बीबीपुर में सर्वे करवाएगी कुरुक्षेत्र विवि

Hisar Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
जींद। कन्या भ्रूण हत्या के विरोध में खाप पंचायतों की बैठक आहूत करने वाले जींद जिले के गांव बीबीपुर का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय आर्थिक व सामाजिक सर्वेक्षण करवाने जा रहा है। इसके लिए वीरवार को विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग की तरफ से एक ईमेल संदेश गांव के सरपंच को भेजा गया है। सरपंच ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस बारे में हां कर दी है। 55 छात्रों का एक दल दो शिक्षकों के साथ अक्तूबर के तीसरे सप्ताह में बीबीपुर पहुंचकर ग्रामीणों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का आंकलन करेगा।
विश्वविद्यालय की तरफ से गांव की सरपंच को भेजे गए संदेश में कहा गया है कि बीबीपुर गांव बीते तीन महीने से कन्या भ्रूण हत्या को लेकर देशभर में सुर्खियों में है, इसलिए विश्वविद्यालय इस गांव का सामाजिक व आर्थिक सर्वेक्षण करके यह जानना चाहता है कि महिलाओं में कन्या भ्रूण हत्या की लौ कैसे जगी। गांव के सर्वेक्षण में भूगोल विभाग के छात्र यह जानने का प्रयास करेंगे कि गांव में कितने लोग पढ़े लिखे हैं और उनका मुख्य कार्य क्या है। गांव में सामाजिक ढांचा किस प्रकार का है। किस जाति के लोगों को प्रभुत्व है। गांव में कृषि योग्य जमीन कितनी है। पंचायत के पास अपनी आय के साधन क्या हैं। गांव में सरकार की तरफ से किस प्रकार की सुविधाएं मुहैया करवायी गई हैं और ग्रामीणों की वर्तमान में क्या जरुरतें हैं। इसके अतिरिक्त महिलाओं से यह भी पूछा जाएगा कि वे कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ कैसे एकजुट हुई और उन्हें इस कार्य को करने में किस प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गांव के पुरूष वर्ग और खाप चौधरियों का सहयोग कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए अभी तक कितना रहा है। अभियान को जारी रखने के लिए महिलाओं ने क्या क्या प्लॉन बनाई हैं।
ऐसा है गांव का सामाजिक व आर्थिक ढांचा
फिलहाल गांव की आबादी 5400 है। जिसमें पुरुषों की संख्या तकरीबन 3000 व महिलाओं की संख्या 2400 है। गांव की साक्षरता दर 70 प्रतिशत है। राजस्व रिकार्ड के मुताबिक गांव की कुल जमीन 3600 एकड़ है। जिस पर 80 प्रतिशत लोगों का गुजारा चलता है।
गांव के इतिहास के बारे में बुजुर्गों का कहना है कि सम्वत् 1600 में उनका खेड़ा (गांव) बसा था। इसके बाद राजवाड़ों के समय में एक राजा की बेगम घूमने के लिए गांव के आसपास जंगल में आई। इसके बाद तत्कालीन राजा ने गांव का नाम बीबीपुर कर दिया। तब से आज तक गांव का नाम बीबीपुर है। अब तक बीबीपुर गांव की पहचान अन्य गांवों की तरह होती थी, लेकिन गांव की वीरागंनाओं ने कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ ऐसा अभियान छेड़ा कि गांव की पहचान पूरे देश में हो चुकी है। गांव में देश की पहली महिला ग्रामसभा (़18 जून) व खापों की महापंचायत की (14 जुलाई) को की। इसके बाद हर किसी की जुबान पर बीबीपुर गांव का नाम है।
बीबीपुर गांव की सबसे पहले पहचान आईटी विलेज के रूप में बनी। गांव के सरपंच ने पंचायत के पूरे रिकार्ड को ऑनलाइन करने व हर रोज उसको अपडेट करके नया कीर्तिमान बनाया। इसके चलते गांव के सरपंच सुनील कुमार जागलान को पिछले साल नई दिल्ली में हुए ई पंचायतों के सार्क देशों के सम्मेलन में हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला।

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