अब बस पर्दा उठने का इंतजार

Gurgaon Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। जिले में 14 अक्तूबर से रामलीला शुरू होने जा रही है। कुछ रामलीला कमेटियों ने जहां रिहर्सल पूरी कर ली है, वहीं कुछ की रिहर्सल आखिरी दौर में है। अमर उजाला ने पिछली दो रातों में तैयारियों का जायजा लेने के साथ ही कलाकारों से रामलीला के दिनों में दिनचर्या में आने वाले बदलाव पर भी बातचीत की। प्रस्तुत है अमित कुमार की रिपोर्ट।
श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा के कलाकारों ने मंगलवार की रात प्रजापति धर्मशाला में रामलीला मंचन की फाइनल रिहर्सल की। इस दौरान दशरथ-कैकयी संवाद, लक्ष्मण-परशुराम संवाद, लंका दहन से पूर्व रावण-हनुमान संवाद, अंगद-रावण संवाद समेत सभी प्रमुख किरदारों की रिहर्सल कराई गई। श्री सनातन धर्म सभा रजिस्टर्ड गीता भवन मंदिर में बुधवार की रात रिहर्सल को लेकर खासी रौनक रही। यहां केवल रामलीला का मंचन करने वाले कलाकार ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और रिश्तेदार भी नजर आए। बाल सुख सागर रामलीला कमेटी मदनपुरी, पुरानी रामलीला कमेटी डाकखाने वाली और श्री प्रेम मंदिर बाबा सिद्धेश्वर रामलीला कमेटी ने भी रिहर्सल लगभग पूरी कर ली है। कमेटी पदाधिकारियों की मानें तो अब केवल पर्दा उठने का इंतजार है। ताकि, हर साल की तरह इस साल भी मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की लीला का मंचन शुरू किया जा सके।
लंकापति बनने के लिए करा ली शिफ्ट चेंज
श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा में पिछले 22 सालों से रावण का किरदार निभा रहे बलवीर सैनी हुडा में वाटर पंप ऑपरेटर पद पर तैनात हैं। बलबीर बताते हैं कि उन्होंने रामलीला में भाग लेने के लिए शिफ्ट चेंज करा ली है। अब दोपहर एक बजे से रात नौ बजे तक की शिफ्ट है। इस प्रकार ड्यूटी भी कर लेते हैं और रामलीला मंचन में भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती है।
संकट मोचन बनने को त्याग दिया बिस्तर
श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा में पिछले दस सालों से हनुमान का किरदार निभा रहे मनोज तंवर ने तो बिस्तर पर सोना ही छोड़ दिया है। एक निजी फर्म में अकाउंटेंट के पद पर तैनात मनोज को रामलीला के लिए छुट्टी नहीं मिली। ऐसे में रात को रिहर्सल तो सुबह ड्यूटी हो रही है। मनोज कहते हैं कि हनुमान इतने बलशाली हैं कि उनका चरित्र निभाते समय कभी थकावट महसूस ही नहीं हुई।
मर्यादा पुरुषोत्तम के लिए शादी में जाने से इनकार
श्री सनातन धर्म सभा रजिस्टर्ड गीता भवन मंदिर में राम का चरित्र निभा रहे धीरज चावला के परिवार में 24 अक्तूबर को शादी है। उन्होंने शादी में जाने की बजाय रामलीला मंचन को प्राथमिकता दी है। न्यू रेलवे रोड पर केमिस्ट शॉप के संचालक धीरज का कहना है कि सालभर उन्हें रामलीला के आने का इंतजार रहता है। कारण कितना ही बड़ा क्यों न हो, उनके लिए रामलीला से दूर रहना मुश्किल है।
बुटीक से ज्यादा जरूरी सीता का किरदार
श्री सनातन धर्म सभा, गीता भवन मंदिर में पिछले दस साल से सीता का किरदार निभा रही मुस्कान सदर बाजार में बुटीक चलाती है। मुस्कान का कहना है कि रामलीला में देर रात तक व्यस्त रहने के बावजूद सुबह बुटीक पर जाना उनके लिए नई बात नहीं है। हालांकि थोड़ी परेशानी आती है, लेकिन माता सीता के किरदार में इतनी शक्ति है कि जरा भी थकावट महसूस नहीं होने देती।
भगवान राम के लिए बचाई जाती हैं छुट्टियां
श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा में पिछले दो साल से राम का किरदार निभा रहे केशव जानेंद्रा कीर्ति नगर की एक कंपनी में इंटीरियर डिजाइनर हैं। केशव ने बताया कि उन्हें रामलीला के लिए छुट्टी नहीं मिलती। इसलिए वह रामलीला नजदीक आते ही छुट्टियां बचानी शुरू कर देते हैं। उन्हें राम का किरदार इसलिए अच्छा लगता है, क्योंकि इससे जीवन में अनुशासित होने की प्रेरणा मिलती है।
मंथरा बनना भी किसी चुनौती से कम नहीं
चिरंजीवी हॉस्पिटल में स्टाफ नर्स अंजू शर्मा पिछले कई सालों से श्री सनातन धर्म सभा, गीता भवन मंदिर में मंथरा का चरित्र निभा रही हैं। मंथरा के अलावा भी कई चरित्र निभाती हैं। अंजू ने बताया कि रामलीला खेलने के लिए कभी भी छुट्टी लेने की जरूरत नहीं पड़ी। जैसे ही रामलीला स्टेज पर पहुंचती हूं, दिनभर की थकान गायब हो जाती है। मंथरा का रोल भले छोटा है, लेकिन चुनौती से भरा है।
कुंभकरण को अब नहीं आती नींद
श्री सनातन धर्म सभा, गीता भवन मंदिर में कुंभकरण का किरदार निभाने वाले मुनीष खुल्लर मल्टीनेशनल कंपनी में जनरल मैनेजर हैं। मुनीष बताते हैं कि रातभर रामलीला करने के बाद सुबह ऑफिस पहुंच जाते हैं। उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं आती है। रामलीला को लेकर क्रेज इतना अधिक है कि उलटा नींद ही नहीं आती है। कुंभकरण के अलावा नारद और कई अन्य चरित्र निभाते हैं।
लक्ष्मण बनने के लिए बिठाना पड़ता है सामंजस्य
श्री सनातन धर्म सभा, गीता भवन मंदिर में लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले राजेश खरबंदा की न्यू रेलवे रोड पर सेनेट्री व हार्डवेयर की दुकान है। राजेश ने बताया कि रामलीला के दिनों में सुबह तीन बजे तक फ्री होते हैं। सोते-सोते चार बज जाते हैं, लेकिन सुबह आठ बजे फिर से दुकान खोलनी होती है। लक्ष्मण बनने के लिए काफी सामंजस्य बिठाना पड़ता है, लेकिन इससे परेशानी कभी महसूस नहीं हुई।
काम ने नहीं दी पांव जमाने की फुर्सत
श्री दुर्गा रामलीला कमेटी जैकमपुरा में अंगद का चरित्र निभाने वाले मनीष वर्मा को इस बार काम ने इतनी फुर्सत नहीं दी कि वह रामलीला के मंचन में शामिल हो पाते। पेशे से टूर एंड ट्रैवल्स के संचालक मनीष ने बताया कि कुछ परेशानियों के चलते कारोबार पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है। रामलीला में शामिल न हो पाने का बेहद दुख है। अगली बार मौका मिला तो फिर से अंगद का रोल जरूर निभाऊंगा।

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