सावधानी बरतकर बचें स्वाइन फ्लू से

Gurgaon Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया और डेंगू के बाद अब स्वाइन फ्लू को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय लोगों में स्वाइन फ्लू के प्रति कम जानकारी होने के चलते लिया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि स्वाइन फ्लू लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर थोड़ी सी सावधानी रखी जाए तो इससे बचा जा सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. प्रवीण कुमार गर्ग ने बताया कि स्वाइन फ्लू एच1एन1 वायरस की वजह से होता है। इसको तीन कैटेगिरी में बांटा गया है। पहली दो कैटेगिरी तो ऐसी है, जिनमें मरीज के रक्त के नमूने लेने की जरूरत नहीं पड़ती। मरीज केवल दवा लेकर ही ठीक हो जाते हैं। इसके बावजूद जानकारी के अभाव में स्वाइन फ्लू का नाम भर आते ही लोगों में डर फैल जाता है। ऐसे में लोगों को स्वाइन फ्लू के बारे में जागरूक करना जरूरी हो गया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से यह अभियान चलाया जाएगा।
लक्षणों से पहचानें स्वाइन फ्लू की कैटेगिरी
चिकित्सकों का कहना है कि बुखार, खांसी, सर्दी जुकाम, खराश, उल्टी व दस्त स्वाइन फ्लू की पहली कैटेगिरी में आते हैं। बुखार तेज होने पर यह लक्षण हो तो इसे कैटेगिरी बी में रखा जाता है। दोनों ही कैटेगिरी में घबराने की जरूरत नहीं है। केवल दवा लेने से ही काम चल जाएगा, लेकिन यह लक्षण अगर पांच साल से कम उम्र के बच्चे या फिर 65 साल से अधिक आयु के लोगों में हो तो टैमीफ्लू की दवा दी जाती है। सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, भूख न लगना, खांसी में खून आना, ब्लड प्रेशर कम होने के लक्षण स्वाइन फ्लू की कैटेगिरी तीन का संकेत देते हैं। इस कैटेगिरी में आने वाले मरीजों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करके अलग से उपचार दिया जाता है।
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इन बातों का रखें ख्याल
- स्वाइन फ्लू का वायरस खांसने और छींकने से फैलता है। ऐसे मरीजों से दूर रहें।
- जिन स्थानों पर संक्रमण का खतरा अधिक हो, वहां मुंह पर कपड़ा रखकर जाए
- अगर परिवार में ऐसा कोई मरीज है तो उसे अलग कमरे में रखना चाहिए
- मरीज के लिए तौलिया, कपड़े व बेडशीट आदि की व्यवस्था अलग होनी चाहिए
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बुखार को रखें नियंत्रित
सिविल अस्पताल के जनरल फीजिशियन डॉ. प्रदीप शर्मा बताते हैं कि स्वाइन फ्लू में मरीज के शरीर का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर चला जाता है। तापमान को नियंत्रित करने के लिए पैरासिटामोल ली जा सकती है। ध्यान रहे कि एक दिन में चार टेबलेट से ज्यादा न हो। बच्चों को आधी टैबलेट ही दी जाए। मरीज को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए, क्योंकि संक्रमण पानी में घुलकर शरीर से बाहर निकल जाता है। उन्होंने बताया कि 90 फीसदी मामलों में स्वाइन फ्लू पहली दो कैटेगिरी तक ही सीमित रहता है।

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