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बारिश के बाद भी रूठा बैठा है जलस्तर

Gurgaon Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
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गुड़गांव। जिले में भूमिगत जल का इतनी अधिक मात्रा में दोहन हो रहा है कि सामान्य से अधिक बरसात होने पर भी जलस्तर ऊपर आने की बजाय लगातार नीचे जा रहा है। भूमिगत जलस्तर के आंकड़ों से लगता नहीं कि अगस्त माह में हुई रिकार्ड बारिश भी जलस्तर को ऊपर लाने में मददगार साबित होगी। चिंता की बात यह है कि केवल शहर में ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी भूमिगत जल बड़ी तेजी से नीचे जा रहा है।
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गुड़गांव शहर में इस समय भूमिगत जल का स्तर 35.80 मीटर है। पिछले साल जून 2011 में भूमिगत जलस्तर 33.55 मीटर दर्ज किया गया था। अप्रैल 2011 से अगस्त 2011 तक जिले में 980 एमएम (मिलीमीटर) बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद जब अक्तूबर माह में भूमिगत जलस्तर मापा गया तो केवल 0.16 मीटर का सुधार दर्ज किया गया। जब इस साल जून माह में दोबारा जांच की गई तो जलस्तर 2.40 मीटर और नीचे मिला। स्पष्ट है कि बरसात में जितना भूजल स्तर सुधरा, उससे कहीं ज्यादा उसका दोहन कर लिया गया। यही कारण रहा कि अच्छी बरसात भी भूजल स्तर को ऊपर उठाने में मददगार साबित नहीं हो पाई।
साल दर साल ऐसा ही हो रहा है
पिछले 38 सालों के दौरान भूमिगत जलस्तर ऊपर आने की बजाय नीचे ही जा रहा है। जून 1974 में जिले का भूमिगत जलस्तर 6.64 मीटर था, लेकिन जून 2011 में जिले का भूमिगत जलस्तर 24.54 पहुंच गया। जुलाई और अगस्त में बरसात के बाद जब अक्तूबर माह में दोबारा से जांच की गई तो बरसात से जिले भर के भूमिगत जल में केवल 0.20 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून 1974 के मुकाबले जून 2011 में संपूर्ण जिले का भूमिगत जलस्तर 17.90 मीटर नीचे चला गया है। इसका मतलब यह है कि केवल गुड़गांव शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी भूमिगत जलस्तर का बड़ी मात्रा में दोहन हुआ है।
बाढ़ के बाद भी नहीं सुधरे हालात
वर्ष 2007 की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में साल भर में सामान्य बरसात 596 एमएम रहती है। 2007 से 2012 तक जिले भर में सामान्य से अधिक बरसात दर्ज की गई। मानसून के मौसम में ही 508 एमएम से अधिक बरसात दर्ज होती रही। लेकिन भूमिगत जलस्तर में सुधार नहीं आया। वर्ष 1977 में जिले में बाढ़ तक आ गई थी। इसके बाद भी आसपास के क्षेत्रों में कई बार बाढ़ के हालात बने, लेकिन भूमिगत जल लगातार नीचे ही रहा।
फर्रूखनगर में भूमिगत जल का ब्योरा
फर्रूखनगर में जून 2010 में भूमिगत जलस्तर 19.35 था। जुलाई और अगस्त की बरसात के बाद जलस्तर में 3.65 मीटर का सुधार आया। इसके बाद जब अक्तूबर 2011 में जांच की तो जलस्तर 1.90 मीटर नीचे गिरकर 17.60 मीटर पर पहुंच गया। वर्तमान में यहां भूमिगत जलस्तर 19.40 है।
सोहना में भूमिगत जल का ब्योरा
सोहना में जून 2010 में भूमिगत जलस्तर 26.60 मीटर था। मानसून की बरसात के बाद अक्तूबर 2010 में 2.10 मीटर का सुधार आया। जून 2011 में जांच की तो जलस्तर 0.85 मीटर नीचे गिरकर 25.35 मीटर दर्ज हुआ। वर्तमान में यहां 24.90 मीटर पर भूमिगत जल मिल पा रहा है।
पटौदी में भूमिगत जल का ब्योरा
पटौदी में जून 2010 में भूमिगत जल 32.10 मीटर की गहराई पर था। बरसात के बाद अक्तूबर 2010 में भूमिगत जल ऊपर आने की बजाय 0.50 मीटर नीचे चला गया। जून 2011 में 32.70 मीटर पर दर्ज किया गया, जबकि इस समय यह 33.95 मीटर पर पहुंच गया है। अगर कहा जाए कि पटौदी में भूमिगत जल सबसे तेजी से नीचे जा रहा है तो गलत नहीं होगा।

कोट
भूमिगत जलस्तर में सुधार तभी आएगा, जब भूजल का संयमित इस्तेमाल हो। अभी तक तो जिले का भूजल स्तर लगातार नीचे ही जा रहा है। इस साल की बरसात से भूजल में कितना लाभ हुआ, यह अक्तूबर माह में पता चलेगा।
एनके सहरावत, भूजल अधिकारी, गुड़गांव

जिले में पिछले साल 980 एमएम बरसात हुई थी, जो कि सामान्य से अधिक है। इससे पहले भी अच्छी बरसात दर्ज हुई, लेकिन भूजल स्तर नहीं सुधर पाया। भूजल स्तर तभी सुधर पाएगा, जब लोग इसके संयमित इस्तेमाल को लेकर जागरूक होंगे।
डा. पीएस सभ्रवाल, उपनिदेशक, कृषि विभाग, गुड़गांव

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