कॉटन की फसल को किसी कीट से खतरा नहीं

Hisar Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
महिलाओं ने तीन महीने के अध्ययन के दौरान कॉटन की फसल पर 152 कीटों की पहचान की। इनमें 43 कीट शाकाहारी और 109 कीट मांसाहारी पाए गए। 109 मांसाहारी कीटों में से 88 ऐसे हैं, जो अन्य कीटों का भक्षण करते हैं। वहीं 43 शाकाहारी कीटों में से 20 रसचूसक, 13 पर्णभक्षी, 3 पुष्पाहारी, 3 फलाहारी और 4 कीट अन्य प्रकार के कीट पाए गए।
गांव निडाना (जींद)। कॉटन की फसल में कीट देखकर जो किसान कीटनाशकों की तलाश में बाजारों की ओर निकल पड़ते हैं, उनके लिए एक राहत भरी खबर है। कॉटन की फसल को जितने भी कीट लगते हैं, वे फसल को रत्तीभर भी नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि ये सभी कीट फसल को कुछ इस तरह लाभ पहुंचाते हैं कि किसान को फसल की अधिक पैदावार मिलती है। निडाना व ललितखेड़ा की 30 महिलाओं द्वारा कपास के कीटों पर किए गए अध्ययन से यह हैरतअंगेज निष्कर्ष सामने आए हैं।
तीन महीने तक उक्त दोनों गांवों की महिलाओं द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि जो कीट कॉटन के पौधे पर रहकर पत्तों को खाते हैं, वह फसल के लिए फायदेमंद ही साबित होता है। पौधों को यह फायदा सूर्य की रोशनी के रूप में मिलता है। महिलाओं ने पाया कि कीट कपास के पौधे के सबसे ऊपर व बीच वाले पत्तों को खाते हैं। इससे सूर्य की किरणें पौधे की निचले पत्तों तक पहुंचने का मार्ग बन जाता है। चूंकि, इन दिनों कॉटन की फसल पर टिंडे आ गए हैं और टिंडों को धूप मिलने से वे रूई का रूप लेते हैं। प्रकाश संशलेषण की क्रिया से पौधे अपना भोजन तैयार करके फसल की बढ़त में भरपूर योगदान देते हैं।
गत 19 जून को निडाना व ललिताखेड़ा की 30 महिलाओं ने निडाना कीट साक्षरता अध्ययन केंद्र में कॉटन के कीटों पर अध्ययन शुरू किया था। यह अध्ययन अक्तूबर महीने के अंत तक प्रत्येक सोमवार व मंगलवार तक जारी रहेगा। बीते तीन महीने के दौरान महिलाओं ने कीटों पर जो अध्ययन किए और उसके जो परिणाम सामने आए हैं, वह चौकाने वाले हैं। महिलाओं ने अध्ययन के दौरान कॉटन की फसल में एक भी कीट ऐसा नहीं पाया, जो फसल को किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाता हो। महिलाएं अभी तक फसल में 152 कीटों की पहचान कर चुकी है। इस समय ललितखेड़ा व निडाना गांव में कॉटन की फसल लहलहा रही है।

कोट
तीन महीने पहले गांव निडाना व ललितखेड़ा की महिलाओं ने निडाना कीट पाठशाला में कॉटन के कीटों पर अध्ययन शुरू किया था। महिलाओं ने 152 कीटों की पहचान की है। इनमें से एक भी कीट ऐसा नहीं है। जो फसल को नुकसान पहुंचा रहा है बल्कि कीट फसल के लिए लाभदायक साबित हो रहे हैं।
डा. सुरेंद्र दलाल, संयोजक, निडाना कीट साक्षरता केंद्र।

निडाना कीट साक्षरता केंद्र में महिलाओं द्वारा कीटों पर किए जा रहे अध्ययन के परिणाम भविष्य में मील का पत्थर साबित होंगे। महिलाओं की पहल से किसान रसायन मुक्त खेती करने के लिए अग्रसर हो सकते हैं। अंधाधुंध रसायनों के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता पर तो असर पड़ ही रहा है। महिलाएं यह साबित करने लगी हैं कि बिना रसायनों का प्रयोग किए भी खेती की जा सकती है।
डा. सुरेंद्र मलिक, कृषि वैज्ञानिक व एसडीओ कृषि विभाग जींद।

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