लेडी डॉक्टर को सात साल की कैद ---

Rohtak Bureau Updated Fri, 09 Feb 2018 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
एडीजे डीआर चालिया की अदालत ने गैर इरादतन हत्या (धारा 304 पार्ट टू) के जुर्म में बरवाला के साधुराम मेमोरियल अस्पताल की डॉ. प्रवीण सिवाच को सात साल की कैद और 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर दोषी को एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अदालत ने उनको धोखाधड़ी, सबूत खुर्द-बुर्द करने और इंडियन मेडिकल एक्ट के तहत भी दोषी माना है। अदालत ने उनको सोमवार को दोषी करार दिया था।
बरवाला थाना पुलिस ने इस संबंध में 7 दिसंबर 2010 को केस दर्ज किया था। अदालत में चले अभियोग के अनुसार गांव कापड़ो के प्रवीण कुमार की पत्नी नन्ही देवी को गर्भवती होने के चलते 12 सितंबर 2010 को बरवाला के साधुराम मेमोरियल अस्पताल में ले जाया गया था। प्रवीण ने शिकायत दी थी कि वहां डॉ. प्रवीण सिवाच ने चेकअप कर दूसरे अस्पताल से नन्ही का अल्ट्रासाउंड कराने की बात कही थी। वह नन्ही को दूसरे अस्पताल में ले गया था और उसका अल्ट्रासाउंड कराया था। दंपति ने बाद में डॉ. प्रवीण को रिपोर्ट दिखाई तो उन्होंने नन्ही और होने वाले बच्चे को स्वस्थ बताया था। दंपति घर चला गया था। अगले दिन प्रसव पीड़ा शुरू होने पर शाम पांच बजे नन्ही को साधुराम मेमोरियल अस्पताल में दाखिल कराया गया था। डॉ. प्रवीण ने रात नौ बजे नन्ही की डिलीवरी कराकर परिजनों को बताया था कि जच्चा-बच्चा स्वस्थ हैं, लेकिन उन्होंने एक घंटे बाद बच्चे की मौत होने की बात कहकर जच्चा को जबर्दस्ती छुट्टी देकर उनको बाहर निकालकर अस्पताल का शटर बंद कर लिया था। शिकायतकर्ता ने कहा था कि वे नन्ही को घर ले गए थे और रात को खून न रुकने से उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई थी। उसने डॉ. प्रवीण को फोन किया तो उन्होंने जच्चा को वहां न लाने की बात कही थी। उसके बाद नन्ही को बरवाला और हिसार के अलग-अलग तीन अस्पतालों में ले जाया गया था। नन्ही ने तीन दिन बाद हिसार के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया था। अगले दिन गांव में शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था। उसके बाद प्रवीण ने एसपी को डॉ. प्रवीण के खिलाफ शिकायत दी थी। पुलिस ने शिकायत को जांच के लिए सीएमओ के पास भेज दिया था।

तीन सदस्यीय कमेटी की जांच में दोषी मिली थी डॉक्टर
सीएमओ ने डॉक्टरों की तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। कमेटी के सामने डॉ. प्रवीण ने कहा था कि उसने नन्ही का उपचार नहीं किया है। कमेटी ने पाया था कि डॉ. प्रवीण के पास बीएमएस की डिग्री है। वह एलोपैथी के मरीजों का उपचार नहीं कर सकती। कमेटी ने रिपोर्ट में यह भी कहा था कि डॉक्टर ने नन्ही का उपचार संबंधी रिकॉर्ड भी खुर्द-बुर्द कर दिया।

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