अफगानी किसान पहुंचे मांगेआना फार्म

Hisar Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
अफगानिस्तान के 12 राज्यों के 17 किसानों का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा सिरसा
डबवाली (सिरसा)। अफगानिस्तान में चल रहे गृहयुद्ध का दंश वहां के किसान भी भुगत रहे हैं। युद्ध के कारण किसानों की फसलें तबाह हो जाती हैं। जिससे उनकी रोजी-रोटी भी छिन जाती है। यह कहना है अफगानिस्तान से आए किसानों का। जिन्हाेेंने गांव मांगेआना में फार्म का दौरा किया और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के बारे में जानकारी जुटाई।
अफगानिस्तान के 12 राज्यों के 17 विकासशील किसानों का एक दल सोमवार को इंडो-इजरायल प्रोजेक्ट के तहत गांव मांगेआना में स्थापित फल उत्कृष्टता केंद्र पहुंचा। किसानों ने पौधे की बिजाई से लेकर सिंचाई तक अपनाई जाने वाली तकनीक की जानकारी प्राप्त की। अफगानिस्तान के किसानों का नेतृत्व यूनाईटेड नेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम के कोर्डिनेटर अब्दुल वाही इब्राहिम कर रहे थे। फल उत्कृष्टता केंद्र मांगेआना में जिला उद्यान अधिकारी आत्मप्रकाश तथा प्रोजेक्ट अधिकारी पवन कुमार ने किसानों के दल को इंडो-इजरायल प्रोजेक्ट के तहत बने उपरोक्त केंद्र की जानकारी दी। किसानों ने फार्म का अवलोकन किया। केंद्र में समतल भूमि की अपेक्षा ऊंचाई करके लगाए गए पौधों तथा सिंचाई के लिए अपनाई जाने वाले ड्रिप सिस्टम से किसान विशेष प्रभावित हुए।इस अवसर पर उद्यान अधिकारी औढ़ां डा. अमर सिंह पूनियां, डा. सत्यवीर शर्मा सहायक, डा. रमेश कुमार मैनेजर, डा. कृष्ण कमार मैनेजर घरौंडा फार्म उपस्थित थे।

भारत कर रहा अफगानिस्तान की मदद
अब्दुलवाही इब्राहिम ने बताया कि अफगानिस्तान में कृषि को बढ़ावा देने के लिए भारत उनकी मदद कर रहा है। उनके देश के 644 युवा भारत के विभिन्न कृषि विवि से कृषि का वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इब्राहिम के अनुसार उनके देश में एक भी कृषि विवि नहीं है। अब भारत के सहयोग सेे अफगानिस्तान ने कृषि विवि की स्थापना का मसौदा तैयार किया है। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान में अनार, अंगूर तथा बादाम की फसल बहुतयात से होती है लेकिन मार्केट न होने के कारण उनकी इन फसलों को उचित दाम नहीं मिल पाता। उनके अनुसार भारत से इस बारे में उनके देश की सरकार समझौता करने के प्रयास में है। उन्हें उम्मीद है कि इससे फायदा होगा। इब्राहिम के अनुसार उपरोक्त फल और मेवे की फसल केवल पांच माह में मिलती है। वर्ष के सात माह उन्हें भीषण सदी का सामना करना पड़ता है। इस मौसम में वे केवल गेहूं की फसल ही उपजा पाते हैं।
बहुत मिलती है दोनों देशों की संस्कृति
कंधार के किसान दीन मोहम्मद ने बताया कि अफगानिस्तान में चल रहे गृहयुद्ध से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। उनकी फसलों का मुआवजा उनके देश की सरकार उन्हें देती है। जो उनके जख्मों पर मरहम का काम करता है। अगर सरकार मुआवजा न दे तो वे बिल्कुल बर्बाद हो जाएं। किसानों के अनुसार अफगानिस्तान और भारत की संस्कृति मिलती जुलती है। भारत की तरह वहां भी संयुक्त परिवार हैं। खान-पान भी भारत जैसा ही है।

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