संगीनों के साये में रहेंगे मारुतिकर्मी

Gurgaon Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। मारुति के मानेसर प्लांट चालू करने से पहले पुलिस ने सुरक्षा का खाका तैयार किया है। पुलिस ने 1500 कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए 800 हथियार बंद पुलिस के जवानों को तैनात करने की योजना बनाई है। ये प्लांट के भीतर से लेकर सड़क पर गुजरने वाले मारुति कंपनी के कर्मचारियों की सुरक्षा पर नजर रखेंगे।
एसआईटी की जांच पूरी होने के बाद कंपनी प्रबंधन की ओर से प्लांट चालू करने की घोषणा के बाद पुलिस की ओर से दिया गया सुरक्षा का भरोसा पूरा होने वाला है। कमिश्नरी की पुलिस की ओर से कंपनी प्रबंधन के 87 वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा चुकी है। पुलिस सुरक्षा प्लान में आईआरबी के बटालियन के जवानों को प्लांट के भीतर तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही प्लांट की सुरक्षा में 20 पुलिस इंस्पेक्टर व तीन एसीपी को तैनात किया गया है। सेना के रिटायर्ड जवानों की एक फौज होगी। रिटायर्ड ब्रिगेडियर दुष्यंत सिंह के नेतृत्व में यह कमांडो मोर्चा संभालेंगे। कमांडो के साथ ही हरियाणा पुलिस के जवान कर्मचारियों की बस में तैनात होंगे। पुलिस प्रशासन इस बार किसी तरह की चूक नहीं होने देना चाहता है। मारुति प्रबंधन की ओर से 500 कर्मचारियों की बर्खास्तगी के चलते माना जा रहा है कि प्लांट बंद कराने का भी श्रमिक संगठनों की ओर से प्रयास किया जा सकता है। एसईटी का सुपरविजन कर रहे पुलिस अधिकारी महेश्वर दयाल ने अमर उजाला को बताया कि प्लांट को चालू कराने व उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से व्यापक सुरक्षा का इंतजाम किया गया है। प्लांट के भीतर से लेकर बाहर तक की सुरक्षा की योजना तैयार की जा चुकी है।

सवा साल में सवा तीन महीने उत्पादन बंद
1.25 लाख कारों का उत्पादन नहीं हुआ
08 हजार करोड़ का कंपनी को हुआ नुकसान
850 करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान
सुरेंद्र दलाल
गुड़गांव। मारुति में हुए विवाद का एक माह पूरा हो गया। यदि पिछले पिछले 16 महीनों पर गौर करें तो करीब सवा तीन माह तक प्लांट बंद रहा। इससे सवा लाख कारों का उत्पादन प्रभावित हुआ। इस दौरान कंपनी को करीब आठ हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
मारुति कंपनी के मानेसर प्लांट के लिए पिछले 16 महीने का समय सबसे अधिक खराब साबित हुआ। इस सवा साल के समय में कंपनी में सवा तीन महीने तक काम पूरी तरह से बंद रहा। करीब सवा दो महीने तक कंपनी के कर्मचारियों ने हड़ताल रखी। करीब एक महीने तक कंपनी ने तालाबंदी की। मारुति कंपनी के गुड़गांव में चार प्लांट हैं। कंपनी का इंजन बनाने के लिए अलग से सुजुकी पावरट्रेन प्लांट मानेसर में है। इस प्लांट में पिछले सवा साल के दौरान हड़ताल नहीं हुई। मानेसर प्लांट की लंबी हड़ताल के बाद भी अन्य प्लांट सुचारु रहे। मानेसर के प्लांट में डीजल की स्विफ्ट कारें बनती हैं। इनकी इस समय मार्केट में सबसे अधिक मांग है। कंपनी की ओर से स्विफ्ट डिजायर के लिए एडवांस बुकिंग की जाती है। इसमें तीन से चार माह की अग्रिम बुकिंग रहती है। हड़ताल के कारण बुकिंग करने वालों को लंबे समय तक इंतजार करना होगा। हड़ताल के चलते प्रदेश सरकार को भी करीब 850 करोड़ से अधिक के राजस्व का भारी भरकम नुकसान हुआ है। कंपनी से जुड़े ट्रांसपोर्टर, शोरूम संचालकों को भी इससे आर्थिक घाटा हुआ। पिछले साल कंपनी में 31 दिन तक लगातार कंपनी बंद रही थी। इस साल 18 जुलाई से 21 अगस्त तक कंपनी में 34 दिन तक काम बंद है।
मानेसर प्लांट में हड़ताल
-1 मार्च 2011 से 6 मार्च तक प्लांट बंद
-4 जून से 16 जूून तक काम बंद
-29 अगस्त से तीस सितंबर तक प्लांट बंद
- 3 से 22 अक्तूबर तक काम बंद रहा
-18 जुलाई 2012 से 21 अगस्त तक तालाबंदी

ट्रांसपोर्टर को हुआ नुकसान
मानेसर के प्लांट में प्रतिदिन करीब 1700 कारों का उत्पादन होता है। इनको देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए ट्रालों का सहारा लिया जाता है। ट्रांसपोर्ट कंपनी के करीब 250 से अधिक ट्राले इस प्लांट की गाड़ियों को पहुंचाते हैं। पिछले एक माह से इस प्लांट से एक भी गाड़ी नहीं निकली। इसके चलते ट्रांसपोर्ट कंपनियों को करोड़ाें का नुकसान हुआ।
पंचायत से संसद तक पहुंचा मुद्दा
मारुति प्रकरण को लेकर स्थानीय स्तर पर महापंचायतों का आयोजन हुआ। विधायकों ने इसे विधानसभा में मुद्दा बनाया। कम्युनिस्ट सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने इस मुद्दे को संसद में उठाया। पिछले एक माह से कंपनी को लेकर मजदूरोें की भी जनसभाएं हो चुकी हैं।
पहली बार कंपनी की तालाबंदी
मारुति कंपनी की ओर से पिछले एक माह से तालाबंदी है। कंपनी ने 21 जुलाई को तालाबंदी की थी। इससे पहले कंपनी की ओर से काम बंद नहीं किया गया था। मजदूरों की ओर से हड़ताल का एलान किया गया था। इस बार हिंसक वारदात के बाद कंपनी ने तालाबंदी का एलान किया।
वेंडर कंपनियों को आर्थिक चपत
मारुति कंपनी के मानेसर प्लांट में काम बंद होने के कारण पिछले एक माह से गुड़गांव, मानेसर, धारूहेड़ा में बसी करीब 280 वेंडर कंपनियों को नुकसान हुआ है। कंपनियों की ओर से उत्पादन नहीं किया गया। इस कारण इन कंपनियों को भी करोड़ों का घाटा हो चुका है।

मारुति हिंसा प्रकरण में एक और गिरफ्तार
जियालाल पर कंपनी से डोर फ्रेम लेकर भागने का है आरोप
गुड़गांव। मारुति के मानेसर प्लांट में हुई हिंसा के मामले की जांच कर रही एसआईटी ने शुक्रवार को दिल्ली में रहने वाले एक कर्मचारी कमल को गिरफ्तार किया है। मानेसर थाना पुलिस ने आरोपी को शनिवार को अदालत में पेश किया, वहां पर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल भेज दिया है।
उधर, एसआईटी मुख्य आरोपी जियालाल को पांच दिन की रिमांड लेकर छानबीन करने में जुटी है। एसआईटी ने उस पर डोर फ्रेम लेकर भागने और जूता व वर्दी को छुपाने का आरोप लगाया है। उधर, जियालाल ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उसने सुपरवाइजर के साथ कोई भी अभद्र व्यवहार नहीं करने की बात कही। सुपरवाइजर के साथ विवाद करने वाला तो उसका सहयोगी था। मामले की जांच कर ही पुलिस ने उसके बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। एसआईटी के अनुसार जियालाल मारपीट के दौरान कंपनी से एक कार का डोर फ्रेम भी साथ ले गया है, जिसे पुलिस को बरामद करना है। जियालाल के वकील राजेंद्र पाठक का कहना है कि एसआईटी खुद अपनी जांच में उलझती जा रही है।

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