पंच देंगे सामूहिक इस्तीफा

Karnal Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
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करनाल। निगदू गांव के सरपंच पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में देरी और सरपंच को प्रशासनिक संरक्षण से दुखी गांव के सात पंचों ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने का ऐलान किया है। यह पंच स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री को अपना त्यागपत्र देंगे।
पंच और ग्रामीण सोमवार को अपनी मांगों को लेकर डीसी से मिले और उन्हें चेताया कि अगर इसकी जांच नहीं हुई तो आंदोलन होगा। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वह आर-पार की लड़ाई लडे़ंगे और प्रशासन की पोल खोलने के लिए जगह-जगह धरना देकर लोगों को सारी कहानी बताएंगे। उधर, इस मामले में प्रशासन ने कोई रुचि नहीं दिखाई और कहा कि जिसे जो करना है करे।

इन पंचों ने की त्यागपत्र की घोषणा
गांव निगदू के पंच रामदिया, धूम सिंह, रमेश, गुड्डी देवी, महेंद्रो, सुरेंद्र कौर और ममता ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने की घोषणा की है। इनका कहना है कि गांव की पंचायत में 19 पंच हैं। आरोप है कि गांव की सरपंच ने कई घोटाले किए और प्रशासन ने सख्त रुख अपनाने के बजाए उन्हें रियायतें दीं। शिकायत में कहा गया है कि जिला न्यायालय भी आरोप सिद्ध कर चुका है, पर सरपंच के खिलाफ कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। आरोप है कि जानबूझकर सरपंच को बचाया जा रहा है और भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है। कई जांच एडीसी और बीडीपीओ के पास लंबित होने की बात कही गई है।

सीएम को देंगे सामूहिक त्यागपत्र
पंचों ने साफ कर दिया है कि वह शिकायत करके तंग आ चुके हैं और इस मामले में निष्पक्ष जांच हो सके इसके लिए अब सामूहिक इस्तीफा सीएम को देंगे। इस मामले में सोमवार को गांव निगदू के पंच और ग्रामीण उपायुक्त रेनू एस फुलिया से उनके कार्यालय में मिले और उन्होंने भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया। इस मामले में पंचों ने शिकायत मुख्य सचिव, लोकायुक्त और वित्तायुक्त से भी की गई है।


सरपंच हो चुकी हैं निलंबित
गांव की सरपंच गबन के एक अन्य मामले में निलंबित भी हो चुकी है। आरोप है कि उपायुक्त ने निलंबन के बाद उसे गैर कानूनी तरीके से बहाल कर दिया और तब से उसे बचाने की कवायद जारी है।

यह हैं सरपंच पर आरोप
1. जुलाई 2010 और अगस्त 2010 में मृतक व्यक्तियों की पेंशन का गबन। जांच के बाद उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस दिया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। बीडीपीओ ने जांच में आरोपों को सत्य बताया।

2. 13 अक्टूबर 2011 को कैश इन हैंड 25 हजार से छह लाख रुपये प्रतिमाह रखने के आरोपों को भी बीडीपीओ ने रिपोर्ट में सत्य बताया। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं हुई।

3. इससे पूर्व दो बार पंचायत फंड में गबन और मृतकों की पेंशन के गबन के आरोप लगे। बीडीपीओ ने आरोप सिद्ध किए, पर कार्रवाई के बजाय उपायुक्त ने सरपंच को भविष्य में ऐसी गलती न करने की चेतावनी देकर छोड़ दिया। यह समझ नहीं आता कि इस सरपंच पर इतनी मेहरबानी क्यों?

इस मामले में जब करनाल की उपायुक्त रेनू एस फुलिया से बात की गई तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि सरपंच के अलावा ओर कोई काम भी कर लेने दो, सरपंच का ही काम रह गया है क्या? जब उनसे पूछा गया कि पंच सीएम को त्यागपत्र देने की बात कह रहे हैं, तो उन्होंने कहा कोई नहीं देख लेंगें। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया।

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