पाक जासूस ने धोखा देकर भारतीय सेना को पीछे करवाया

Hisar Updated Sat, 20 Oct 2012 12:00 PM IST
जुलानी गांव(जींद)। 22 अक्तूबर 1962 के दिन को वह कभी भी नहीं भूल सकता है। आज भी दिल में एक टीस सी उठती है काश हम तेजपुर बार्डर पर जाकर फायरिंंग करते हुए बेशक शहीद हो जाते। लेकिन ऐसा मौका हमें पाकिस्तानी जासूस ने नहीं मिलने दिया। जासूस भारतीय सेना के अधिकारी की वेशभूषा धारण करके भारतीय सैनिकों को तेजपुर बार्डर से पीछे हटने के आदेश दिए। सैनिकों ने उसके आदेशों की पालना करते हुए बार्डर को छोड़ दिया। इसी कारण झज्जर जिले के गांव सांखोल के ब्रिगेडियर होश्यार सिंह शहीद हुए। चीन के साथ युद्ध परिणाम कुछ भी क्यों न रहे होते। लेकिन शहीद होने का मौका उन्हें नहीं मिल पाया। इसका मलाल तब भी था और आज भी दिल को सालता है। यह कहना है गांव जुलानी में रह रहे ऑर्डनरी कैप्टन हवासिंह का।
हवासिंह ने बताया कि 20 अक्तूबर 1962 को चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया था। भारत सरकार को इस बात का एहसास नहीं था कि चीन आक्रमण कर देगा। क्योंकि हिंदी-चीनी भाई-भाई का नारा भारत सरकार की तरफ से दिया गया था। लेकिन चीन ने धोखा किया। चीनी सेनाओं ने पूरी तैयार से हमला किया था। भारत की तैयारी बिल्कुल भी नहीं थी और आधुनिक हथियार भी नहीं थे। आक्रमण से पहले भारत की सेना की एक टुकड़ी कांगो दक्षिण अफ्रीका गई हुई थी। भारत पर हमला होने के बाद कांगो से टुकड़ी को बुला लिया गया था। मैं भी उसी टुकड़ी में शामिल था।
50 वर्ष पीछे के उन दिनों को याद करते हुए कहा कि वो तसवीर सामने आती है जब चीन के साथ अचानक युद्ध से भारतीय सेना जूझ रही थी। कई जगह उन मोर्चों पर जहां के बारे में कुछ भी पता नहीं था। दुर्गम इलाके, बर्फीली चोटियां और कोई लद्दाख में तैनात था तो कोई पूर्वी भारत के तवांग में। जब रात के अंधेरे में बत्तियां बुझाने का आदेश होता था तो मन में यही बात उठती थी कि और कितने दिन यह युद्ध चलेगा और हम कितना और खोएंगे आजादी की उमंग थी और जवानों का मनोबल आसमान छू रहा था। लेकिन भारतीय सेनाओं के पास चीन के मुकाबले के लिए उतने आधुनिक हथियार नहीं थे। भारतीय सैनिक थ्री नोट थ्री से चीनी सेना का मुकाबला कर रहे थे। 22 अक्तूबर को उन्हें हेलीकाप्टर से फूटेल पहाड़ी पर उतारा गया। इससे पूर्व मशीनगन को पहाड़ी पर उतारा जाता चीनी सैनिक नजदीक पहुंच चुके थे। भारतीय सैनिक पीछे लौट रहे थे और सामने से अंधाधुंध फायरिंग हो रही थी। हेलीकॉप्टर को कोई नुकसान न पहुंचे उन्हें वापस तेजपुर हवाई पट्टी पर बुला लिया गया और निगरानी सौंप दी गई। इसी दौरान मिल्ट्री इंटेलीजेंटस ने भारतीय सेना की वर्दी में एक मेजर को पकड़ा जो भारतीय मोर्चाें पर सैनिकों में दहशत फैला रहा था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पकड़ा गया मेजर पाकिस्तानी था और भारतीय सैनिकों का मनोबल गिरा रहा था। उन्होंने ही अफवाह फैलाई थी। हमारे सैनिकों के पास बर्फ से बचाने के लिए गर्म कपड़े, हाथों के दस्ताने और गर्म जूते तक नहीं थे। कई सैनिक तूफानी बर्फीले ग्लेशियर में फंस गए तो कुछ को चीनी सेना ने बंदी बना लिया। उन्होंने बताया कि उस समय चीन ने उनके साथ धोखा किया था। हिंदी चीनी भाई-भाई का नारा दिया जा रहा था। लेकिन हम पड़ोसी को समझ नहीं पाए। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। भारतीय सेना की गिनती बेहतरीन सेनाओं में है। यहां के जवानों के जज्बे का कोई मुकाबला नहीं है।

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