जंग-ए-आजादी में गुड़गांव का रहा बड़ा योगदान

Gurgaon Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
गुड़गांव। स्वतंत्रता संग्राम में गुड़गांव का भी बड़ा योगदान रहा है। यहां से 80 के करीब रणबाकुंरों ने जंग-ए-आजादी में अपनी भूमिका अदा की है। 71 के नाम ऑन रिकॉर्ड हैं। इनमें से 11 सेनानी ही आजादी का 65वां जश्न मनाने को बचे हैं। उनके परिवारों को उनकी वीरता पर गर्व है।
स्वतंत्रता संग्राम में यहां के वीरों ने बड़ी शिद्दत से अपना योगदान दिया। जिस सपने को लेकर ये लोग जंग-ए-आजादी में उतरे थे, वह सपना आज भी इनकी आंखों में जीवंत देखा जा सकता है। आज जब उस लम्हे को ये लोग याद करते हैं तो फख्र से इनका सीना चौड़ा हो जाता है। उस जमाने के किस्से-कहानियों में ये लोग ऐसे खो जाते हैं जैसे ये इस समय भी जंग का हिस्सा बन रहे हों। उनमें वही पुराना जोश लौट आता है। साथी शहीदों को याद कर इनकी आंखें नम भी होती हैं, लेकिन उन्हें सजदा करना ये नहीं भूलते।
-------------------
ये हैं स्वतंत्रता संग्राम के नायक
नाम स्थान
भागमल टिकली
छाजूसिंह सेक्टर 31
भागमल कुकडौला
धर्मसिंह शिकोहपुर
जगराम न्यू कॉलोनी
खुबी राम नखडौला
मवासी राम खोह-कासन
पूर्णसिंह खेड़की बाघनकी
ताराचंद नखडौला
जयमल सिधरावली
परमानंद पातली

-ये लोग स्वतंत्रता के 66वें जश्न को मनाने को तैयार हैं।
बहादुर सिंह डूंडाहेडा
नंदलाल सिधरावली
लीलीराम पथरेड़ी
अमीलाल शिकोहपुर
नारायणदास सेक्टर 22
मामचंद टिकली
चंदगीराम टिकली
रामकुमार खांडसा
रामचंद्र कन्हैई
मवासीराम शिकोहपुर
हमराज सिंकदरपुर
श्रीराम भोंडसी
भगवानसिंह झाडसा
उदय सिंह झाड़सा
बदनसिंह कादरपुर
लखीराम बिलासपुर
मोहर सिंह बुरखा-राठीवास
दानसिंह बाघनकी
हरचंद टिकली
करनसिंह खांडसा
देवदत्त हरसरू
मंशाराम दौलदाबाद
नंदकिशन टिकली
सुल्तानसिंह मानेसर
हीरासिंह सुभाष नगर
श्रीराम यादव सेक्टर 14
इंदरसिंह गुप्ता मॉडल टाउन
हरीसिंह दौलताबाद
हरिया खेड़की दौला
नवलसिंह बादशाहपुर
रामचंद्र नखडौला
जगमाल सिंह भोंडसी
शीशराम बजघेड़ा
रामप्रसाद सुर्यविहार

-ये सभी गुड़गांव खंड के स्वतंत्रता सेनानी है।
गणेशीलाल खरखड़ी
फतेहसिंह बासलांबी
श्रीचंद खरखड़ी
निहाल सिंह पुखरपुर
हरनारायण मोकलवास
रोहतास ,,
जगमाल ,,
उमरावसिंह ,,
पतराम ,,
सुखराम ,,
बेगराज ,,

-ये सभी फर्रूखनगर खंड के स्वतंत्रता सेनानी है।

छाजूराम दमदमा
बीरबल अभयपुर
दरबाराम बहरामपुर
तेगन धूमसपुर
घमंडीलाल अभयपुर
रामपाल कादरपुर
मंताराम दमदमा
चंदरभान गढ़ी वाजीदपुर
प्रहलाद उल्लावास
- ये सभी सोहना खंड के स्वतंत्रता सेनानी है।
श्रीराम जाटौली
दानसिंह सुहागपुर
धर्मबीर जाटौली
रामानंद हेलीमंडी
कांशीराम तुर्कापुर
चिरंजीलाल जाटौला

-ये सभी सोहना खंड के स्वतंत्रता सेनानी है।

- स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी समिति लड़ती है हकों की लड़ाई
भले ही इन सेनानियों ने देश को आजादी दिलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन इनके या इनके परिवार के हकों की लड़ाई के लिए स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकार समिति संघर्ष करती है। चाहे शहीदों के सम्मान की बात करें या फिर इनकी किसी प्रकार की परेशानियों की। समिति हर समय उनके लिए तत्पर रहती है। समिति के चेयरमैन कपूर सिंह दलाल कहते हैं कि गुड़गांव में शहीदी स्मारक तो है, लेकिन स्वतंत्रता सेनानी स्मारक की कमी खलती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रशासन से शहीद स्मारक की बगल में स्वतंत्रता सेनानी स्मारक बनाने की मांग की है। इसके अलावा इसका प्रस्ताव जिला परिषद ने पारित कर दिया है, लेकिन सरकार को नहीं भेजा जा रहा है। इसके अलावा नेता जी सुभाष चौक पर नेताजी की तस्वीर लगाने की मांग भी कई बार की जा चुकी है। समिति के उपाध्यक्ष रिटायर्ड सूबेदार बीजेंद्र सिंह कहते हैं कि स्वतंत्रता के नायकों के लिए स्मारक बनाना उन्हें सबसे बड़ा उपहार देना होगा।

वो दौर कुछ और था, ये दौर कुछ और है...
- कभी सोचा न था ऐसा होगा सपनों का आजाद भारत
गुड़गांव। ‘जिस शिद्दत से आजादी की लड़ाई लड़ी, उसकी आज कोई कद्र नहीं है। उस समय सपने में भी नहीं सोचा था कि सपनों का आजाद देश ऐसा होगा, जहां आजादी के मायने ही खो गए।’ यह टीस है उन स्वतंत्रता सेनानियों के दिलों की जो गुलामी की जंजीरों के बाद खुद के प्रयासों से मिली आजादी की हवा में अपनी अंतिम सांसे ले रहे हैं। जीवन के आखिरी पड़ाव में आकर उन्हें देश की यह तस्वीर देखने को मिलेगी, इन लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था। इन लोगों के अनुसार उस गुलामी के दौर में न्याय था। जो कहीं ढूंढ़ने से भी नहीं मिल रहा है।
नहीं जाएंगे समारोह में.. जगराम आज के बदलते माहौल से इतने व्यथित हैं कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा नहीं लेने का फैसला कर लिया है। उन्होंने कहा कि दो पकौड़े, एक केला, दो बर्फी। आज यही है स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान। उन्होंने कहा कि देश की पूरी फिजा भ्रष्ट हो गई है। कोई किसी की सुनने वाला नहीं है। एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि बात 1941 की है। भर्ती के दौरान एक डांगेवाले (भर्ती अधिकारी) ने सभी सिपाहियों से सवा-सवा रुपये ले लिए थे। किसी ने उनकी शिकायत कर दी। सरकार ने जांच के बाद उस अधिकारी को बर्खास्त कर सिपाहियों के सवा-सवा रुपये मनी ऑर्डर के माध्यम से भिजवाए थे। उस समय वह सिंगापुर में थे। उन्होंने कहा कि पूरी पारदर्शिता थी, न्याय में। आज अरबों-खरबों में घोटाले हो रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे बेहतर तो तानाशाही भी है। जगराम नई पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए कहते हैं अब नई पीढ़ी पर इस नई गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी कहां तक पूरी हो पाएगी, इसे देखने के लिए वे नहीं होंगे।
खेड़की बाघनकी के पूर्णसिंह, मवासी, धर्मसिंह, भागमल भी जगराम की बातों में सहमति जताते हैं। इन लोगों ने कहा कि आज अगर कुर्बानियां देने वाले जिंदा होते तो हालात देखकर मर जाते हैं। देश को बचाने वाला कोई नहीं है। इन लोगों ने युवाओं को एक नई क्रांति की अलग जगाने का आह्वान करते हुए कहा कि उस समय ये लोग भी युवा ही थे। युवा चाहे तो कुछ भी बदलने की कूवत रखता है।

अंग्रेजों के लिए काल बन गया था बख्तावर
गुड़गांव। यहां पर आजादी का एक ऐसा महानायक भी पैदा भी हुआ है जो अंग्रेजी सेना और अधिकारियों के लिए काल बन गया था। देश की खातिर उन्होंने अपने पूरे परिवार को कुर्बान कर दिया। हालांकि उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था।
गांव झाड़सा के रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार एवं जिला सैनिक बोर्ड के वेलफेयर ऑफिसर बीजेंद्र सिंह के मुताबिक बख्तावर सिंह ठाकरान झाड़सा 360 के चौधरी थे। उस समय इस चौधरी को राजस्व अधिकारी का दर्जा प्राप्त था। झाड़सा कमिश्नरी थी। बख्तावर शुरू से ही अंग्रेजी हुकूमत की मुखालफत में लगा था। 1857 के संग्राम के दौरान दिल्ली से जब कुछ अंग्रेज भागकर गुड़गांव में छुपने आए तो बख्तावर सिंह ने करीब ढाई सौ अंग्रेजी सैनिकों और अधिकारियों को बंधक बना लिया। बख्तावर सिंह ने उन्हें वे तमाम यातनाएं दीं जो अंग्रेजी हुकूमत भारतीयों को देती थी। उसने सभी को मार गिराया। संग्राम की आग जब ठंडी हुई तो अंग्रेजों ने बख्तावर सिंह को बंदी बना लिया। इससे पूर्व ही बख्तावर ने अपने परिवार को कहीं भेज दिया था, जो आज तक नहीं लौटे हैं। अंग्रेजी हुकूमत ने अंग्रेजी अधिकारियों को मारने के जुर्म में बख्तावर सिंह को राजीव चौक पर फांसी पर लटका दिया था। बख्तावर के शव को भी अंग्रजों ने वहीं छोड़ दिया था। इस्लामपुर के ग्रामीणों ने उनका अंतिम संस्कार किया था। जब इस घटना को गुलामी के परिप्रेक्ष्य में देखते हैं कि बख्तावर सिंह अकेला ऐसा शख्स था जो सही मायने में इस क्षेत्र से आजादी का महानायक कहलाने लायक हैं। बख्तावर सिंह को स्वतंत्रता के बाद सरकार ने पूरा सम्मान दिया। उनके नाम से शहर में आज चौक है, सड़क है और झाड़सा गांव में चारों और उनके नाम अत्याधुनिक गेट बनवाए गए हैं।

Recommended

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Noida

एम्स का नर्सिंग कॉलेज आग में खाक, बाल बाल बचे लोग

एम्स का नर्सिंग कॉलेज आग में खाक, बाल बाल बचे लोग

20 अगस्त 2018

Related Videos

VIDEO: सार्वजनिक रूप से लताड़े गए सीएम खट्टर

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर को कड़ी फटकार लगाई।

28 मई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree