कोहरा नहीं थाम सकेगा ट्रेनों की रफ्तार

Gurgaon Updated Tue, 18 Dec 2012 05:30 AM IST
गुड़गांव। कोहरे के कारण इस बार ट्रेनों की रफ्तार धीमी न पड़े इसके लिए उत्तर रेलवे ने ट्रेनों में एंटी फॉग सिस्टम लगाने का कार्य शुरू किया है। दावों पर यकीन करें तो करीब 900 ट्रेनों में सिस्टम लगाने का काम भी पूरा हो चुका है। वैसे, कुल एक हजार ट्रेनों में यह व्यवस्था होगी।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने उत्तर रेलवे को एंटी फॉग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। खासकर अधिक कोहरे वाली लाइनों की ट्रेनों में यह सिस्टम लगाया जाना है। इनमें सभी प्रकार की ट्रेनें शामिल हैं। पिछले वर्ष प्रयोग के तौर पर कुछ रूटों की ट्रेनों में इसे लगाया गया था।

क्या है खासियत
यह जीपीएस जैसी डिवाइस है। इसकी खासियत है कि इसे एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन में शिफ्ट किया जा सकता है। चीफ पीआरओ ने बताया कि उत्तर रेलवे ने एक हजार फॉग सेफ्टी डिवाइस खरीदे हैं। इनमें से 900 के करीब डिवाइस ट्रेनों में लग चुके हैं।

इस तरह करेगा काम
डिवाइस ट्रेन के इंजन के पास चालक के केबिन में लगाया जाता है। यह सिग्नल और आने वाले स्टेशन के पांच से छह किलोमीटर के फासले से ही हूटर बजाकर चालक को आगाह कर देता है। चालक को चलने और रुकने के सिग्नल भी यह डिवाइस देता है। सिग्नल के आने से पहले हूटर की आवाज कुछ और होगी और स्टेशन आने से पहले की कुछ और। हूटर की आवाज से चालक को अंदाजा लगाने में दुविधा नहीं होगी।

क्या थी दिक्कत
कोहरे के कारण ट्रैक पर सिग्नल दिखाई नहीं पड़ता। जिस कारण ट्रेन अपनी नियमित गति से नहीं चल पाती। कई बार अधिक कोहरे के चलते सिग्नल को देखने में चालक को अधिक दिक्कत आती है। जिस कारण ट्रेनों को बार-बार रोकना पड़ता है। इस वजह से ट्रेन अपने निर्धारित समय से काफी देरी से स्टेशन पहुंचती है। जाहिर है ऐसे में यात्रियों को परेशानी होती है। इसे दूर करने के लिए नई व्यवस्था की जा रही है।

किन रूटों की ट्रेनों में होगा सिस्टम....
-- इलाहाबाद, लखनऊ, मुरादाबाद, कानपुर, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और गुजरात के सभी रूटों पर
(रेलवे बोर्ड ने उत्तर रेलवे को इन रूटों की ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगाने के निर्देश दिए हैं। सबसे अधिक कोहरा उत्तर क्षेत्र में पड़ता है)

क्यों होती हैं ट्रेनें निरस्त
नीरज शर्मा के अनुसार लिंक ट्रेनों को अधिक कोहरे के कारण निरस्त किया जाता है। इनके स्थान पर कुछ मेल गाड़ियों को पैसेंजर की तरह संचालित किया जाता है। लिंक गाड़ियों की वजह से क्रासिंग का फंडा खत्म करने के लिए ऐसा किया जाता है। कई बार क्रासिंग के कारण ट्रेनें विलंब हो जाती हैं। इनके स्थान पर दूसरी गाड़ियों पर यात्रियों का भार डायवर्ट कर दिया जाता है। सब कुछ यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर किया जाता है।

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