे-तैसे करीब छह माह तक चिकित्सकों की संख्या 30 से ऊपर पहुंच गई थी। इस कारण यहां सभी विभागों में ओपीडी मरीजों की संख्या वर्किंग-डे में 600 से लेकर 700 तक होती है। कभी यह इससे भी अधिक हो जाती है। चिकित्सक कम होने के बावजूद ओपीडी संख्या लगातार बढ़ रही है। यही अस्पताल में 100 बेड की सुविधा का है। प्रतिदिन 100 के बजाए 120 या 130 मरीज दाखिल रहते हैं।
नाम न छापने की शर्त पर चिकित्सकों ने बताया कि बस काम चल रहा है। नाम मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल है, लेकिन सबसे पहली आवश्यकता चिकित्सक ही नहीं है। इस कारण मरीजाें के साथ-साथ वर्कलोड के चलते उन्हें भी भारी परेशानी हो रही है। अस्पताल में एमबीबीएस चिकित्सकों की काफी कमी है। इस कारण सबसे अधिक परेशानी आपातकाल एवं प्रसूति कक्ष में आ रही है। यहां एक-एक चिकित्सक को डबल शिफ्टों में काम करना पड़ता है।

ये है अस्पताल में डाक्टर
इस समय अस्पताल में 43 में से 13 चिकित्सक हैं। इनमें डा. अमन सूद, डा. अनूप, डा. राकेश मित्तल, डा. संदीप सैनी, डा. कविता गोयल, डा. रविंद्र, डा. मीनाक्षी, डा. निधि गर्ग, डा. सुमन, डा. संदीप जैन, डा. अनिल अग्रवाल, डा. हमिता मित्तल सहित एसएमओ डा. आरपी गोयल हैं। फिजिशियन डाक्टर सुरेंद्र नैन और डा. नीलम कक्कड़ को भी ओपीडी में मरीजाें की जांच करनी पड़ती है।
ये डाक्टर हुए रिलीव
पिछले चार माह में अस्पताल से सर्जन डा. मुनीष बंसल, डा. अमनदीप, डा. अनुमेहा, डा. सुजाता, डा. हरप्रीत, डा. अजय शेर, डा. संजीव कुमार, डा. यशपाल मोमिया, डा. निधि मोमिया, डा. विजय वर्मा में से अधिकतर की या तो ट्रांसफर हो गई। कुछ चिकित्सक अस्पताल छोड़कर ही चले गए।
मरीजों को करना पड़ता है इंतजार
अस्पताल में उपलब्ध 13 चिकित्सकों को ही आपातकाल, आपरेशन थियेटर, ओपीडी और पोस्टमार्टम का पूरा काम देखना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को ओपीडी में चिकित्सकों का घंटों इंतजार करना पड़ता है। मरीज सावित्री देवी, कामना, संजय, विजय, राधिका ने कहा कि उन्हें काफी इंतजार के बाद चिकित्सक को अपनी बीमारी बताए जाने का अवसर मिला। अस्पताल में डाक्टर सीट पर कम ही मिलते हैं।

प्रसूति विभाग में हालात खराब
24 घंटे चलने वाले प्रसूति विभाग में 4 में से इस समय डा. सुमन एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। उनके साथ एक चिकित्सक हैं, जो मात्र प्रसूति की ट्रेनिंग लेकर आई हैं। इन्हीं डाक्टरों को अस्पताल में दाखिला जच्चा-बच्चा के अलावा प्रतिदिन 150 से 200 गर्भवती महिलाओं की ओपीडी में जांच करनी पड़ती है। सभी पीएचसी, सीएचसी से गर्भवती महिलाओं को यहां रेफर किया जाता है। एक विशेषज्ञ के कारण यहां हालात काफी गंभीर हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है 24 गुणा 7 वाली इस प्रसूति सेवा में मरीजों को कितनी परेशानी ओर इंतजार करना पड़ता है।

विभाग को भेजी है समस्या
सिविल सर्जन डा. सुरेंद्र नैन ने माना कि अस्पताल में डाक्टरों की कमी है। इस बारे में विभाग को सूचित किया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही अस्पताल में चिकित्सकों की तैनाती होगी। कम चिकित्सकों के बावजूद प्रयास किया जा रहा है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी न हो।

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