दलित संगठनों से नहीं मिली संसदीय समिति

Hisar Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
जींद। दलित महिला उत्पीड़न की घटनाओं की जानकारी जींद प्रशासन से लेने के लिए बुधवार को लोक निर्माण विश्राम गृह में अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्याण के लिए बनी संसदीय समिति की 11 सदस्यीय टीम पहुंची। लेकिन दलित संगठनों को न मिलने देने पर दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और जेपीसी सदस्यों की बसों के आगे लेटकर रोष जताया। यही सब जींद के गांव सच्चाखेड़ा में दुराचार के आरोपी युवकों के परिजनों ने दोहराया। यहां पर कमेटी के सदस्य दुराचार के आरोपियों के परिवारों से नहीं मिले। लेकिन कमेटी को बस रुकवाकर आरोपी के परिजनों ने ज्ञापन सौंपा। जींद के विश्राम गृह में दलित संगठनों के कार्यकर्ता जेपीसी को ज्ञापन सौंपा। लेकिन दोनों ही जगहों पर कमेटी सदस्यों ने बात नहीं की।
बुधवार सुबह संसदीय समिति के आगमन को देखते हुए लोनिवि विश्राम गृह को छावनी में तबदील कर दिया गया था। जेपीसी से मिलने पहुंचे दलित संगठनों के अलावा भाजपा शिष्टमंडल तथा मीडिया को भी जेपीसी से दूर रखा गया। दलित महिला उत्पीड़न तथा दुराचार घटनाओं की जानकारी जुटाने के लिए लोकसभा सांसद गोबिंद चंद्र नश्कर के नेतृत्व में 11 सदस्यीय दल बुधवार सुबह लोक निर्माण विश्राम गृह पहुंचा। कमेटी के आगमन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात कर दिया गया और सरकारी नुमाइंदों के अलावा किसी को अंदर नहीं फटकने दिया।
जलपान करने के बाद संसदीय समिति के सदस्य सवा 11 बजे बस से गांव सच्चाखेड़ा के लिए रवाना हो गए। इससे पूर्व भाजपा पदाधिकारियों तथा दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं की पुलिस अधिकारियों से भी तीखी नोकझोंक हुई। हंगामा उस समय खड़ा हो गया जब ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी की बस विश्राम गृह से बाहर निकलने लगी तो दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन कॉपी लहरानी शुरू कर दी। बस को न रुकता देख दलित संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर लेट गए। कुछ कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन कॉपी खिड़की से सांसदों को सौंप दी। लेकिन उनसे किसी भी सांसद ने बातचीत नहीं की। जिस पर दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने सरकार तथा ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। आखिरकार पुलिस ने सड़क पर लेटे तथा नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं को हटाकर रास्ता साफ किया।
सच्चाखेड़ा गांव में ही यही वाक्या फिर दलितों ने दोहराया। यहां पर दुराचार के आरोपी युवकों के परिजन उस समय जेपीसी कमेटी के बस के सामने लेट गए। जब कमेटी के सदस्य सामूहिक दुराचार से आहत होकर आत्मदाह करने वाली लड़की के परिजनों से मिलने के बाद कैथल के लिए रवाना हो रहे थे। जैसे ही सांसदों की वोल्वो बस गांव के अंदर से गुजर रही थी तो आरोपियों के परिवार बस के आगे लेट गए। बस रुकते ही दलित परिवारों ने कमेटी को ज्ञापन सौंप दिया। ज्ञापन में मांग की गई है कि उनके साथ पुलिस प्रशासन अन्याय कर रहा है। जो व्यक्ति सामूहिक दुराचार में शामिल नहीं थे। उनको आरोपी बनाकर जेल में ठूंस दिया गया है।

उत्पीड़न की जांच को एसटीएफ बने : देवीदास
वाल्मीकि समाज के नेता देवीदास ने कहा कि संसदीय समिति को दलित संगठनों से मिलना चाहिए था और प्रदेश के हालातों के बारे में जानना चाहिए था। लेकिन कमेटी ने ऐसा नहीं किया। फिर जींद आने का कोई औचित्य नहीं बनता है। उन्होंने मांग की कि दलित उत्पीड़न मामलों की जांच के लिए एसटीएफ का गठन किया जाए।

प्रदेश का पूरा प्रशासन पहुंचा था अगुवानी में
संसदीय समिति के आगमन को लेकर बड़ी संख्या में अफसरों ने डेरा डाला हुआ था। हालात यह थे कि जेपीसी से मिलने के इच्छुक लोगों की संख्या कम थी। जबकि सरकारी अमले के अधिकारियों की संख्या ज्यादा थी। प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। डीजीपी रंजीव दलाल, चीफ सेक्रेट्री पीके चौधरी, गृह सचिव समीर माथुर, प्रधान सचिव सुरीना राजन, प्रधान सचिव प्राइमरी राघवेंद्राराव, प्रधान सचिव पंचायत आरआर जोवल, पंचायत विभाग के निदेशक बलबीर मलिक, एडीजीपी ला एंड आर्डर एमएस मान, एडीजीपी वुमेन क्राइम के सेल्वीराज, हिसार रेंज के आईजी अरशिंद्र चावला, करनाल रेंज के आईजी बलबीर सिंह, आईजी क्राइम अखिल मोहम्मद, जींद पुलिस अधीक्षक सौरभ सिंह, हिसार के पुलिस अधीक्षक बी सतीश बालन मौजूद रहे।


संसदीय समिति में शामिल सांसद
सांसद डी राजा, परमजीत कौर गुलशन, ईश्वर सिंह, केएम आनंद, भूदेव, एमजगननाथ, गोबिंदचंद्र नश्कर, रिसांगकिसिंग, अर्जुन कुमार, भारत राम, अशोक रावत, राजेश, ललित मोहन, अशोक तंवर आदि मौजूद थे।

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