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तीन लाख लोगों को जारी होंगे प्रॉपर्टी टैक्स नोटिस

Gurgaon Updated Wed, 13 Feb 2013 05:30 AM IST
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गुड़गांव। नगर निगम द्वारा शहर के तीन लाख लोगों को प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिस जारी किए जाएंगे। एक अप्रैल से लोगों के घर में नोटिस पहुंचने लगेगा। इसके लिए निगम ने मैप माई इंडिया कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी है।
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प्रॉपर्टी मालिकों से 2008 से 2013 तक पांच साल का टैक्स एक साथ वसूला जाएगा। नगर निगम द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली के लिए विशेष अभियान चलेगा। इसके अधिकारियों ने नई अधिसूचना के अनुसार टैक्स के बिल तैयार कराने शुरू कर दिए हैं। एक अप्रैल से बिल जारी किए जाएंगे। मैप माई इंडिया को एक नोटिस भेजने के बदले 25 रुपये अदा किए जाएंगे। सभी प्रॉपर्टी मालिकों को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसमें वर्ष 2008 से 2013 तक का टैक्स मांगा जाएगा। निगम की ओर से टैैक्स अदा करने के लिए दोनों विकल्प दिए जाएंगे।

पहला विकल्प निगम के अनुसार तैयार किए गए टैक्स को अदा करें। दूसरे विकल्प में प्रॉपर्टी मालिक अपनी प्रॉपर्टी का स्वयं मूल्यांकन कर उसके हिसाब से टैक्स की गणना करें। निगम क्षेत्र में कुल तीन लाख प्रॉपर्टी हैं। इनको नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस भेजने का काम दो माह में पूरा किया जाएगा। 30 जून तक लोग स्वयं मूल्यांकन के आधार पर टैक्स अदा कर सकेंगे। इसके लिए आवेदक को छूट मिलेगी। 1 जुलाई से किसी को किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी। इसके बाद निगम की ओर से ब्याज भी वसूला जाएगा।
निगम के मुख्य लेखा अधिकारी बीएस सांगवान ने बताया कि सभी क्षेत्रीय कराधान अधिकारियाें को निर्देश जारी किए गए हैं। मैप माई इंडिया कंपनी को नोटिस व बिल भेजने के लिए जिम्मेदारी सौंप दी गई है।


- 25 साल से अधिक पुराने भवन मालिक को 25 प्रतिशत की छूट
- बिना आरसीसी यानी बिना कंकरीट वाले भवनों को टैक्स में 25 प्रतिशत की छूट
- 250 गज तक के आवास पर एक रुपया प्रति गज टैक्स
- इससे अधिक बड़े आकार के भवन या प्लॉट पर कलेक्टर रेट के हिसाब से टैक्स
- 250 गज तक अपनी रिहायश के लिए प्रयोग किए जाने वाले आवास मालिक को 50 प्रतिशत छूट
- नई अधिसूचना के अनुसार प्रॉपर्टी मालिक तीन तरह की छूट के दायरे में है तो उसे महज एक छूट किसी भी मकान मालिक को 50 प्रतिशत से अधिक नहीं है।

पुराने विवादाें का होगा हल
निगम के अनुसार प्रॉपर्टी टैक्स के सभी पुराने लंबित मामले 30 जूून तक निपटाए जाएंगे। इसमें प्रॉपर्टी मालिक स्वयं मूल्यांकन के नियम से टैक्स जमा करा सकेंगे। गैर रिहायशी आवास के लिए कलेक्टर रेट का फार्मूला लागू होगा।

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