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गरीब बच्चों को न घर और न ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर मिल रहा भर पेट भोजन

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Sat, 20 Apr 2019 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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करनाल। जिले में गरीब नौनिहालों को न तो घर पर भरपेट भोजन मिल रहा है और न ही आंगनबाड़ी केंद्रों में। यही कारण है कि ये नौनिहाल कमजोर तो हो ही रहे हैं, उनमें से अति कुपोषित भी हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की पिछले महीने की रिपोर्ट के अनुसार 116 बच्चे अति कुपोषित बच्चे हैं। इनमें सबसे ज्यादा 72 बच्चियां हैं। हर महीने अति कुपोषित बच्चों का यह आंकड़ा 100 से ऊपर ही रहता है। वहीं, हम कुपोषित यानी कि शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों की बात करें तो उनकी संख्या 7984 है।
बाल विकास विभाग दावा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में इन नौनिहालों को दूध, पंजीरी, मूंगफली, सोयाबीन आदि पौष्टिक खाद्य सामग्री दी जाती है। इसके बावजूद जिले में 8100 बच्चे कुपोषित और अति कुपोषित हैं। यह बड़ा सवाल है? वहीं दूसरी ओर लोगों ने आरोप लगाए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों में सभी बच्चों को यह खाद्य सामग्री नहीं मिलती है। यही कारण है कि 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन घटता जा रहा है। इन दिनों जिले में पांच वर्ष के एक लाख 8 हजार 79 बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्रों पर मार्च में वजन किया गया।

करनाल ग्रामीण, नीलोखेड़ी व घरौंड़ा में है सबसे ज्यादा अति कुपोषित
जिले में सबसे ज्यादा घरौंडा, नीलोखेड़ी व करनाल ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे अति कुपोषित है, जिन्हें भरपेट भोजन नहीं मिल रहा। जिले में 116 कुपोषित बच्चे हैं, लेकिन नीलोखेड़ी में सबसे ज्यादा 33 और घरौंडा में 29 बच्चे हैं। इतना ही नहीं करनाला ग्रामीण में 24 बच्चे अति कुपोषित हैं। कमजोर बच्चों की संख्या भी सबसे अधिक 2010 घरौंडा में है। इंद्री में 1327 कमजोर बच्चे हैं।

हर महीने आंगनबाड़ी केंद्र में होता है वजन
जिले में 1428 आंगनबाड़ी केंद्र हैं इनके क्षेत्र में आने वाले सभी बच्चों का वजन किया जाता है। जब बच्चा पैदा होता है तो उस बच्चे का वजन हर सप्ताह नोट किया जाता है, इसके बाद एक महीने का बच्चा होने पर उसका वजन हर महीने किया जाता है।

फेट वाली चीजे बच्चों को दें अधिक
बच्चों को घी, तेल सहित वे खाद्य सामग्री अधिक खिलाएं जिनमें फेट हो। इसके साथ ही बच्चों को चीनी न देकर गुड व शुगर दें। इन सभी से बच्चे का वजन बढ़ेगा। बच्चे को जो भी खाना खिलाएं उसमें हल्का सा घी जरूर डालें।

मार्च माह की रिपोर्ट में जिले में 7984 बच्चों को वजन कम पाया गया और 116 बच्चे कुपोषित हैं। आंगनबाड़ी वर्करों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निरंतर इन बच्चों के घर जाकर इनके अभिभावकों को जागरूक करें और बच्चों की डाइट के बारे में बताए। ताकि उन बच्चों का वजन बढ़ सके। कुपोषित बच्चों का सरकारी अस्पताल में इलाज भी कराया जाता है।
-राजबाला, जिला परियोजना अधिकारी, महिला एवं बाल विकास करनाल।

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