उपभोक्ताओं की लंबी हो रही वेटिंग लिस्ट

Gurgaon Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। तालाबंदी समाप्त होने के बाद अब मारुति कंपनी के सामने त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं के समक्ष अपनी साख बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले एक महीने में करीब 57 हजार काराें का उत्पादन न होने से वेटिंग लिस्ट लगातार लंबी हो रही है। प्लांट शुरू होने के बाद भी कंपनी में महज 80 से 90 कारों का उत्पादन हो रहा है।
करीब 34 दिन तक बंद रहने के बाद मारुति के मानेसर प्लांट में 21 अगस्त से काम शुरू होने के बाद भी कंपनी की चुनौती समाप्त नहीं हुुई। मारुति के सामने अब अपनी साख बचाने की चुनौती है। अक्तूबर महीने से त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। इसमें दशहरे से सीजन की शुरूआत हो जाएगी। इसके बाद नवरात्र, धनतेरस, दिवाली आएगी। दिवाली के बाद विवाह का सीजन भी आएगा। इस सीजन में गाड़ियों की सबसे अधिक खरीद होती है। कार बनाने वाली कंपनियों से मिली जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक गाड़ियों की मांग अक्तूबर से दिसंबर के बीच होती है। कुल कारोबार का करीब 65 प्रतिशत कारोबार इन चार महीनों में होता है।
मारुति कंपनी के मानेसर प्लांट में 18 जुलाई की रात से कारों का उत्पादन बंद हो गया था। करीब 34 दिन तक काम पूरी तरह से बंद रहा। कंपनी के इस प्लांट में रोजाना 1700 गाड़ियां बनती थीं। पिछले 34 दिन में करीब 57 हजार गाड़ियों का उत्पादन नहीं हो सका। 21 अगस्त को प्लांट में दोबारा से काम शुरू हुआ। प्लांट में पिछले तीन दिन में रोजाना 80 से 90 कार का उत्पादन हो रहा है। मांग की बजाए उत्पादन बेहद कम होने से वेटिंग लिस्ट लगातार लंबी हो रही है। अगले महीने से कंपनी के समक्ष अधिक से अधिक गाड़ियां तैयार करने का दबाव होगा। त्योहारी सीजन में अपने उपभोक्ताओं की मांग को पूरा करना कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कंपनी के समक्ष करोड़ों के नुकसान की बजाए अब करोड़ों की साख को बचाने के लिए एक चैलेंज है।
गंभीर होकर काम करना होगा
मारुति उद्योग कामगार यूनियन के प्रधान कुलदीप जांघू ने कहा कि फिलहाल बेहद कम संख्या में कारों का उत्पादन हो रहा है। प्लांट को उसकी पूरी क्षमता तक पहुंचाने के लिए कम से कम एक माह का समय लग जाएगा। कंपनी को उत्पादन बढ़ाने के लिए गंभीर होकर काम करना होगा।
2 सितंबर से आएगी तेजी
मारुति कंपनी प्रबंधन के अनुसार दो सितंबर से कर्मचारियों को पक्का करने के लिए परीक्षा शुरू होगी। नए कर्मचारियों को भी मौका दिया जाएगा। कंपनी की ओर से मेन प्रोडक्शन लाइन से मार्च 2013 तक अस्थाई कर्मचारियों को हटा लिया जाएगा।
गाड़ी समय पर न मिलने पर क्या होगा
- उपभोक्ता की नजर में कंपनी की छवि धूूमिल होगी
- बाजार में कंपनी की साख में गिरावट आएगी
- समय पर गाड़ी न मिलने से उपभोक्ता कंज्यूमर फोरम जाएंगे
- उपभोक्ता स्विफ्ट डिजायर की बजाए दूसरी कंपनी की गाड़ी खरीदेंगे

पिछले साल भी मिली चुनौती
मारुति कंपनी के मानेसर प्लांट में वर्ष 2011 में भी चुनौती आई थी। कंपनी के इस प्लांट में जून से लेकर अक्तूबर तक करीब दो महीने की हड़ताल रही। इस कारण कंपनी में करीब एक लाख कारों का उत्पादन प्रभावित हुआ। कंपनी को करोड़ों का नुकसान सहने के साथ उपभोक्ताओं की नाराजगी भी सहनी पड़ी थी।

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