सोहना-तावडू रास्ते को लांघना मुसीबत

Gurgaon Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव/ तावड़ू/सोहना। दिल्ली से चंद किलोमीटर के फासले पर रहने वालों को जाम ने इस कदर घेर रखा है कि उनका जीना मुहाल है। स्थिति इतनी खराब है कि लोग तारीख पर कोर्ट-कचहरी नहीं पहुंचते, छात्रों की परीक्षाएं छूट जाती हैं, मरीज रास्ते में कराहते रहते हैं, व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होता है। इन मुसीबतों की जड़ में हैं, इस रास्ते पर चौबीस घंटे दौड़ने वाले डंपर।
सोहना-तावड़ू को जोड़ने वाला पहाड़ी मार्ग अत्यधिक व्यस्त रहता है। यह मार्ग बल्लभगढ़ के रास्ते पलवल और राजस्थान के भिवाड़ी के लोगों के लिए भी लाइफ लाइन बना हुआ है। इसके अलावा यह मार्ग हरियाणा और राजस्थान के कई औद्योगिक क्षेत्रों को भी जोड़ता है। लेकिन इतने महत्वपूर्ण मार्ग हर हर समय ‘दैत्याकार’ डंपर दौड़ते रहते हैं। ये आए दिन दुर्घटना का कारण तो बनते ही हैं, इससे अक्सर जाम भी लगता है। जाम भी ऐसा कि राहगीर इस संकरे पहाड़ी रास्ते पर कई घंटे फंसे रहते हैं।
उक्त मार्ग पर लगने वाले जाम को लेकर मेवात का पुलिस प्रशासन भी परेशान है। समस्या को दूर करने को आए दिन प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ अधिक लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस मार्ग पर जाम और हादसों को देखते हुए सर्वप्रथम तत्कालीन एसएसपी योगेंद्र नेहरा ने सबसे पहले पहल की थी। इसके लिए उन्हाेंने डंपर चालक, पुलिस व तावड़ू के मौजिज लोगों की बैठक भी कराई थी। उसके बाद एसएसपी बनकर आए पंकज नैन ने तावडू थाने में डंपर चालकों की बैठक ली थी। इस दौरान सुबह आठ से दस बजे तक डंपर परिचालन बंद रखने निर्णय लिया गया था। लेकिन, इलाके के दबंग डंपर चालक इस कायदे को नहीं मान रहे हैं। इसलिए समस्या जटिल बनी हुई है। उसके बाद मेवात के एसएसपी पतराम ने भी ऐसा ही प्रयास किया जो बेनतीजा रहा। अब इस समस्या को लेकर मौजूदा एसएसपी सुखबीर सिंह निरंतर प्रयासरत हैं। करीब दो माह पहले इस मसले को लेकर बैठक बुलाई थी। इस समस्या पर नजर रखने को एक डीएसपी को लगाया गया था।
रोज लगता है जाम : पहाड़ी रास्ते में डंपर खराब होने या दुर्घटनाग्रस्त होने से जाम लगना आम हो गया है। अधिकांश डंपर चालकों या मालिकों के स्थानीय होने के कारण कोई उनका विरोध नहीं करता। पुलिस भी उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई से बचती है। चिंताजनक एक पहलू यह भी है कि अधिकांश डंपर चालक कम उम्र के हैं और नशे में गाड़ी चलाते हैं।
राजस्थान को जोड़ता है मार्ग : अलवर (राजस्थान) की ओर आने वाले वाहन सोहना होकर निकलते हैं। रेवाड़ी और भिवाड़ी के साथ बिलासपुर को भी यह मार्ग जोड़ता है। इसके अलावा इस मार्ग पर रोजाना करीब 1000 डंपर चलते हैं।
राजस्थान के खनन से है समस्या : राजस्थान में पहाड़ों के खनन की अनुमति है। इस कारण हरियाणा में रोड़ी बजरी का कारोबार करने वाले इसी पड़ोसी प्रदेश से डंपरों के माध्यम से पत्थरों की ढुलाई करवाते हैं। बाद में यह रोड़ी बजरी की शक्ल में आसपास के शहरों में भवन निर्माण की खातिर आपूर्ति की जाती है। फरीदाबाद और गुड़गांव के क्रेशर जोन में राजस्थान से मंगाए जाने वाले पत्थर पीसे जाते हैं। इसकी वजह से इलाके में खनन माफिया का जाल बिछा हुआ है।

कैसे मिले जाम से मुक्ति
: रोड पर चलने वाले डंपर का पंजीकरण होना चाहिए
: डंपर अपनी क्षमता के अनुसार ही पत्थर लादकर निकले
: डंपर पर लदे पत्थर को जाली से ढका जाए
: डंपर एक निर्धारित समय में ही निकले
: डंपर चालकों की आयु सीमा का निर्धारण किया जाए
: बिना पार्किंग के डंपर न खड़े हों
: बिना नंबर के डंपर न चलें
: डंपर खस्ताहाल न हो

तावड़ू से प्रतिक्रिया
: डंपरों का आतंक इस कदर है कि स्कूल जाने मेें परेशानी होती है। परिवार इस बात की शिकायत प्रशासन से लेकर स्कूल प्रबंधन तक की जा चुकी है।
-मनोज कुमार, छात्र
: पहले यहां के बच्चे पढ़ने के लिए बाहर जाते थे। रोडवेज की बस बंद होने के कारण अब छोटे वाहनों से इस रास्ते जाना खतरे से खाली नहीं है।
-बृज कुमार
: रेवाड़ी व राजस्थान की बसें पहले इतनी चलती थीं कि आम लोगों को वाहनों का इंतजार नहीं करना होता था। जाम के चलते अन्य डिपो की बसों ने तावड़ू की ओर से निकलने का रास्ता बंद कर दिया है।
- शहीद
: प्रशासन जाम को लेकर गंभीर नहीं है। सबसे अधिक परेशानी छात्रों को होती है। स्कूल के समय में डंपर बंद करने की बात सिरे नहीं चढ़ पाई।
-मनीष कुमार

सोहना से प्रतिक्रिया

: सोहना के चारों ओर सड़कों को बेहतरीन बनाने के बाद भी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है। लोग जाम से परेशान हैं। शिकायत की जा चुकी है।
-राकेश संदूजा
: डंपर और अन्य भारी वाहनों के निकलने का कोई तय समय नहीं है। 24 घंटे जाम की स्थित बनी रहती है। कब किस स्थान पर जाम लग जाए, किसी को पता नहीं होता है।
-चंद्र मोगिया

: सोहना में लगने वाले जाम ने यहां के विकास पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। इससे निपटने के इंतजाम नहीं किए गए तो हालात और भी खराब हाेंगे।
-भगवत दयाल सिंगला

: जाम का प्रमुख कारण डंपर है। यदि डंपर को चलने का समय तय कर दिया जाए तो काफी हद तक राहत मिल सकती है।
-मनोज गोयल

तावड़ू को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग
:तावड़ू से बिलासपुर एनएच-8 को जोड़ने वाले मार्ग की दूरी आठ किमी
:तिजारा की ओर से आने वाले वाहन भोगीपुर से तावडू पांच किमी की दूरी तय करके पहुंच जाते हैं
:भिवाड़ी से खोरी के रास्ते तावडू वाहन सात किमी की दूरी तय करके पहुंचते हैं
:राजस्थान से वाहन सीलको होकर तावडू आठ किमी की दूरी तय करके पहुंचते हैं
:सोहना से पहाड़ी वाले रास्ते होकर तावड़ू 13 किमी में पहुंचते हैं
: तावड़ू से मोहम्मदपुर नौरंगपुर होकर रामपुरा मोड़ पर एनएच-8 को जोड़ने वाले मार्ग की दूरी 17 किमी है। जो दो साल से बंद है। इसकेे बंद होने से इस रोड पर चलने वाले वाहनों का भी दबाव अन्य मार्ग पर बढ़ा हुआ है।

दुर्घटनाएं
-10 माह में 253 वाहन दुर्घटनाएं
-88 लोगों की जान जा चुकी है
-125 लोग घायल हो गए।

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: दो-दो जिलों की जिम्मेदारी है। ओवरलोड डंपरों पर प्रतिमाह 150 रुपये से अधिक का चालान किया जाएगा। विभाग की ओर से लोगों को ट्रैफिक नियमों का पालन कराने और दुर्घटनाओं से बचाने के लिए जागरूक करने का अभियान चलाया जाता है।
-देवेंद्र सिंह, सचिव आरटीए

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