महापंचायत में उम्मीद से काफी कम पहुंची खापें

Hisar Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
जींद। 5+2 जन आंदोलन के संयोजक एवं रोहतक के वकील सतवीर सिंह हुड्डा काफी लंबे समय से शिक्षा नियमावली 134 ए की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन खाप पंचायतें इस मुद्दे को लेकर गंभीर दिखाई नहीं दे रही हैं। सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत की तरफ से प्रदेश के सभी खाप पंचायतों को बहबलपुर की महापंचायत में आने का न्यौता दिया। लेकिन गिनी चुनी खाप पंचायतें ही महापंचायत में पहुंची। प्रतिनिधियों की संख्या इतनी कम थी कि पंडाल खाली पड़ा रहा। महापंचायत में जितने भी चौधरियों ने अपने विचार रखे सभी का फोक्स शिक्षा नियमावली की बजाय हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन ही रहा। जबकि महापंचायत का आयोजन शिक्षा नियमावली पर ही रहा। पंचायत की अध्यक्षता कर रहे स्वामी कर्मपाल भी शिक्षा के मुद्दे को कोई खास नहीं छू पाये। उन्होंने इतना भर ही कहा कि वकील सतवीर हुड्डा इस बारे में कुछ बताएगें।
मालूम हो कि शिक्षा नियमावली 134 ए के मुद्दे को लेकर सतवीर हुड्डा सर्वजातिय सर्वखाप महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी कर्मपाल से रोहतक की हुड्डा, सोनीपत कथूरा बारहा, बहु अठगामा व बोहर अठगामा की तरफ से अनुरोध करने के लिए मिले थे। इस अनुरोध स्वीकार करते हुए 30 सितंबर का दिन तय कर दिया। लेकिन जिस तरह से आज खाप चौधरियाें ने बहबलपुर पहुंचकर अपने विचार रखे। उससे तो यह प्रतीत हो रहा था कि वे शिक्षा नियमावली की बजाय हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन को ही प्राथमिकता दे रहे थे।
कालवा बारहा के महावीर सिंह, किनाना बारहा के दरियाव सिंह, गठवाला खाप के महामंत्री अशोक कुमार नंदगढ़ बारहा के फकीरचंद समेत सभी वक्ता शिक्षा नियमावली पर एक भी शब्द नहीं बोले, जबकि उनका पूरा भाषण हिंदू विवाह अधिनियम में संशोधन पर ही रहा। नजफगढ़ दिल्ली से आए मांगेराम सांगवान ने कहा कि अधिनियम में संशोधन करवाए बिना हरियाणवी समाज का ढांचा चरमरा चुका है। सभी खापों की यह प्राथमिकता होनी चाहिए कि वे अधिनियम में संशोधन करवाए। इसके लिए वे अपने अपने क्षेत्र के सांसद पर दबाव बनाए। अमीन चौरासी खाप के भागसिंह का भाषण केवल सामाजिक बुराइयों और कृषि पर केंद्रित रहा।
केवल बांस बारहा हांसी से आए विजयदीप सिंह ने ही शिक्षा नियमावली के मुद्दे पर लंबी चर्चा की। उन्होंने खाप चौधरियों से अनुरोध किया कि वे भी इसी मुद्दे को छूए। लेकिन इसके बाद भी बोलने वाले वक्ता शिक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाये। विजयदीप ने कहा कि न्यायालय शिक्षा नियमावली के कैसे भी आदेश क्यों न दे दें। जब तक खाप पंचायतें इस मुद्दे को लेकर एकजुट नहीं होगी। तब तक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की निजी स्कूलों में सरकारी फीस पर दाखिल नहीं हो पाएगें।
बहबलपुर की महापंचायत को जींद खापों का समर्थन बिल्कुल भी नहीं मिला। जिस दिन से स्वामी कर्मपाल ने महापंचायत का ऐलान किया था। उसी दिन से जींद की तकरीबन सभी खापों ने साफ साफ कह दिया था कि वे कर्मपाल द्वारा बुलायी गई महापंचायत में बिल्कुल भी नहीं आएगीं। जींद में विभिन्न मुद्दों को लेकर तकरीबन 17-18 सक्रिय रहती हैं। इनमें से आज एक भी खाप बहबलपुर नहीं पहुंची। जिससे शिक्षा नियमावली के मुद्दे को झटका लगा है।
बारहा बारह के प्रधान कुलदीप सिंह ढांडा कहते हैं कि स्वामी कर्मपाल ने महापंचायत की परंपराओं का निर्वहन नहीं किया। जिस गांव में महापंचायत की जाती है। उसके तपा की तरफ से चिठ्ठी फाड़ी जाती है। लेकिन स्वामी ने ऐसा नहीं किया। महापंचायत को अपने तक ही सीमित रखने के कारण ही जींद खापें बहबलपुर गांव नहीं गई। बिनैन खाप के प्रवक्ता सूबेसिंह सैमाण कहते हैं कि अगर स्वामी कर्मपाल ने पंचायत की परंपराओं का निर्वहन करके महापंचायत बुलायी होती तो वे उनकी खाप महापंचायत में जरूर जाती।

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