गोरखपुर में भरोसे की कवायद जारी

Hisar Updated Fri, 26 Oct 2012 12:00 PM IST
फतेहाबाद। उत्तर प्रदेश के नरौरा स्थित परमाणु बिजली संयंत्र का दौरा करके गांव गोरखपुर के किसानाें व अधिकारियाें का तीसरा दल वीरवार को फतेहाबाद लौट आया। इस दल में कुल 57 सदस्य शामिल थे। यह दल रतिया के तहसीलदार राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में नरौरा गया था।
इस दल में भूना के बीडीपीओ रविंद्र दलाल और टोहाना के सहायक सूचना व जनसंपर्क अधिकारी सत्यपाल सिंह सहित कुल 10 प्रशासनिक सदस्य और 43 किसान व ग्रामीण शामिल थे। इनके साथ गोरखपुर परमाणु प्लांट के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय कुमार गुमाश्ता और एक्सईएन वीके शर्मा भी दौरे पर गए थे।
इस दल ने नरोरा में परमाणु संयंत्र की कार्यप्रणाली को देखा। संयंत्र के विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि 700 एकड़ भूमि में बना यह प्लांट 1979 से चल रहा है। वर्तमान में इस संयंत्र में 220 मेगावाट की दो यूनिट चल रही हैं जिनमें 1300 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 80 के दशक की तकनीक पर आधारित है। उन्होंने यह भी बताया कि गोरखपुर में तो इससे अति आधुनिक तकनीक के प्लांट लगाए जाएंगे जो सुरक्षा की दृष्टि से इससे भी कहीं बेहतर होंगे।
एनपीसीआईएल के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके गुमाश्ता ने दल के सदस्यों को कूलिंग टावर के अंदर ले जाकर दिखाया कि वहां से निकलने वाली वाष्प रेडिएशन या धुआं नहीं बल्कि पानी की भाप है। ट्रेनिंग सेंटर में ग्रामीणों ने फ्यूल बंडल को भी अपने हाथ में लेकर देखा। उन्होंने उस स्थान पर मछलियां, कछुए और अन्य जलीय जीव देखे जहां पर प्लांट से निकले पानी को छोड़ा जाता है। विशेषज्ञों ने बताया कि प्लांट की तकनीक किसी भी आपातकाल अथवा खतरे के समय 2 सेकंड के समय में ही पूरी प्रक्रिया को रोक देती है।

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परमाणु संयंत्र से वनस्पति को नुकसान नहीं
केंद्र निदेशक एसके शर्मा ने किसानों को भरोसा दिलाया कि परमाणु संयंत्र से वनस्पति और जीवन को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से मानव शरीर को 2200 यूनिट रेडिएशन मिलता है और परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड ने संयंत्र से 1000 यूनिट रेडिएशन की मात्रा निर्धारित की है। लेकिन 20 सालों का अध्ययन बताता है कि नरोरा परमाणु प्लांट से कभी 0.4 से ज्यादा यूनिट रेडिएशन पैदा नहीं हुआ। नरोरा प्लांट के मुख्य अधीक्षक डीएस चौधरी ने बताया कि इस प्लांट के 5 किलोमीटर के दायरे में सघन आबादी वाले 80 गांव बसे हुए हैं। किसी के खेत, जानवर अथवा स्वास्थ्य पर प्लांट से कोई नुकसान नहीं देखा गया है। दल के सदस्य आवासीय कालोनी में घूमे और यहां की स्वच्छता, सड़कें, स्ट्रीट लाइटें, सुरक्षा व्यवस्था, स्कूल, अस्पताल, पार्क, मंदिर, गेस्ट हाउस, स्टेडियम व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट आदि देखकर काफी प्रभावित हुए। दल के सदस्यों ने नरौरा में आम नागरिकों और किसानों से भी मुलाकात की और परमाणु संयंत्र के प्रभावों व इसके कारण क्षेत्र में आए बदलावों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली।

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