कोरोना काल में टीबी के 3636 मरीज मिले, 90 की गई जान

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 27 Nov 2020 01:26 AM IST
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कुलदीप जांगड़ा
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हिसार। कोरोना काल टीबी मरीजों के लिए काफी घातक साबित हुआ है, क्योंकि इस दौर में न तो मरीज समय पर इलाज करवा पा रहे हैं और न ही भय के कारण घर से निकल रहे हैं। इसके बावजूद भी कोरोना काल में 3636 मरीज टीबी से ग्रस्त मिले हैं। करीब 90 टीबी ग्रस्त मरीजों की जान चली गई। इनमें से 10 टीबी मरीजों पर कोरोना का सीधा अटैक हुआ, जिस कारण उनकी मौत हो गई।
यदि लॉकडाउन से पहले की बात करें तो इस वर्ष जनवरी से लेकर मार्च माह तक टीबी के 1550 मरीज मिले थे और उस समय 60 मरीजों की मौत हुई थी। इनको मिलाकर जिले में टीबी मरीजों का कुल आंकड़ा 5186 है।

इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले को टीबी मुक्त बनाने के प्रयास शुरू किए गए। विभाग के पास टीबी जांच की दो नई प्रो नॉट मशीनें आई हैं, जिन्हें बरवाला और नारनौंद अस्पताल में रखवाया गया है। इस बारे में हाल ही में स्वास्थ्य विभाग और मेदांता अस्पताल के बीच बैठक के दौरान अनुबंध भी हुआ है। इसके तहत मेदांता की टीम के साथ मिलकर जिले में जगह चिह्नित कर टीबी जांच अभियान चलाया जाएगा। विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना काल में टीबी के मरीजों की स्थिति बेहतर रही है, क्योंकि पिछले साल 2019 में लगभग सात हजार टीबी मरीज मिले थे।
यह कारण रहा कम मरीज मिलने का
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कोरोना के चलते बहुत कम लोग घरों से बाहर निकले। इस वजह से वह बीमारी से बचे रहे। इसी कारण इस वर्ष टीबी के मामले पिछले वर्ष की तुलना में कम आाए। विभाग द्वारा टीबी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए टीबी जांच अभियान लगातार जारी है।
पोषण के लिए मिलता है मासिक भत्ता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पोषण योजना के तहत टीबी के मरीजों को 500 रुपये मासिक भत्ता भी दिया जाता है, ताकि वे आसानी से पौष्टिक आहार खरीद सकें। इसके अलावा घर या अस्पताल आने-जाने में आसानी से आवागमन कर सकें। इसके साथ ही विभाग द्वारा सभी मरीजों को अस्पताल से निशुल्क उपचार दिया जाता है।
टीबी जांच अभियान चलाया जाएगा
अब तक करीब 10 ऐसे टीबी मरीज हैं, जिनकी कोरोना से मौत हुई है। इस वजह सेे हमारी ओर से सभी मरीजों को घर पर ही दवा पहुंचाई जा रही है। जिले को टीबी मुक्त बनाने के लिए जल्द ही मेदांता की टीम के साथ मिलकर टीबी जांच अभियान चलाया जाएगा।
-डॉ. कुलदीप डाबला, डिप्टी सीएमओ, टीबी अस्पताल, हिसार।
इस तरह मिले मरीज
अवधि मरीज मौत
जनवरी से मार्च 1550 60
अप्रैल से जून 1498 40
जुलाई से सितंबर 1525 40
अक्तूबर से अब तक 613 10
मधुमेह वाले मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोना
हिसार। कोरोना काल में मधुमेह (शुगर) ग्रस्त मरीजों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अब तक के आंकड़ों के अनुसार कोरोना अन्य बीमारी की अपेक्षा मधुमेह वाले मरीजों पर अधिक हमला कर रहा है। अब तक जिले में 220 लोग कोरोना की चपेट में आने से अपनी जान गंवा चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना से मरने वाले लोगों में अधिकांश मधुमेह वाले मरीज ही शामिल हैं। बुधवार और मंगलवार को दो-दो मरीजों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई थी और वे सभी शुगर से ग्रस्त थे।
अग्रोहा मेडिकल कॉलेज के सीएमओ डॉ. राजीव चौहान और फिजिशियन डॉ. ज्ञानेंद्र का कहना है कि किसी मरीज में कोई अन्य बीमारी होती है तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। मधुमेह बीमारी होने के बाद ब्लड पतला होने के साथ-साथ वजन भी कम होने लगता है, जबकि अन्य बीमारी में ऐसा बहुत कम होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण मधुमेह के मरीज जल्द कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। इसके बाद उन मरीजों का ठीक हो पाना भी मुश्किल हो जाता है।
हालत गंभीर होने पर आते हैं अस्पताल
विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर मरीज डॉक्टर से जांच करवाने की बजाय घर से ही दवा ले रहे हैं। जब उनकी हालत गंभीर बिगड़ती है तभी वे अस्पताल आते हैं। ऐसे में उन सभी मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे कुछ समय बाद दम तोड़ देते हैं। इस बारे में रोहतक पीजीआई में भी मधुमेह के कुछ मरीजों पर जांच पड़ताल हुई थी, जिसमें पता चला था कि वह सभी मरीज देरी से अस्पताल पहुंचे थे।
ये एहतियात बरतें
- बाजार या भीड़भाड़ वाली जगह से ज्यादातर बचाव करते हुए घर पर रहें।
- जब घर के किसी सदस्य या रिश्तेदार का बाहरी आवागमन हो तो उससे सामाजिक दूरी बनाए रखें।
- इस समय काढ़ा, हरी पत्तेदार सब्जी या ताजा भोजन का सेवन करें।
- यदि सुबह सैर करें तो मास्क अवश्य लगाएं।
- यदि खांसी जुकाम बुखार की शिकायत हो तो डॉक्टर से जांच व टेस्ट करवाएं। (संवाद)

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