रोडवेज कर्मियों ने किया विरोध प्रदर्शन

Hisar Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
हिसार। प्रदेश सरकार द्वारा 3519 निजी परमिट दिए जाने की अधिसूचना जारी करने के साथ ही रोडवेज कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कर्मचारियों ने शनिवार को हिसार बस अड्डे पर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों ने इस फैसले को रोडवेज को बर्बाद करने वाला करार दिया है। प्रदर्शन की अध्यक्षता हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के डिपो प्रधान अनूप सहारण एवं हरियाणा रोडवेज वर्करज यूनियन के नेता परमजीत बडाला ने संयुक्त रूप से की।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान दलबीर किरमारा ने कहा कि हुड्डा सरकार परिवहन विभाग को तहस-नहस करने की योजना बना रही है। इसी के चलते 3519 रूट परमिट निजी हाथों में देने का फैसला किया गया है। सरकार ने ये परमिट देते समय राष्ट्रीय राजमार्गों को भी निजी बसों के हवाले करने का ऐलान कर दिया है। गांवों की पंचायतें, छात्र वर्ग एवं ग्रामीण जनता मांग करती रही है कि उनके रूटों पर सरकारी बसों का प्रबंध किया जाए। सरकारी बसों की मांग पूरी तरह से जायज है और हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ पूरी तरह से छात्रों एवं ग्रामीण जनता के साथ है। यदि सरकार ने अपना जनविरोधी व कर्मचारी विरोधी फैसला नहीं बदला तो ग्रामीण जनता व छात्र वर्ग को साथ लेकर इन परमिटों के खिलाफ जोरदार आंदोलन छेड़ा जाएगा।
दलबीर किरमारा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी 3519 परमिटों में 328 परमिट हिसार जिले के हैं। इनमें हिसार-आदमपुर, हिसार-टोहाना, हिसार-बालसमंद, हिसार-बहल, हिसार-सिवानी-झूंपा, हांसी-भिवानी, हिसार-भूना, हिसार-महम, हांसी-जींद, अंबाला-चंडीगढ़ सहित अनेक प्रमुख है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के रूट भी निजी बसों के हवाले कर दिए जाने से रोडवेज पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी तथा कर्मचारियों, छात्रों व आम जनता के समक्ष आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि रोडवेज को बर्बाद करने का ताना-बाना वर्ष 1993 में 800 निजी परमिट देकर रचा गया और बाद की सरकार में भी यह जारी रहा। इनेलो सरकार में रोडवेज के सुधारीकरण का प्रयास करते हुए रोडवेज बेडे़ में बसों की संख्या बढ़ाई गई लेकिन बाद में बनी हुड्डा सरकार तो पूरी तरह से विभाग को बर्बाद करने पर तुल गई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पूर्व में दिए गए 800 परमिटों की छानबीन करके जनता की राय जान लेती तो अब 3519 निजी परमिट देने का जरूरत नहीं पड़ती लेकिन सरकार जनता की उपेक्षा करके अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए जनता पर अपनी मनमर्जी थोप रही है। उन्होंने ऐलान किया कि जींद में 2 दिसम्बर को संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक होगी जिसमें सरकार के खिलाफ सीधे आंदोलन की घोषणा कर दी जाएगी।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने रोडवेज वर्कशॉप से बस अड्डे तक सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा आजाद सिंह गिल, सूरजभान बिश्नोई, राजबीर दलाल, सुभाष किरमारा, महेन्द्र सिंह रूलाहनिया, देशबंधु, राममेहर सिवाच, रामकुमार जांगड़ा, रमेश गिल व अशोक सहित अनेक पदाधिकारी व कर्मचारी भी थे।

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