गिरते भूजल स्तर से डबल खतरा

Karnal Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
कैथल। जिले में भूमिगत जल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इससे दोगुना खतरा पैदा हो गया है। एक तो सीमित भूमिगत जल शीघ्रता से समाप्त हो रहा है दूसरा, ट्यूबवेलों के लिए बनाएं कुओं की खुदाई करते समय निरंतर हादसे हो रहे हैं। जिले में भूमिगत जल का स्तर 24 मीटर के आसपास है। कई जगहों पर तो यह 30 मीटर तक नीचे गया हुआ है।
विश्व बैंक की टीम द्वारा चलाए जा रहे पायलट प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी सुधींद्र शर्मा के अनुसार कैथल जिले का औसत भूजल स्तर 1999 में आठ मीटर था। अब यह प्रति वर्ष एक मीटर से भी अधिक की दर से नीचे जा रहा है। इस समय जिले का जलस्तर लगभग 24 मीटर की गहराई पर है। कई गांवों में तो यह 30 से 40 मीटर तक चला गया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पानी यदि इसी गति से नीचे जाता रहा तो जिले के कई इलाकों में आने वाले समय में पीने तक का पानी नहीं मिलेगा।
दो बड़े हादसे हुए
पिछले दो महीने में ही भू-जलस्तर के कारण दो बड़े हादसे हो चुके हैं। इसमें एक मजदूर की मौत हो गई थी और दो बच गए। सात जून को गुहला के गांव दाबा में कुएं की गहराई बढ़ाते समय पंजाब के समाना निवासी बिंद्र सिंह किसान कश्मीर सिंह के खेत में 65 फुट की गहराई में दब गया था। उसे दो दिन बाद तक निकाला जा सका। इसमें उसकी मौत हो गई थी। इसी सप्ताह 14 अगस्त शाम को गांव किठाना में जींद के गांव थुआ निवासी दो मजदूर दब गए। उन्हें रात करीब दस बजे पानी नहीं बचाया तो भुगतेंगे परिणाम
आंकड़ों से भी भयानक स्थिति
भूजल स्तर को लेकर कैथल जिले में शोध कर आरकेएसडी कालेज के प्रोफेसर संजय गोयल ने 2010 अमेरिका में शोध पत्र प्रस्तुत किया था। प्रो. गोयल के अनुसार जिले में स्थिति आंकड़ों से कई गुणा ज्यादा खतरनाक है। एक ओर तो जिले के अच्छी गुणवत्ता वाले इलाकों सीवन, पूंडरी, गुहला-चीका, कैथल ब्लॉक में लगातार पानी नीचे जा रहा है। राजौंद एवं कलायत में पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण अपेक्षाकृत कम नीचे जा रहा है। ऐसे में कम गुणवत्ता वाला पानी अच्छी गुणवत्ता वाले इलाके में स्थानांतरित हो रहा है। अगर यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में पीने तक का पानी नहीं मिलेगा। जो पानी मिलेगा उसकी गुणवत्ता खराब होगी। प्रो. संजय के अनुसार धान की सीधी बिजाई एवं गेहूं और धान के फसल चक्र से मुक्ति के बाद ही भूमि गत जलस्तर को बचाया जा सकता है।

अंधाधुंध दोहन से गिरा जल स्तर
जिले में किसान धान, गेहूं के फसल चक्र में मजबूरी में बरसात कम होने के कारण भूजल स्तर का अंधाधुंध दोहन कर रहे हैं। कैथल शहर एवं कस्बों में भी लोग बिना जरूरत के भी पानी के लिए लगाए गए सब मर्सीबल पंपों के माध्यम से लाखों लीटर पानी हर रोज जमीन के अंदर से निकाल रहे हैं।
मजबूर हैं किसान
देश-विदेश में आवार्ड जीत चुके किसान ईश्वर सिंह कुंडू का कहना है कि बरसात न होने के कारण ट्यूबवेलों की गहराई बढ़ाना किसानों की, खुदाई करना मजदूरों की मजबूरी है। जल सरंक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्कता है।

लोगों को कर रहे जागरूक
जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेंद्र मोहन ने कहा कि गिरता भू-जलस्तर चिंता का कारण है। कैथल ब्लॉक में केंद्र सरकार द्वारा विशेष पायलेट प्रोजेक्ट चलाया हुआ है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की बचत के लिए जागरूक किया जा रहा है। शहरों में प्रत्येक घरों में पानी का कनेक्शन देकर वाटर मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।

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