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कांग्रेसी नेता सांकेतिक बंद कराने में भी नाकाम रहे

Rohtak Bureau Updated Tue, 11 Sep 2018 12:48 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार। कांग्रेस की ओर से कई दलों के साथ मिलकर बुलाया गया बंद पूरी तरह से विफल रहा। कांग्रेस सांकेतिक बंद कराने में भी नाकाम रही। बंद के नाम पर अधिकतर कांग्रेसी नेता घरों में दुबके रहे। गिने चुने कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बाजार में जाकर हाथ भी जोड़े तो भी दुकानदारों ने प्रतिष्ठानों को बंद नहीं किया।
कांग्रेस की ओर से पेट्रोल -डीजल के मुद्दे पर सोमवार को भारत बंद बुलाया गया था। जिसमें कांग्रेस को कई अन्य राजनीतिक दलों ने भी समर्थन का एलान किया था। कांग्रेस की ओर से बंद को लेकर कोई ठोस प्रयास भी नहीं किया गया। अधिकतर कांग्रेसी नेता घरों में दुबके रहे। कांग्रेस नेताओं ने बंद में हिस्सा लेना तो दूर बयान जारी करने में तक में सहयोग नहीं किया। बंद को लेकर पुलिस बल अलर्ट किया गया था। बाजारों की बात तो छोड़िए कांग्रेस भवन की दुकानों को ही बंद नहीं कराया जा सका।
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र गंगवा, अश्वनी शर्मा कुछ कार्यकर्ताओं के साथ बाजार में पहुंचे थे। कांग्रेसी नेताओं ने हाथ जोड़कर दुकानें बंद करने के लिए समर्थन मांगा। अधिकतर जगह कार्यकर्ताओं की किसी ने नहीं सुनीं। कार्यकर्ताओं के अनुरोध पर नाममात्र की कुछ दुकानें बंद हुई तो नेताओं के थोड़ा से आगे जाते ही फिर से शटर खुल गए। इस मौके पर प्रदेश सचिव रामफल कमांडो, पवन शर्मा, राधाकृष्ण नारंग, प्रदेश सचिव कृष्ण यादव, एडवोकेट संदीप वशिष्ठ, राजबीर संधु, मंगल ढालिया प्रधान नागोरी गेट, रतन ढालिया, लीलूराम चौहान, युवा नेता मनोज टाक, विकास टाक, ललित शर्मा, संदीप स्वामी, स्नेहलता निंबल, रूपा रानी, मंजू देवी, राजबाला शर्मा, रामशरन आहुजा साथ रहे।

कांग्रेस का बंद फेल होने के तीन कारण
गलत टाइमिंग
1. इंडियन नेशनल लोकदल की ओर से 8 सितंबर को ही हरियाणा बंद कराया गया था। शनिवार को इस बंद में कुछ हद तक व्यापारियों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद रविवार को बाजार बंद रहता है। अब सोमवार को सप्ताह के पहले दिन बंद बुलाया जाना सही फैसला नहीं था। सप्ताह का पहला दिन होने के लोगों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।

बड़े नेताओं की दूरी
2. बंद कराने के लिए कांग्रेस की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। गुटों में बंटी कांग्रेस के नेता व्यापारियों से मिलने पहुंचे ही नहीं। कांग्रेस विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, पूर्व मंत्रियों सहित कांग्रेस से अधिकतर सीनियर लीडर्स बंद से दूर करे। व्यापारी संगठनों से सहयोग ही नहीं मांगा। बंद के आह्वान के बाद भी कांग्रेसी सड़क पर नहीं आए।

3. जनता का मुद्दा नहीं बना सके
पेट्रोल डीजल के महंगाई के मुददे पर कांग्रेेस इस मुद्दे को जनता से नहीं जोड़ सकी। पेट्रोल डीजल के रेट महंगे होने के बावजूद लोगों ने आक्रोश नहीं है। इस बंद को लेकर गांव के लोग नहीं जुड़ सके। शहरों में रहने वाले लोगों के पास काम धंधे के कारण इतना समय नहीं होता कि वह बंद में हिस्सा लें।

व्यापार मंडल वाले कांग्रेसी नेता भी गायब
हरियाणा व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष कुछ समय पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे। छोटे-छोटे मुद्दे पर बाजार बंद कराने वाले यह नेताजी सोमवार के बंद से गायब रहे। प्रदेश स्तरीय नेता की ओर से बंद को लेकर बयान तक जारी नहीं किया गया।

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