तीन हजार एकड़ पर नहीं होगी रबी फसलों की बिजाई, 45 हजार क्विंटल कम पैदा होगा अनाज

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Sun, 25 Nov 2018 01:16 AM IST
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चरखी दादरी। रबी के सीजन में जलभराव की वजह से करीब तीन हजार एकड़ क्षेत्र में बिजाई का कार्य नहीं हो सकेगा। इससे जिले में करीब 45 हजार क्विंटल अनाज की पैदावार घटने की उम्मीद है। 31 अक्तूबर तक सरकार ने इन जलभराव वाले एरिया से पानी की निकासी के निर्देश दिए थे लेकिन अभी भी कई गांवों में जलभराव की वजह से खेतों की स्थिति खराब बनी हुई है। अकेले गांव इमलोटा में करीब 600 एकड़ जमीन पर बिजाई नहीं हो सकेगी।
23 से 25 सितंबर तक जिले में हुई मानसून की पछेती बारिश की वजह से जिले के एक दर्जन गांवों में जलभराव की ज्यादा समस्या बन गई थी। बौंद कलां क्षेत्र में दो बार ड्रेन टूटने की वजह से पानी घरों में भी घुस गया था। खेत पूरी तरह से जलमग्न हो गए थे। जलभराव होने पर सीएम के निर्देश पर प्रशासन के उच्चस्तर के अधिकारियों ने जलभराव प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर पानी निकासी के प्रबंध किए गए ताकि रबी की फसलों की बिजाई से पहले खेतों से पानी की निकासी की जा सके। जलभराव की वजह से गांव चरखी, इमलोटा, बौंद कलां, मिसरी, जयश्री, बिरही कलां, पांडवान सहित एक दर्जन गांवों में खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें खराब हो गई थी। जलभराव से कपास, बाजरा व ग्वार की फसलों में भारी नुकसान पहुंचा। इस नुकसान की भरपाई के लिए सरकार के निर्देश पर प्रशासन की ओर से गिरदावरी भी करवाई गई ताकि पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया जा सके। अब नवंबर माह बीतने को है लेकिन कई निचले क्षेत्रों में जलभराव बना हुआ है। यह तराई एरिया होने की वजह से अब यहां रबी की गेहूं की फसल की बिजाई करना पूरी तरह से असंभव बना हुआ है। आने वाले दिनो में तापमान गिरने की वजह से पानी सूखने के चांस और कम हो जाएंगे। गेहूं की अगेती बिजाई का समय 25 नवंबर तक माना जाता है।
इमलोटा में 600, चरखी में 400 व बौंदकलां में 500 एकड़ भूमि जलभराव प्रभावित
गांव इमलोटा में करीब 600 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में रबी की फसलों की बिजाई नहीं हो सकेगी। गांव के सरपंच प्रतिनिधि ओमप्रकाश ने अमर उजाला बताया कि गांव के कई भागों में जलभराव से जमीन खराब हो गई है ऐसे में इस जमीन पर फसलों की बिजाई होना पाना बेहद मुश्किल है। गांव चरखी भी करीब 400 एकड़ जमीन पर बिजाई नहीं हो सकेगी। गांव चरखी चारो ओर से नहरों से घिरा है। यह एरिया तराई युक्त होने की वजह से खेतों में रबी की बिजाई होना पाना असंभव है। नीचले क्षेत्रों मेें जलभराव से जमीन खराब भी हो गई है। गांव बिरही कलां में भी करीब 100 एकड़ जमीन पर रबी की फसलों की बिजाई नहीं हो सकेगी। इस गांव का रकबा भी तराईयुक्त है। सरपंच प्रतिनिधि धमेंद्र ने बताया कि करीब 100 एकड़ जमीन पर बिजाई होना असंभव है। इसी प्रकार गांव पांडवान में भी करीब 50 एकड़ जमीन बिजाई से वंचित रहेगी। गांव मिसरी में भी जलभराव से हर साल हालात खराब होते हैं। इस बार करीब 600 एकड़ जमीन पर बिजाई नहीं हो सकेगी। गांव की काफी जमीन बार- बार जलभराव की वजह से खराब भी हो चुकी है। इसी प्रकार बौंद कलां क्षेत्र में भी करीब 500 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में रबी की फसलों की बिजाई होना मुश्किल बना हुआ है। इस क्षेत्र में जलभराव का सबसे ज्यादा प्रभाव रहा है। इस प्रकार गांव भागवी, सरूपगढ़ सहित गांवों में भी बिजाई से काफी जमीन वंचित रहेगी। जिले में करीब तीन हजार एकड़ जमीन पर बिजाई नहीं हो पाएगी।


गांव में करीब 600 एकड़ से ज्यादा जमीन पर बिजाई होना मुश्किल है। भारी मात्रा में जलभराव होने की वजह से किसान गेहूं की पछेती बिजाई भी नहीं कर पाएंगे। जलभराव से खरीफ की फसलों में भी भारी नुकसान हुआ है। - सरपंच प्रतिनिधि ओमप्रकाश, इमलोटा

गांव में करीब 400 एकड़ जमीन पर बिजाई होना मुश्किल बना हुआ है। इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी। खरीफ की फसलों में भी नुकसान हो चुका है।
सरपंच गुलजारी, चरखी

गांव में हर साल जलभराव की समस्या बनती है। पिछले कुछ साल हालात सुधरे थे लेकिन इस बार फिर भी जलभराव होने पर करीब 600 एकड़ जमीन पर रबी की फसलों की बिजाई नहीं हो सकेगी। - सरपंच अनिता, गांव मिसरी

समय से पहले पानी निकासी हो जाती तो किसान गेहूं की पछेती बिजाई ही कर लेतेे। जलभराव से खरीफ की कपास, बाजरा व ग्वार की फसलों में भी किसानों को भारी नुकसान हुआ है। जिले में किसानों पर इस बार दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है। - राजकरण पांडवान, सरपंच एसोसिएशन प्रधान
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