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नामांकन के एक दिन पहले भाजपा की रेखा ऐरन को कांग्रेस में मिलाकर कुलदीप बिश्नोई और सावित्री जिंदल ने बनाया मेयर प्रत्याशी

Rohtak Bureau Updated Thu, 06 Dec 2018 12:51 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार। नामांकन प्रक्रिया खत्म होने से एक दिन पहले बुधवार को भाजपा की रेखा ऐरन को कांग्रेस में मिलाकर कुलदीप बिश्नोई और सावित्री जिंदल ने अपना संयुक्त मेयर प्रत्याशी बना दिया है। रेखा ऐरन ने सुबह जिंदल हाउस पर पहुंचकर पाला बदला और शाम को सावित्री जिंदल ने सेक्टर-15 स्थित कुलदीप बिश्नोई के आवास पर जाकर रेनुका बिश्नोई के साथ प्रेस वार्ता में रेखा ऐरन को मेयर प्रत्याशी घोषित किया। इसी के साथ दो दिन से जिंदल हाउस में मेयर टिकट को लेकर चल रहा सियासी ड्रामा भी खत्म हो गया।
पूर्व मेयर शकुंतला राजलीवाला सहित 10 कांग्रेसी नेताओं को दरकिनार करते हुए अग्रवाल समाज से रेखा ऐरन को टिकट थमाकर जातिगत समीकरण बनाने की भी कोशिश की गई है। हालांकि एकदम से पार्टी में आई दूसरी पार्टी की दावेदार को टिकट मिलने से कुछ कांग्रेसियों के चेहरे मुरझाए हुए भी दिखाई दिए। मगर दबी जुबान में सभी ने एकजुटता दिखाने का भी प्रयास किया।


भाजपा को भी आयात करना पड़ा था मेयर उम्मीदवार
कांग्रेस की तरह ही भाजपा को भी मेयर उम्मीदवार आयात करना पड़ा था। 28 अक्तूबर को ही पहले हजकां में रहे गौतम सरदाना को भाजपा में शामिल किया गया था। पार्टी में शामिल होने के एक महीने तीन दिन बाद ही भाजपा ने गौतम सरदाना को मेयर की टिकट थमा दी थी। भाजपा में रेखा ऐरन और गौतम सरदाना टिकट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे। मगर भाजपा ने रेखा ऐरन की बजाय गौतम सरदाना को मेयर प्रत्याशी बनाया तो उसी दिन से ऐरन परिवार भाजपा से नाराज चल रहा था।


मेयर चुनाव के बहाने और नजदीक आए जिंदल व बिश्नोई परिवार
शहर के मतदाताओं में खासा प्रभाव रखने वाले सावित्री जिंदल और कुलदीप बिश्नोई के परिवार की मेयर चुनाव के बहाने एक बार फिर नजदीकियां बढ़ गई हैं। माना जाता रहा है कि साल 2005 में चौ. भजनलाल की बजाय भूपेंद्र सिंह हुड्डा को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने में स्व. ओमप्रकाश जिंदल का अहम योगदान रहा था। तभी से दोनों के बीच तल्खियां थी। मगर समय बीतने के साथ ही धीरे-धीरे इन तल्खियों में कमी आई और अब दोनों परिवार एकजुट होते जा रहे हैं।


लोस और विस चुनाव में भी बरकरार रखेंगे एकजुटता : रेनुका
सेक्टर-15 स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में हांसी की विधायक रेनुका बिश्नोई ने कहा कि सिंबल पर नहीं लड़ने का फैसला हाईकमान का था। मगर मेयर प्रत्याशी कुलदीप बिश्नोई और सावित्री जिंदल ने मिलकर तय किया है। यह एकजुटता लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भी बरकरार रहेगी। लोकसभा में कुलदीप बिश्नोई व विधानसभा में सावित्री जिंदल की मजबूती के लिए काम करेंगे।


बाकी दावेदारों ने ही सुझाया रेखा ऐरन का नाम : सावित्री
पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल ने कहा कि उन्होंने कार्यकर्ताओं और अन्य दावेदारों के साथ भी चर्चा की थी। अन्य दावेदारों ने ही मुझे रेखा ऐरन को मेयर का प्रत्याशी बनाने की बात कही थी। इसलिए सभी की सहमति से ही रेखा ऐरन को पार्टी में शामिल कर प्रत्याशी बनाया गया है। जनता के हित में फैसला लिया गया है। निश्चित रूप से सभी एकजुट होकर रेखा ऐरन को मेयर बनाने का काम करेंगे।


हम ट्रैक से उतर गए थे, अब सही जगह पहुंच गए : हनुमान
रेखा ऐरन के पति हनुमान ऐरन ने पाला बदलने को लेकर कहा कि भाजपा ने हमारे साथ धोखा किया है। हमें पूरी तरह निराश कर दिया गया था। मगर कांग्रेस व जिंदल हाउस ने उन्हें निराशा के भंवर से बाहर निकाला है। ऐरन ने कहा कि भजनलाल परिवार और जिंदल परिवार से उनका पुराना नाता है। उनका परिवार कांग्रेसी रहा है। वही ट्रैक से उतरे हुए थे लेकिन अब वह सही जगह पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि पांचों नगर निगमों के मुकाबले हिसार मेयर का चुनाव सबसे अधिक मार्जिन से जीतेंगे। भाजपा ने 20 में से 17 वार्डों में तो धक्के से पार्षद पद की टिकट दी है। इनमें से कई तो उनके साथ खड़े नजर आएंगे।


मेरा बनाया बेस रेखा ऐरन के काम आएगा : शकुंतला
प्रेस वार्ता में पूर्व मेयर और संभावित दावेदार मानी जा रही शकुंतला राजलीवाला ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी राजनीति नहीं की। उनके द्वारा बनाया गया बेस अब रेखा ऐरन के काम आएगा। उन्होंने तो पहले ही कह दिया था कि जो आदेश पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल करेंगी, उन पर वह खरा उतरेंगी।


ये थे कांग्रेस के दावेदार
पूर्व मेयर शकुंतला राजलीवाला, पूर्व नगर परिषद चेयरमैन बिहारीलाल राड़ा, पूर्व चेयरमैन अरविंद खरींटा, पूर्व मंत्री हरिसिंह सैनी की पुत्रवधू रेखा सैनी, पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर डीएन सैनी, गुलजार काहलो, अश्विनी शर्मा, बीर सिंह ख्यालिया सहित करीब दस नेता मेयर पद के टिकट की दावेदारी में थे। इनमें सबसे आगे शकुंतला राजलीवाला चल रही थीं। मगर ऐन मौके पर टिकट रेखा ऐरन को मिल गई है।


भाजपा का परिवार बड़ा है। नेताओं का आवागमन चलता रहता है। दावेदार कई होते हैं लेकिन टिकट एक को ही मिलता है। किसी के जाने से बड़ा फर्क नहीं पड़ता है। सभी भाजपा कार्यकर्ता एकजुट होकर पूरी मेहनत से निगम चुनाव लड़ेंगे। निश्चित रूप से मेयर व सभी वार्डों में पार्षद भाजपा के ही बनेंगे।
- सुरेंद्र पूनिया, जिलाध्यक्ष, भाजपा

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