दूरदर्शन उठाएगा निडाना की आवाज

Hisar Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
निडाना गांव (जींद)। बेजुबान कीटों को बचाने के लिए जिले के निडाना गांव से उठी आवाज को पूरे देश के लोग सुन सकेंगे। दिल्ली दूरदर्शन की टीम ने बुधवार को कृषि दर्शन कार्यक्रम की रिकार्डिंग की। चार सितंबर को सुबह 6.30 बजे इस कार्यक्रम का प्रसारण किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रसारण भारत समेत 165 देशों में होगा।
पिछले कई साल से हरियाणा कृषि विभाग जींद में कार्यरत डा. सुरेंद्र सिंह दलाल कीटों को बचाने के लिए व्यापक पैमाने पर अभियान चलाए हुए हैं। निडाना और आसपास के कई गांवों के करीब सतर प्रतिशत किसानों ने अब बिना कीटनाशकों का प्रयोग किए खेती करना शुरू कर दिया है। किसानों का मानना है कि किसान कीटनाशकों का प्रयोग करके कीटों की बेवजह हत्या कर रहे हैं। इसी मामले को किसान खाप पंचायत चौधरियों के बीच लेकर गए हैं। खाप चौधरियों की पहली बैठक 26 जून को हुई थी और ये बैठकें 23 अक्तूबर तक हर मंगलवार को जारी रहेंगी। इसके बाद 30 अक्तूबर या नवंबर के पहले मंगलवार को खाप चौधरियों की अंतिम बैठक होगी। जिसमें खाप चौधरी कीटनाशकों के बारे में कोई बड़ा फैसला लेंगे।
अब तक निडाना गांव में खाप चौधरियों की दस बैठक हो चुकी हैं और चौधरियों ने कीटों का बारीकी से परीक्षण किया है। इससे खापों के चौधरी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि कपास की फसल और अन्य खरीफ की फसलों में जो कीट मौजूद हैं, वे फसलों को हानि नहीं पहुंचा रहे हैं। किसानों द्वारा कीटों पर किए गए अभी तक किए गए शोध को दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाएगा। दूरदर्शन की इस टीम के साथ कृषि वैज्ञानिक डा. आरएस सांगवान भी गांव निडाना आए थे। उन्होंने किसान खेत पाठशाला में पहुंचकर कीट कमांडो किसानों के साथ सीधे सवाल-जवाब किए और दूरदर्शन की टीम ने उनके अनुभव को कैमरे में कैद किया।
गांव निडाना में खेत पाठशाला चला रहे कृषि विभाग के डा. सुरेंद्र सिंह दलाल ने बताया कि दूरदर्शन ने कृषि कार्यक्रम के लिए रिकार्डिंग की है। जिसका प्रसारण चार सितंबर को सुबह साढ़े छह बजे प्रसारित किया जाएगा।

किसानों के अनुभव :
21 साल में डाला 70 लाख का पेस्टीसाइड
अलेवा के किसान जोगेंद्र ने कृषि वैज्ञानिक को बताया कि वह 1988 से खेती के काम से जुड़ा है। तभी से वह अपने खेतीबाड़ी के सारे खर्च का रिकार्ड भी रखता है। 1988 से लेकर 2011 तक वह अपने खेतों में 70 लाख के पेस्टीसाइड डाल चुका है। लेकिन निडाना के किसानों के साथ जुड़ने के बाद से उसने अपने खेत में कीटनाशक नहीं डाला है। जबकि फसल में भी किसी प्रकार की बीमारी नहीं है।
अधिक पेस्टीसाइड से नहीं बढ़ती पैदावार
खरकरामजी के किसान रोशन ने बताया कि वह 10-12 एकड़ में खेती करता है, लेकिन वह अपने खेत में सुबह पांच बजे से आठ बजे तक सिर्फ तीन घंटे ही काम करता है। इसके बाद अपनी ड्यूटी पर चला जाता है। अधिक पेस्टीसाइड के प्रयोग से पैदावार में बढ़ोतरी नहीं होती। पैदावार बढ़ाने में दो चीजें सबसे जरूरी हैं। पहला तो सिंचाई के लिए अच्छा पानी और दूसरा खेत में पौधों की पर्याप्त संख्या। अगर खेत में पौधों की पर्याप्त संख्या होगी तो अच्छी पैदावार निश्चित है।
अंधाधुंध कीटनाशक ने ली किसान की जान
सिवाहा से आए किसान बजीत ने बताया कि वह अपनी जमीन ठेके पर देता था। जिस किसान को वह ठेके पर जमीन देता था, वह फसल में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग करता था। जिससे उसको कैंसर हो गया और पिछले साल उसकी मौत हो गई।

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