गुड़गांव की सड़कों पर वाहनों का बोझ होगा कम

गुड़गांव/ब्यूरो Updated Fri, 30 Nov 2012 11:29 AM IST
vehicles burden would reduce on gurgaon roads
शहर की सड़कों को जाम मुक्त करने के लिए प्रशासनिक अमले ने कवायद शुरू कर दी है। सड़कों पर बढ़ते वाहनों के बोझ को कम करने के लिए हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) ने नए शहर में फीडर बसें चलाने का खाका तैयार किया है। यह सेवा सेक्टर के बाशिंदों को भी मिलेगी।

फीडर बस सेवा की कनेक्टिविटी मॉल्स, मार्केट और मेट्रो स्टेशनों तक सीमित होगी। इससे पहले एक सर्वे कराया जाएगा। लोगों की राय और सुझावों के बाद इसे सिरे चढ़ाने की पहल होगी। हुडा प्रशासक के मुताबिक सड़कों पर वाहनों का दबाव कम किए बगैर जाम की समस्या नहीं निपट सकती है। ऐसे में लोगों को पर्याप्त आंतरिक यातायात व्यवस्था मुहैया कराने की जरूरत है।

इसी कड़ी में रोडवेज की सिटी बसें सड़कों पर उतर चुकी हैं। लेकिन इन्हें सेक्टरों की गलियों और पॉश एरिया के अंदर नहीं घुमाया जा सकता। इसलिए फीडर बसें चलाने की योजना बनी है। बसें हुडा स्वयं चलाएगा या प्राइवेट पार्टनरशिप में चलेंगी। इस पर फैसला लिया जाना अभी बाकी है।

बनाए जा रहे हैं साइकिल स्टैंड
हुडा की ओर से शहर में साइकिल स्टैंड बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। शुरुआत में मेट्रो स्टेशन, कुछ प्रमुख चौक और मॉल्स, मार्केट में 30 साइकिल स्टैंड बनाए जाएंगे। यहां दस रुपये की दर से लोगों को साइकिल मिलेगी। साइकिल लेन के निर्माण के लिए सर्वे आदि का कार्य शुरू कर दिया गया है।

शेयरिंग टैक्सी की भी योजना
सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए ऑटो की तर्ज पर शेयरिंग टैक्सी चलाने की भी योजना बनाई गई है। एक नामी कार निर्माता कंपनी ने हुडा प्रशासक के सामने नए शहर में शेयरिंग टैक्सी चलाने का सुझाव रखा है। इस पर हुडा प्रशासक ने अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

बनाए जाएंगे अंडरपास
ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए सड़कों पर अंडरपास बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। हुडा प्रशासक डॉ. प्रवीण कुमार के मुताबिक नए गुड़गांव में 15-20 अंडरपास बनाए जाने हैं। अकेले सेक्टर 55-56 रोड पर ही 8 से 10 अंडरपास बनेंगे। इसके अलावा हाइवे पर 30 अंडरपास बनाने की योजना है।

...तो हालत हो जाएंगे बदतर
ट्रैफिक के जानकारों ने सड़कों पर लगातार बढ़ते दबाव की जो स्थिति बयां की है उससे साफ है कि अभी से बेहतर प्रबंध नहीं किए गए और सावधानियां नहीं बरती गईं तो हालात बदतर हो जाएंगे। सर्वे कंपनी ‘राइट्स’ और ट्रांसपोर्ट प्लानिंग विभाग ने वर्तमान दर से वाहनों की संख्या बढ़ने का अनुमान लगाकर शहर के ट्रैफिक की भयावह तस्वीर पेश की है। राइट्स के महाप्रबंधक यश सचदेव के अनुसार वर्ष 2001 की गणना के समय शहर की आबादी करीब ढाई लाख थी, जो अब बढ़कर 9.20 लाख हो गई है।

इसी दर से अगर आबादी बढ़ी तो 2031 तक साढ़े 45 लाख आबादी हो जाएगी। गुड़गांव में रोजगार बढ़ रहे हैं। दिल्ली के नजदीक होने के कारण दिल्ली के ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा यहां आता है। यहां ट्रांसपोर्ट सिस्टम इस बढ़ोतरी के अनुकूल नहीं है। लोगों की आय बढ़ रही है, ऐसे में लोग धड़ाधड़ वाहनों की खरीददारी कर रहे हैं। वर्ष 2004 से 2008 तक की एक सर्वे रिपोर्ट में कहा कि वर्ष 2004-5 में शहर की विभिन्न सड़कों से तीन लाख 20 हजार वाहन गुजरते थे। 2007-8 में तीन सड़कों से तीन लाख 37 हजार वाहनों की आवाजाही हो गई।

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