टोल पर सीएम के बयान पर बोले शहरवासी

Gurgaon Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। जाम का पर्याय बन चुके सिरहौल टोल प्लाजा पर तीन दिन पहले सूबे के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बयान से टोल पर जाम से मुक्ति की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री ने सीआईआई के सम्मेलन में स्वयं इस बात का खुलासा किया था कि सिरहौल टोल को प्रदेश सरकार खरीदकर खुद संचालित करना चाहती है। इस बयान से मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से एक्सप्रेस-वे निर्माणकर्त्ता कंपनी के टोल प्रबंधन पर सवालिया निशान लगा दिया है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह बात भी कहीं न कहीं स्वीकार की है कि टोल पर लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इस परेशानी से छुटकारा दिलाने के लिए सरकार स्वयं पहल करेगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद शहर के प्रबुद्ध लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है। कुछ लोगों का कहना कि सरकार के अधीन होने के बाद टोल पर प्रबंधन बेहतर होंगे। साथ ही वसूला राजस्व सरकार के खजाने में जमा होगा। जिससे विकास को नई ऊंचाइयां मिलेगी। कुछ ने सरकार को टोल खरीदने की बजाय इसे हटाने का सुझाव दिया है।

अगर ऐसा होता है तो यह सरकार का बेहतर कदम होगा। फिलहाल लोगों की जेब भी ढीली हो रही है और सुविधाएं नहीं मिल रही। सरकार के अधीन होने के बाद कम से कम परेशानियों के लिए सरकार के सामने रोना तो रो सकते हैं। कंपनी पर तो शिकायतों का भी कोई असर नहीं होता। उन्होंने कहा कि सरकार के अधीन में टोल आने के बाद जाहिर है यहां पुलिस का पहरा होगा, जिससे टोल पर असुरक्षा का डर नहीं रहेगा। साथ ही रोजगार की भी कुछ संभावनाएं हैं। -आरएस राठी, अध्यक्ष गुड़गांव सिटीजन काउंसिल

सरकार के अधीन टोल होने के बाद यहां से वसूला गया राजस्व सरकार के खजाने में जमा होगा। जिससे प्रदेश के विकास को नई ऊंचाइयां मिलेगी। जाहिर है प्रदेश के विकास के साथ गुड़गांव भी इसमें शामिल होगा। मुख्यमंत्री का यह बयान स्वागत योग्य है। देर से ही सही, सरकार ने टोल पर जाम से छुटकारे की पहल है। इससे टोल प्रबंधन की मनमानी से भी छुटकारा मिलेगा। जाम के साथ बेवजह के तनाव से मुक्ति मिलेगी। -पीके भाटिया, पूर्व अध्यक्ष सुशांत लोक आरडब्लूए

टोल को खरीदने से नहीं हटाने से ही जाम से छुटकारा मिल सकता है। टोल आधी दिल्ली और गुड़गांव के लिए कोढ़ बन चुका है। कोढ़ का स्थायी इलाज ही इसके दर्द से मुक्ति देता है। मुख्यमंत्री से दो महीने पहले भी टोल हटाओ संघर्ष समिति के शिष्टमंडल ने बैठक कर समस्या बताई थी। उस समय मुख्यमंत्री ने सकारात्मक संकेत दिए थे। ठीक है बेहतर व्यवस्थाओं के लिए सरकार टोल को खरीदना चाहती है। यह स्वागत योग्य है, लेेकिन अगर ऐसा करना ही है तो पहले जाम से छुटकारा सुनिश्चित किया जाए। यह तभी संभव होगा जब यहां वाहनों का दबाव कम होगा। वाहनों का दबाव तभी कम होगा जब वाहनोें को यहां रोका नहीं जाए। यानि टोल वसूली बंद की जाए। कमर्शियल वाहनों से टोल वसूली हो, निजी के टोल को फ्री किया जाए। -धर्मसागर, टोल हटाओ संघर्ष समिति के सदस्य

टोल को हटाने से ही जाम से मुक्ति मिलेगी सरकार ट्रायल कर देख सकती है। कितने दिनों से लोग मानसिक रूप से परेशानी झेल रहे हैं। इससे किसी को कोई इत्तफाक नहीं है। लोगों की जेब काटने के बाद भी किसी प्रकार कोई सुविधा नहीं मिल रही। इस बारे में पहले भी मुख्यमंत्री से टोल हटाने की गुजारिश की जा चुकी है। टोल हटाओ संघर्ष समिति टोल हटाने के लिए संघर्ष करती रहेगी।-पूनम भटनागर, टोल हटाओ संघर्ष समिति की सदस्य

टोल के कारण लोगों ने लंबे समय परेशानियां झेली हैं। सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है, लेकिन इसके परिणाम सभी देख चुके हैं। 15 दिनों तक हाई कोर्ट के निर्देश पर टोल फ्री रहा। जाम की रत्तीभर भी शिकायत नहीं आई। टोल रहेगा तो जाम रहेगा ही। सरकार को टोल खरीदने की बजाय इसे हटाने पर विचार करना चाहिए। अगर ऐसा संभव नहीं होता है तो कुछ एक सीमा तय करनी होगी। -अशोक पहलवान, समिति के सदस्य एवं पार्षद

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