साइबर सिटी से सिमट रहा बीपीओ का कारोबार

Gurgaon Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। एक समय था जब गुड़गांव में डेढ़ सौ से ज्यादा बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) कंपनियां ऑपरेशन संचालित करती थीं। आज स्थिति यह है कि महज 80 के आसपास कंपनियां सिमट कर रह गई हैं। इसका सबसे बड़ा कारण, सरकारी कंपनियों का प्रोत्साहन न मिलना है। पिछले डेढ़ वर्षों में ढेरों आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अपना कारोबार दूसरे शहरों व देशों में करना शुरू कर दिया है।
गुड़गांव में आउटसोर्सिंग का कारोबार काफी शानदार रहा है। वर्ष 2007-08 में यह कारोबार 18 हजार करोड़ रुपये का था। वर्ष 2009-10 में गुड़गांव के आउटसोर्सिंग सेक्टर ने 23 हजार करोड़ का कारोबार किया था। लेकिन अब यहां के बीपीओ सेक्टर को कई प्रकार की समस्याओं से रूबरू होना पड़ है। इस कारण वह यहां से पलायन के मूड में आ चुकी हैं। इससे आने वाले समय में गुड़गांव को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

क्या कहना है आउटसोर्सिंग सेक्टर के लोगों का
1- प्राइम कॉल इंटरनेशनल की डायरेक्टर विनीता का कहना है कि गुड़गांव से बीपीओ कंपनियों का मोह भंग होने लगा है। यहां पर बीपीओ कंपनियों की संख्या 150 से 80 के स्तर पर पहुंच गई हैं।
2- हरियाणा आईटी एंड आईटी इनेबल इंडस्ट्रीज कंफेडरेशन के प्रेसीडेंट प्रदीप यादव का कहना है कि गुड़गांव से बीपीओ कंपनियां किनारा करने लगी हैं। उनका कहना है कि जीई, जेनपैक्ट, टेक महिंद्रा और नगारो सॉफ्टवेयर जैसी बड़ी कंपनियां जयपुर से अपने ऑपरेशंस शुरू कर चुकी हैं। इसके अलावा विप्रो, टेक महिंद्रा, ड्यूच बैंक, न्यूक्लियस सॉफ्टवेयर, ट्रूवर्थ और कनेक्शन भी बाहर का रुख कर सकते हैं।
3-हर्वा बीपीओ के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि गुड़गांव से बीपीओ कंपनियां किनारा कर रही हैं। इसका एक तकनीकी पहलू भी है। गुड़गांव को विदेशों से काम सिर्फ इसलिए मिल रहा है कि यह सस्ता है। लेकिन अब विदेशी कंपनियां सस्ते के साथ-साथ क्वालिटी भी चाहती हैं। उन्हें यहां से अच्छी क्वालिटी नहीं मिल रही है। जिस कारण वह यहां से विदेशों सहित देश के रूरल हिस्सों में भी जा रही हैं।

क्या कहना है गुड़गांव के जीएम आईटी का
हरियाणा सरकार की ओर से गुड़गांव में नियुक्त जनरल मैनेजर इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी एमके सरदाना इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते कि बीपीओ कंपनियां यहां से पलायन कर रही हैं। उनका कहना है कि गुड़गांव का बीपीओ सेक्टर पूरी तरह से सुरक्षित है।

बीपीओ के जाने का गुड़गांव को नुकसान
-रियल एस्टेट कंपनियों को होगा नुकसान
-किराए पर घर उठाने वालों का होगा नुकसान
-सरकार को गुड़गांव से मिलने वाले राजस्व में आएगी कमी
-मॉल्स में शॉपिंग करने वालों की संख्या होगी कम
-रिटेल सेक्टर भी होगा प्रभावित
-युवाओं के लिए होगा रोजगार का संकट

पलायन के टॉप टेन कारण
-इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
-योग्य प्रोफेशनल्स का अभाव
-महंगा ऑफिस स्पेस
-लोकल कनेक्टीविटी का अभाव
-भारी ट्रैफिक
-खराब रोड
-बिजली संकट
-लागत का दिनोंदिन बढ़ना
-बीपीओ कंपनियों को बढ़ावा देने की कोई योजना नहीं


इधर रुख कर रहीं कंपनियां
-फिलिपींस
-चाइना
-ताइवान
-श्रीलंका
-तमिलनाडू
-कर्नाटक
-आंध्र प्रदेश
-नॉर्थ ईस्ट
-जयपुर

बीपीओ की खबर पार्ट टू

सरकार दे ध्यान
सरकार की ओर से प्रयास किया जाए तो साइबर सिटी के आईटी-बीपीओ सेक्टर को गति दी जा सकती है। हरियाणा आईटी एंड आईटी इनेबल इंडस्ट्रीज कंफेडरेशन के प्रेसीडेंट प्रदीप यादव का कहना है कि हरियाणा सरकार इस सेक्टर को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। आईटी टॉस्क फोर्स गठित करने का मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया है। वहीं हर्वा के सीईओ का कहना है कि सरकार के प्रयास से ही कंपनियों को दूसरे राज्यों और देशों में जाने से रोका जा सकता है।

तो रुक सकती हैं आउटसोर्सिंग कंपनियां
-सरकार आईटी-बीपीओ सेक्टर के प्रोत्साहन के लिए ठोस नीति बनाए
-नई कंपनियों को गुड़गांव में लाने का प्रयास करे
-कंपनियों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जाए
-कंपनियों को अबाधित बिजली आपूर्ति की व्यवस्था
-सड़कों की हालत ठीक करवा करवाई जाए
-लोकल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दिया जाए
-दिन-प्रतिदिन ट्रैफिक की खराब होती स्थिति को खत्म करना
-एक ऐसे प्लेटफार्म का निर्माण जिससे कंपनियां सीधे सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकें

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