हक के लिए आंदोलन करें किसान : केजरीवाल

Gurgaon Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मानेसर में आयोजित किसान महापंचायत में इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के सदस्य अरविंद केजरीवाल कांग्रेस, भाजपा सहित इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला पर जमकर बरसे। उन्होंने सभी पार्टी नेताओं को प्रॉपर्टी डीलर की संज्ञा दी। उन्होंने किसानों से कहा कि उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। इसके लिए उन्हें आंदोलन करना होगा। उनकी लड़ाई में वह आगे होंगे। उन्होंने कहा कि अब एक इंच जमीन का अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा। जो कुछ भी होगा, किसानों की मर्जी से होगा।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केवल गुड़गांव या हरियाणा ही नहीं, देशभर में राजनेताओं की ओर से जमीन की खरीद-फरोख्त का धंधा किया जा रहा है। पहले किसानों को जमीन अधिग्रहण का डर दिखाया जाता है। जब किसान डर से जमीन बेचते हैं तो उसका अधिग्रहण रद्द कर दिया जाता है। बाद में सरकार उस जमीन के लैंड यूज में बदलाव कर देती है। इसका सीधा फायदा बिल्डरों और नेताओं को पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाड्रा ने सात करोड़ की जमीन खरीदी और दो महीने में उसका लैंड यूज चेंज कराकर उसे डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया।
सेज का मामला भी उठा
महापंचायत में विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) का मामला पूरे जोर-शोर के साथ उठा। किसानों ने सरकार पर आरोप लगाया कि सेज के नाम पर जमीन को जबरदस्ती कब्जाया गया है। किसानों की करीब साढ़े 13 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर उन्हें जबरदस्ती साढ़े 12 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से भाव दे दिया गया। पहले सरकार ने दलील दी कि इस जमीन पर एचएसआईआईडीसी सेज बनाएगी। बाद में इसे रिलायंस को साढ़े 28 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से बेच दिया। पिछले सात सालों में रिलायंस ने जमीन पर कब्जा कर चारदीवारी के सिवाय कुछ नहीं किया। उस जमीन की मौजूदा कीमत 15 से 20 करोड़ रुपये प्रति एकड़ है।
कुछ और मामले भी उठाए
महापंचायत में किसानों ने कुछ और मामले भी उठाए और केजरीवाल को उनके दस्तावेज सौंपे। अंबाला के एक व्यक्ति ने बताया कि सेज के नाम पर अंबाला में भी किसानों के साथ धोखा किया गया है। किसानों ने बताया कि सेक्टर-37सी में भी अधिग्रहण का डर दिखाकर सस्ते दाम में जमीन बेचने को मजबूर किया गया है। इसी प्रकार नाथूपुर गांव सहित आसपास के 12 गांवों की जमीन भी इसी प्रकार अधिग्रहीत की गई है। मेवात के रमजान ने कहा कि यहां भी सेज के नाम पर किसानों की जमीन अधिग्रहीत की गई है। 24 मई 2011 से यहां के किसान आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही है।
यमुना एक्सप्रेस-वे मामले में हुई धोखाधड़ी
आईएसी के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि नोएडा से आगरा तक बनाए गए यमुना एक्सप्रेस वे के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन में भी किसानों के साथ धोखाधड़ी की गई है। पहले एक्सप्रेस-वे के लिए छह हजार हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की गई। बाद में सरकार ने निर्माण कंपनी को 25 हजार हेक्टेयर जमीन कमर्शियल यूज के लिए अधिग्रहीत कर दे दी। प्रशांत ने कहा कि राबर्ट बाड्रा ने राजस्थान के बीकानेर में सात सौ एकड़ जमीन खरीद कर उसका भी लैंड यूज बदलवा लिया।
हाईकोर्ट के निर्देश को नहीं मान रही हरियाणा सरकार
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हरियाणा सरकार हाईकोर्ट के निर्देश की भी अवहेलना कर रही है। तीन फरवरी 2011 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि ग्राम पंचायतों की अधिग्रहीत की गई भूमि लौटा दी जाए, लेकिन अभी तक जमीन नहीं लौटाई गई है। उन्होंने मंच से हाईकोर्ट के आदेशों की प्रति लहराते हुए कहा कि इसके साथ ही मानेसर की जमीन पर भी किसानों को कोर्ट ने स्टे दे रखा है। इसके बावजूद डीएलएफ की ओर से उक्त जमीन पर निर्माण जारी है।

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