कस्तूरबा गांधी स्कूल का रिजल्ट

Karnal Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
राजौंद। सरकार द्वारा विशेष सहायता प्राप्त जिले का एकमात्र कस्तूरबा गांधी विद्यालय का परीक्षा परिणाम बेहद निराशाजनक रहा। स्कूल की 22 छात्राओं में से केवल दो उत्तीर्ण हुईं। उनके अभिभावकों का कहना है कि लड़कियों को स्कूल में पढ़ाने का कोई औचित्य नहीं रहता। अभिभावकों ने निराशाजनक परिणाम के लिए शिक्षकों को दोेषी ठहराया है। वहीं, अध्यापक इसके पीछे शिक्षकों की कमी बता रहे हैं।
स्कूल में पांच कक्षाओं को पढ़ाने के लिए मात्र तीन अध्यापक नियुक्ति पर हैं। पांच कक्षाओं के लिए किसी अन्य स्कूल में केवल दो कमरे लिए गए हैं। एक कक्षा के बच्चे तो रसोई घर में बैठकर पढ़ाई करते हैं। नियमों के अनुसार इन स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के लाने-ले जाने के लिए वाहन का प्रावधान है, लेकिन यह स्कूल इस सुविधा से भी अछूता है। इस स्कूल के लिए केंद्र सरकार द्वारा भारी बजट देने का भी प्रावधान है। विभाग की बेरुखी देखिए कि बजट को इस्तेमाल करने की बजाय उसे वापस भेज दिया।
शिक्षा का निजीकरण कर रही सरकार: अध्यापक संघ:
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेश संगठन सचिव और कृष्ण कुमार निर्माण ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि शिक्षा में कोई सुधार हो। सरकार स्वयं ही शिक्षा का भट्ठा बैठाने पर तुली आए दिन नई नई नीतियां लागू करके शिक्षा का निजीकरण करने पर तुली है। निर्माण ने कहा कि कस्तूरबा गांधी विद्यालय लूट का एक अड्डा हैं।
अभी मिला है स्कूल: डीपीसी
सर्व शिक्षा अभियान की जिला परियोजना अधिकारी निर्मल तनेजा का कहना है कि उनके पास यह विद्यालय अभी आया है। पहले यह विद्यालय दूसरे विभाग के पास था। सर्व शिक्षा अभियान के पास विद्यालय अभी आया है। वे बच्चों को सुविधाएं देने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने बच्चों की किताबें स्कूल में भिजवा दी हैं। बाकी की सुविधाएं भी विद्यालय को दी जाएंगी।

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