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दस साल में जिले में लगाए गए हैं 75 लाख 86 हजार 653

Updated Sun, 04 Jun 2017 11:39 PM IST
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शहर से गायब हो चली है हरियाली
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नसीब सैनी
कैथल। वन विभाग की मानें तो पिछले दस साल में जिले में 75 लाख 86 हजार 653 पौधे लगाए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाने के बावजूद जिले में महज 4 लाख 54 हजार 559 पेड़ वन विभाग के रिकॉर्ड में हैं। इस साल भी गिनती अभी चल रही है। जिसमें संख्या कुछ बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन 75 लाख में से यदि 50 लाख पौधे भी पेड़ बन जाते तो आज जिस गर्मी के मौसम में हमें परेशानी हो रही है। शायद उसमें बड़ी राहत मिलती। वन विभाग की ढीली नीतियों व खुद आम जन की पेड़ लगाने व उसकी देखभाल में कम रुचि के कारण लगातार पेड़ कम हो रहे हैं और हमें पर्यावरण संबंधी परेशानियां आ रही हैं।
वन विभाग द्वारा वर्ष 2007-08 में 1400 हेक्टेयर व 874 किलोमीटर रोड पर 18 लाख पौधे लगाए गए। अगले साल 1385 हेक्टेयर व 1209 किलोमीटर रोड में 19 लाख 14 हजार 50 पौधे लगाए गए। 2009-10 में 526 हेक्टेयर व 657 किलोमीटर रोड में 7 लाख 64 हजार 524 पौधे, 2010-2011 में 503 हेक्टेयर, 661 किलोमीटर रोड में 7 लाख 31 हजार 172 पौधे, 2011-12 में 385 हेक्टेयर व 666 किलोमीटर रोड में 6 लाख 22 हजार 630, 2013-13 में 280 हेक्टेयर, 634 किलोमीटर रोड में 5 लाख 20 हजार 97, 2013-14 में 240 हेक्टेयर व 340 किलोमीटर रोड में 3 लाख 26 हजार, 2014-15 में 454 हेक्टेयर व 245 किलामीटर रोड में 3 लाख 67 हजार 895, 2015-16 में 247 हेक्टेयर व 340 किलोमीटर रोड में 2 लाख 82 हजार 15 और 2016-17 में 371 हेक्टेयर व 138 किलोमीटर रोड में 2 लाख 58 हजार 260 पौधे लगाए गए हैं।

विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2013-14 तक लगाए गए पौधों के बाद सर्वे किया गया था। उस समय 4 लाख 54 हजार 559 पेड़ हैं। शेष वर्षों के पेड़ों की संख्या पता लगाने के लिए अभी सर्वे चल रहा है। इसके बाद सही जानकारी मिल पाएगी कि जिले में कितने पेड़ हैं। फिलहाल रिकॉर्ड के अनुसार 4 लाख 54 हजार 559 हैं।

कहां गए इतनी बड़ी संख्या में लगाए गए पौधे
सवाल उठता है कि विभाग ने इन 75 लाख 86 हजार 653 पौधों को तैयार करने व लगाने पर करोड़ों रुपये खर्च किया होगा। वहीं लोगों द्वारा भी पौधारोपण किया गया है। ऐसे में ये पौधे कहां लापता हो गए। जिसमें संभावनाएं अधिक ये भी हैं कि लगाने के बाद इनका संरक्षण नहीं किया गया।

जनसहयोग भी नहीं मिल पा रहा पर्यावरण संरक्षण में
वन विभाग में पौधे तैयार करके लोगों को देने सहित सरकारी तौर पर भी पौधारोपण किया जाता है। लेेकिन जन सहयोग के बिना यह मुहिम रंग नहीं ला पाएगी। आम जन भी पौधे लगाती हैं लेकिन देखभाल के बिना पौधे कुछ ही दिनों में खत्म हो जाते हैं। जिस कारण गर्मी के इस मौसम में सूर्यदेव का प्रकोप सहन करना पड़ रहा है।

शहर से हरियाली लगभग गायब
कुछ साल पहले शहर में ही सड़कों के किनारे सफेदे सहित कई प्रकार के बड़े पेड़ थे। ये पेड़ विकास की बलि तो चढ़ गए। लेकिन उनके स्थान पर कोई पौधारोपण नहीं हुआ। जिस कारण शहर से हरियाली लगभग गायब है। जिस कारण पूरा शहर कंकरीट के जंगल की तर्ज पर विकसित हो रहा है।
पर्यावरण अपीलीय प्राधिकरण के सदस्य सुखदेव कुंडू का कहना है कि पौधे लगाना ही जरूरी नहीं है, पौधों का संरक्षण उससे भी ज्यादा जरूरी है। भारतीय जीवन पद्धति में ही पर्यावरण का संरक्षण शामिल है। तुलसी को मां मानना, पीपल को देवता सहित इस तरह की बातें हमें सीखाती हैं कि पर्यावरण संरक्षण कितना जरूरी है। चाहे सरकारी विभाग हो या आम नागरिक, पौधे लगाएं। उनकी बच्चे की तरह देखभाल करें।
कृषक वैज्ञानिक एवं पर्यावरणविद ईश्वर कुंडू का कहना है कि पौधों को जैविक आधार पर खाद व पानी दिया जाए तो इनके बचने की संभावनाएं ज्यादा रहती हैं। कई पौधे केवल पानी की कमी में मर जाते हैं। इसलिए समय पर पानी व जैविक खादों से इनकी देखभाल करनी चाहिए।

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