55 फीसदी घरों में शौचालय नहीं

Gurgaon Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। हाईटेक जिले के 55 फीसदी घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं। जिस विभाग के पास शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी है, उसने तीन साल से सर्वे ही नहीं कराया कि स्थिति क्या है? ग्रामीण एरिया में स्थिति और भी खराब है। गांव की आधी से भी अधिक आबादी खुले में भी शौच के लिए जाती है। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के टीएससी राजेश गुप्ता ने बताया कि शौचालयों का आंकड़ा जनगणना के मुताबिक किया जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 की जनगणना के बाद 2011 में जनगणना शुरू हुई। उसके आधार पर शौचालयों की स्थिति पता करने के लिए सर्वे कराया जा रहा है। असली स्थिति सर्वे के बाद ही पता चलेगी। उन्होंने दावा किया कि शहरी क्षेत्र के 72 फीसदी घरों में शौचालय हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के भी 65 फीसदी घरों में शौचालय है। जब कुछ गांवों के सरपंचों से बता की तो उन्होंने बताया कि गांवों में सुधार तो हो रहा है, लेकिन जितना दावा किया जा रहा है, उतने शौचालय नहीं हैं।
खुले में शौच करना महिलाओं की सुरक्षा की दृष्टि से सही नहीं है। बाहर शौच करने वाली महिलाओं के साथ बलात्कार की आशंका रहती है। ऐसे में यह जरूरी है कि घरों में शौचालयों की व्यवस्था की जाए।
-कुलभूषण भारद्वाज, एडवोकेट

खुले में शौच करना किसी तरह से सही नहीं है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा इससे पूरी तरह प्रभावित होती है। स्वास्थ्य के लिए भी यह सही नहीं है। घरों में शौचालय होने से ग्रामीण महिलाएं ज्यादा सुरक्षित रहेंगी।
-मीनू सिंह, आरडब्ल्यूए के प्रधान सेक्टर पांच

खुले में शौच सही नहीं है। इससे सुरक्षा के अलावा स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। डायरिया और बच्चों में कई प्रकार की बीमारियां खुले में शौच से ही होती हैं। इससे महिलाओं के साथ बलात्कार की अधिक आशंका रहती है।
-दिनेश वशिष्ठ, समाज सेवी

खुले में शौच महिलाओं की सुरक्षा को तो प्रभावित करता ही है साथ ही पर्यावरण को खासा नुकसान होता है। इससे रोगाणु पनपते हैं जो बीमारी फैलाते हैं। कई प्रकार की बीमारियों को यह जन्म देता है।
राजेश कुल्लू, पर्यावरणविद्


निर्मल भारत अभियान के तहत होगा निर्माण
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के अध्यक्ष एवं अतिरिक्त उपायुक्त केएम पाडूरंग ने कहा कि शौचालय निर्माण की दिशा कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा निर्मल भारत अभियान के तहत सभी घरों में शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि खुले में शौच किसी भी दृष्टि से ठीक नहीं है। खासकर महिलाओं के लिए। खुले में शौच न तो सुरक्षा की दृष्टि से ठीक है और न ही सामाजिक दृष्टि से। स्वास्थ्य को लेकर भी यह सही नहीं है। एडीसी ने कहा कि शौचालय निर्माण के लिए हर परिवार को 46 सौ रुपये दिए जाएंगे। सर्वे में यह पता लगाया जा रहा है कि कितने घरों में शौचालय नहीं हैं। उसके बाद प्रोजेक्ट तैयार कराया जाएगा। इसके अलावा बीपीएल परिवारों को मनरेगा योजना के तहत भी शौचालय निर्माण के लिए राशि प्रदान की जाएगी। यह राशि उन्हीं परिवारों को दी जाएगी जो मनरेगा के तहत काम कर रहे हैं।

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