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डीसी के खुले दरबार में आई शिकायतों का

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Fri, 05 Oct 2018 12:49 AM IST
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हिसार/बालसमंद। जिला उपायुक्त अशोक कुमार मीना ने जुलाई में सांसद आदर्श ग्राम भिवानी रोहिल्ला में खुला दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं को सुना था। इस खुले दरबार में ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और समस्याएं रखीं। ग्रामीणों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
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13 जुलाई को जिला उपायुक्त अशोक मीना ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भिवानी रोहिल्ला में ग्रामीणों की समस्याएं खुले दरबार में सुनीं थीं। इस दौरान ग्रामीणों ने कुल 46 शिकायतें जिला उपायुक्त को सौंपी थीं। उपायुक्त ने ग्रामीणों की समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों को तुरंत निर्देश दिए थे। अमर उजाला पड़ताल में सामने आया कि ग्रामीणों की समस्याएं 83 दिन बाद भी ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। ग्रामीणों ने कहा कि डीसी साहब ने अधिकारियों को निर्देश तो ऐसे दिए थे, जैसे कल ही उनकी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, लेकिन आज तक समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। ग्रामीणों ने अब इन समस्याओं के समाधान की आस छोड़ दी है।

महिला पंचायत को कोई फायदा नहीं हुआ
पूरे हरियाणा में भिवानी रोहिल्ला की पंचायत महिला पंचायत है। यहां सरपंच से लेकर पंच तक सभी महिलाएं हैं। ये पंचायत बिना चुनाव के सर्वसम्मति से चुनी गई थी। महिला पंचायत की पंच आरती देवी ने बताया कि गांव में महिला पंचायत होने का कोई फायदा नहीं है। जब पंचायत चुनी गई थी तब तो चर्चाएं होती थीं कि गांव में विकास कार्यों की कोई कमी नहीं रहेगी, लेकिन अब गांव में सैकड़ों समस्याएं आई हुई हैं। कोई अधिकारी इन समस्याओं को सुनने वाला भी नहीं है।

ये बोले ग्रामीण
मेरी गली में काफी लोग कूड़ा कर्कट डालते हैं, जिसकी शिकायत मैंने डीसी साहब को दी थी। डीसी साहब ने सरपंच आशा रानी को कहा कि वे पंचायत की बैठक में प्रस्ताव रखें और मुनादी करवाएं कि यदि कोई व्यक्ति गली में कूड़ा डालता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मेरी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। स्कूल की दीवार के पास गोबर के ढेर लगे हुए हैं।
- रामबिलास शर्मा, ग्रामीण

हमारे मोहल्ले में करीब 30 घरों में पीने के पानी की सप्लाई नहीं आती है। सभी घर सबमर्सिबल के कड़वे पानी से काम चलाते हैं। इस शिकायत को जिला उपायुक्त को सौंपी तो उन्होंने अधिकारियों को दो माह में पाइप लाइन बिछाकर हमारी समस्या के समाधान के निर्देश दिए थे, लेकिन अब ढाई माह बीत जाने के बाद भी किसी अधिकारी ने गांव में आकर हमारी समस्या का समाधान नहीं निकाला।
- आरती, पंचायत मेम्बर

हमारी बस्ती के 20 घरों में पीने के पानी की भारी समस्या है। हमने डीसी साहब को खुले दरबार में शिकायत दी तो उन्होंने अधिकारियों को टी ज्वाइंट लगाकर समाधान निकालने के निर्देश दिए, लेकिन हमारी समस्या आज भी बनी हुई है। दिनभर खेत में काम करने के बाद महिलाएं सिर पर पानी लाती हैं। हमने जिला महामंत्री सुजीत और विभाग के एक्सईएन को भी शिकायत दी थी, जिसकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
- मोहनराज, पूर्व पंच

जिला उपायुक्त के खुले दरबार में बस स्टैंड के शेड निर्माण, आंगनबाड़ी में बिजली और पीने के पानी की शिकायत दी थी, लेकिन अब तक हमारी समस्याओं पर कोई कार्य शुरू नहीं किया गया है। इस गांव में महिला पंचायत बनने के बाद कोई भी कार्य ग्राम विकास के लिए नहीं हुए। इससे भले तो आसपास के गांव हैं, जहां काम के साथ-साथ विकास कार्य भी होते हैं।
- रविंद्र रोहिल्ला, ग्रामीण

गांव में तालाब की सफाई के लिए डीसी साहब को शिकायत दी थी तो उपायुक्त ने गांव में फाइव पोंड वाटर सिस्टम बनाने के लिए अधिकारियों से एस्टिमेट बनाने के बारे में कहा था। कार्य में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई। इसके अलावा गांव में व्यायामशाला, पार्किंग लाइट सहित खेल स्टेडियम की मरम्मत की मांग की थी, जिसका समाधान नहीं हुआ।
- संजय फौजी, ग्रामीण

गांव में राशन कार्ड नहीं होने की शिकायत हमने ग्रामीणों के साथ मिलकर डीसी साहब को दी थी। डीसी ने डीएफएससी को दो दिन बाद गांव में शिविर लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक गांव में कोई राशन कार्ड बनाने अधिकारी नहीं आया। जब हमारी समस्याओं का समाधान ही नहीं होना था तो हमारी समस्याओं को सुनना क्या जरूरी था।
- सुरेंद्र, ग्रामीण

सरकार की ये सब औपचारिकता थी। खुले दरबार के बाद काफी बार अधिकारियों से मिला, लेकिन कोई सुनने वाला ही नहीं है। जब ये अधिकारी सांसद दुष्यंत की बात नहीं मानते तो उपायुक्त की बात को क्या मानेंगे। गांव वाले बोलते हैं काम नहीं करवाते, लेकिन जब तक सरकार ग्रांट ही नहीं देगी तो काम कहां से करवाएंगे। खुले दरबार की किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
- चांदीराम, सरपंच प्रतिनिधि, भिवानी रोहिल्ला

ये थीं प्रमुख मांगें
1 - पंच आरती की शिकायत - 20-30 घरों में पीने का पानी नहीं आ रहा था। पाइप लाइन ही नहीं थी।
- डीसी ने दो माह में पाइप लाइन बिछाने के आदेश दिए थे।
2. मोहनराज की शिकायत - 20 घरों में पीने का पानी नहीं आ रहा था। पाइप लाइन बिछाई थी, लेकिन टी-ज्वाइंट न करने के कारण पानी नहीं आ रहा था।
- डीसी ने जल्द से जल्द चालू करने के आदेश दिए थे।
3. बस स्टैंड पर शेड का निर्माण कराने की मांग थी।
- डीसी ने रोडवेज जीएम को एस्टिमेट बनाने को बोला था, कार्रवाई नहीं।
4. आंगनबाड़ी में बिजली और पानी की मांग की थी।
- डीसी ने बिजली एसडीओ को और पानी के लिए जेई को बोला था।
5. 4-5 लोगों ने पक्के मकान की मांग की थी।
- डीसी ने बीडीपीओ को प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रियदर्शनी आवास योजना के तहत लोन दिलाने के लिए जल्द कार्रवाई करने को बोला था।

ऐसा नहीं है, मैं स्वयं मॉनीटरिंग कर रहा हूं। जिस भी गांव में खुला दरबार लगता है, वहां सुनी जाने वाली हर समस्या का समाधान होता है। कुछ कार्यों में एस्टिमेट बनते हैं, जिस कारण उन्हें क्रियान्वयन में समय लग जाता है। भिवानी रोहिल्ला की समस्याओं पर मैं अधिकारियों से प्रोग्रेस रिपोर्ट ले रहा हूं। इसी गांव के तीन प्रोजेक्ट मैंने अभी पास किए हैं, जिन पर जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। फिर भी कोई लापरवाही बरत रहा है तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।
-अशोक मीणा, उपायुक्त, हिसार।

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