पानी में गई करोड़ों की फसल

Gurgaon Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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गुड़गांव। जिले के पांच गांवों के हजारों किसानों की करीब साढे़ चार सौ एकड़ लहलहाती फसल ड्रेन से निकले पानी में डूबी हुई है। इससे करोड़ाें रुपये का नुकसान हो गया है। किसानों ने कृषि मंत्री से पानी निकासी और मुआवजे की मांग की है। साथ ही समस्या का निदान नहीं होने पर शहर की ओर से आने वाले सभी नालों को रोकने की चेतावनी दी है।
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करीब पंद्रह दिनों से गांव दौलताबाद, धनकोट, माकड़ोला, चंदू और बाबूूपुर गांव के करीब दो हजार किसानों की गेहूं की फसल में ड्रेन नंबर आठ का पानी भरा हुआ है। इनमें दौलताबाद की 210 एकड़, धनकोट की 70 एकड़, माकडोला की 80 एकड़, चंदू गांव की 70 एकड़ और बाबूपुर की करीब 30 एकड़ फसल पानी में पूरी तरह से डूब हुई है। पानी की निकासी के लिए कोई रास्ता नहीं है, इसलिए किसान चिंतित हैं। प्रभावित गांवों के किसान रविवार को प्रदेश के कृषि सहकारिता मंत्री सुखबीर कटारिया को शिकायत दी। इसमें बर्बाद हो रही फसलों के बदले मुआवजे की मांग की। किसानों ने कहा कि इस समस्या का स्थायी निदान किया जाए। इससे करीब दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो गया है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव दौलताबाद के निवासी रणधीर सिंह की करीब 14 एकड़, महावीर की छह, विक्रम की तीन, राय सिंह की तीन, कर्मबीर की तीन, जोगेंद्र की नौ, प्रताप की 12, रामनिवास की चार, बसंत की चार और रामानंद की 12 और सरपंच वीरेंद्र सिंह की भी नौ एकड़ फसल खराब हो चुकी है।

पट्टे पर जमीन लेने वाले हुए तबाह
गांव की करीब 95 एकड़ जमीन को हर साल पट्टे पर दिया जाता है। इस बार भी इस जमीन को पांच से आठ हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से पट्टे पर दिया गया था। दीवान, वीरेंद्र सिंह और राज सिंह सहित करीब दर्जनभर किसान इससे तबाह हो गए हैं।
किसानाें ने दी चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि पांच गांवों की इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो किसान मानेसर और सेक्टर चार के नालों से आने वाले पानी को बंद कर करेंगे। इसके बाद शहरी इलाके में गंदा पानी भर जाएगा। गांव के बुजुर्ग रामानंद ने बताया दिल्ली के इस पानी की निकासी के लिए बनाई गई ड्रेन की आखिरी बार वर्ष 1964 में सफाई हुई थी। अब तक यह पूरी तरह से बंद हो चुकी है। थोड़ा सा पानी आते ही फसल डूबने लगती है। किसानों ने बताया कि मानेसर इलाके के उद्योगों का केमिकलयुक्त पानी नाले के जरिए यहां तक पहुंचता है। यह पानी फसलों को जला रहा है। गेहूं की फसल के पत्ते पीले हो चुके हैं।
कृषि विभाग के अधिकारी नहीं सुनते
क़ृषि विभाग के अधिकारियों को शिकायत देने गए किसानों की विभाग ने नहीं सुनी। किसानों ने कहा कि उपायुक्त, अतिरिक्त उपायुक्त और कृषि विभाग के उपनिदेशक को समस्या से अवगत करा चुके हैं। इसके बाद भी किसी विभाग ने कार्रवाई नहीं की।

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