सीवेज के पानी के इस्तेमाल की अनुमति मांगी

Gurgaon Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। रियल इस्टेट ने नालों के पानी को इस्तेमाल करने के लिए अनुमति मांगी है। इसके लिए कई बिल्डरों ने तो बाकायदा सरकार के पास प्रस्ताव भेज दिया है। इसके लिए बिल्डरों ने खुद का ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का निर्णय लिया है। अगर मंजूरी मिल जाती है तो इससे न केवल भूमिगत जल का दोहन बच जाएगा, बल्कि अर्से से आशियाने की आस में बैठे सैकड़ों लोगों को भी राहत मिलेगी।
रियल इस्टेट के जानकार बताते हैं कि वर्तमान में करीब 125 प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जबकि 250 से ज्यादा प्रोजेक्ट लाने की तैयारी चल रही है। चूंकि जिले में निर्माण कार्यों में भूमिगत जल के इस्तेमाल पर रोक लगी है, इसलिए बिल्डरों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पानी की व्यवस्था को लेकर है। हालांकि जिला प्रशासन अभी अपने दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी मुहैया करा रहा है, लेकिन भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए बिल्डर सतर्क हैं। जिला प्रशासन इस समय बिल्डरों को धनवापुर और बहरामपुर के सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी मुहैया करा रहा है। बिल्डरों की मानें तो जबसे हाईकोर्ट की सख्ती हुई है, तबसे पानी की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। टैंकर चालक मनमानी कीमत वसूलते हैं। वहीं प्रतिस्पर्धा के चलते कई बार दूसरे बिल्डर ज्यादा रकम देकर टैंकर चालकों को अपनी ओर कर लेते हैं। इन सब परेशानियों के चलते प्रत्येक कंस्ट्रक्शन कंपनी खुद का सीवेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का मन बना रही है। बिल्डर्स को पूरी उम्मीद है कि सरकार उन्हें नालों के पानी के इस्तेमाल करने की इजाजत दे देगी। बिल्डर्स ने बाकायदा अपने प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया है कि अगर किन्हीं कारणों से वर्तमान में यह मंजूरी देने में बाधा आ रही हो तो सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट की संख्या बढ़ाई जाए। क्योंकि साइबर सिटी में चल रहे प्रोजेक्ट के मद्देनजर दो सीवेज वाटर ट्रीटमेंट पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा, पानी के टैंकरों की वजह से जाम लगने, सड़कों को नुकसान होने के साथ ही बिल्डर्स और प्रोजेक्ट की संख्या बढ़ने पर आने वाली परेशानियों का भी उल्लेख किया गया है।
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नाले के पानी के इस्तेमाल के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। ताकि रिसाइकिल करके इसका इस्तेमाल निर्माण कार्य में किया जा सकेगा। निर्माण पूरा होने के बाद सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी सरकार को सौंपने का सुझाव दिया है। अगर मंजूरी मिलती है तो रियल इस्टेट की सबसे बड़ी समस्या का हल हो जाएगा।
-रवि सौंद, सीओओ, सीएचडी डेवलपर्स लिमिटेड

पूरी उम्मीद है कि सरकार नालों के पानी को इस्तेमाल करने की अनुमति प्रदान करेगी। सभी प्रोजेक्ट में सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने शुरू कर दिए हैं। चूंकि गंदे पानी को रिसाइकिल करके इसका इस्तेमाल निर्माण कार्य में होगा, इसलिए एसटीपी को लेकर तय मापदंडों को कुछ लचीला बनाया जाना चाहिए।
-एसके भट्ट, सीनियर जनरल मैनेजर प्रोजेक्ट, रहेजा ग्रुप

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