दुपहिया फायर टेंडर का इंतजार

Gurgaon Updated Sat, 15 Dec 2012 05:30 AM IST
गुड़गांव। संकरी गलियों में आग लगने पर उसे बुझाने के लिए नगर निगम को दुपहिया फायर टेंडर का इंतजार है। इसके लिए सरकार को तीन साल पहले प्रस्ताव भेजा गया था।
दुपहिया फायर टेंडर के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले लाए गए इस प्रस्ताव को प्रदेश सरकार की ओर से अनुमति नहीं मिली है। वर्ष 2010 में नगर निगम के तत्कालीनआयुक्त आरके खुल्लर नेमिनी फायर टेंडर खरीदने की योजना तैयार की थी। मुंबई, पुणे सहित कुछ अन्य शहरों में इस तरह की गाड़ियां हैं। इस पर दो सिलेंडर लगे होते हैं। इससे तंग गलियों और जाम वाले एरिया में आसानी से लेकर पहुंचा जा सकता है। इसकी कीमत करीब दो लाख रु पये है।
उल्लेखनीय है कि पुराने शहर की गलियां बेहद तंग हैं। वहां लोगाें ने अतिक्रमण कर रखा है। इससे इन गलियों में दमकल की गाड़ियों का पहुंचना आसान नहीं है। सदर बाजार, जैकमपुरा, लक्ष्मी गार्डन, शीतला कॉलोनी, मदनपुरी, अर्जुन नगर, सुभाष नगर, न्यू कॉलोनी, ज्योति पार्क, आचार्यपुरी, प्रेम नगर सहित कई अन्य कॉलोनियों में गलियां 5 से 7 फीट ही चौड़ी हैं। इस कारण इन गलियों में बड़ी गाड़ी नहीं पहुंच सकती हैं। सबसे अधिक खतरा सदर बाजार में रहता है। यहां सबसे अधिक अतिक्रमण भी है। दुकानदारों ने बाजार में अतिक्रमण कर रखा है। औद्योगिक एरिया में भी आग से निपटना मुश्किल हो सकता है। यहां पार्किंग बड़ी समस्या है। इस कारण लोग गाड़ियों को सड़क पर खड़ी कर देते हैं। हादसे के समय दमकल की गाड़ियों का यहां तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। औद्योगिक एरिया में कुछ समय पहले ही फायर स्टेशन बनाया गया है। इसमें अभी काफी खामियां हैं। फायर स्टेशन में कर्मचारियाें की संख्या भी पूरी नहीं है।
25 लाख की आबादी आउटसोर्सिंग के सहारे
गुड़गांव की करीब 20 लाख की शहरी और पांच लाख की ग्रामीण आबादी के लिए महज चार फायर स्टेशन हैं। इनको शहर के अलग-अलग हिस्सों में बनाया गया है। 25 लाख की आबादी को आग से महफूज रखने के लिए बनाए गए स्टेशन संसाधन कमी से जूझ रहे हैं। इन चाराें फायर स्टेशन में महज 18 स्थाई कर्मचारी हैं। बाकी सभी अनुबंध के आधार पर लगाए गए हैं।
100 मीटर ऊंचा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म निजी कंपनी के पास
बहुमंजिला भवनों को आग से सुरक्षित रखने के लिए फायर विभाग के पास साधन नहीं हैं। यहां 96 मीटर ऊंचे भवन बन चुके हैं। दमकल विभाग के पास महज 45 मीटर तक के हाइड्रोलिक प्लेटफार्म हैं। करीब छह माह पहले डीएलएफ कंपनी ने अपने निजी फायर स्टेशन के लिए 90 मीटर ऊंचा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म खरीदा है।

आग के प्रमुख हादसे
-नवंबर 2012 में बहरामपुर में भीषण आग लगी
-अक्तूबर 2012 में उद्योग विहार फेज तीन में गत्ता कंपनी में आग लगी
-सितंबर 2012 में मानेसर में चॉकलेट बनाने वाली कंपनी में आग लगी
-सेक्टर-37 में एक्सपोर्ट गारमेंट के डीजल टैंक में आग लगी
-खांडसा गांव में 2011 में कंपनी में लगी आग को दो दिन बाद काबू पाया जा सका

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