फर्श से अर्श का सफर तय किया कांडा ने

Gurgaon Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
गुड़गांव। विवादों में घिरे गोपाल कांडा की आज जो हैसियत है, उसमें गुड़गांव का महत्वपूर्ण योगदान है। इसी द्रोण भूमि पर उन्हाेंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है। अब इसी शहर में रहते हुए एक ऐसे विवाद में घिर गए हैं जिससे उनकी राजनैतिक हैसियत तो कम होगी ही, कानूनी दांवपेंच भी लंबा झेलना पड़ेगा। करीब सोलह साल पहले कांडा सिरसा में जूते की अपनी दुकान बंद कर गुड़गांव आए थे। पहले उन्हें गोपाल गोयल के नाम से जाना जाता था, लेकिन इनेलो के राज में अचानक उनकी हैसियत बढ़ गई और वह गोपाल कांडा के तौर पर पहचाने जाने लगे। शहर में आज इनकी अकूत संपत्ति है। यह संपत्ति उन्होंने कैसे अर्जित की, भारतीय जनता पार्टी इसकी जांच की मांग उठाने लगी है।
सिरसा से गुड़गांव आने के बाद उन्होंने सेक्टर-14 के मार्केट में गारमेंट की दुकान खोली थी, लेकिन इससे उन्हें कुछ लाभ नहीं हुआ। बाद में दुकान बंद करनी पड़ी थी। बताते हैं कि गोपाल शुरू से ही महत्वाकांक्षी रहे हैं और पाने की जिद में वह किसी भी हद तक चले जाते हैं। पहले वह प्रॉपर्टी के छोटे-छोटे कारोबार किया करते थे। ओमप्रकाश चौटाला सत्ता में आए तो उन्हें बड़ी योजनाएं मिलने लगीं। बताते हैं कि शुरुआती तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें सियासी स्तर पर पहचान मिली। वे तीन सरकारों के बेहद करीब रहे हैं। हुडा की बड़ी साइटों की नीलामी में वे बराबर नजर आते थे। इससे उन्हाेंने करोड़ों रुपये कमाए। गोपाल कांडा का गुड़गांव-फरीदाबाद रोड पर एक फार्म हाउस भी है। अपनी मोटी कमाई के बल ही साइबर सिटी की पुरानी कचहरी में एमडीएलआर कंपनी की स्थापना की। इसके बाद ही वे विधायक बने। फिर हुड्डा सरकार में महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो हासिल करने में सफल रहे।
सिविल लाइन में कोठी बनाने का देखा सपना
शहर के सिविल लाइन में बड़े अफसरों की रिहायश है। गोपाल कांडा की भी इस रोड पर आलीशान राजस्थानी महल जैसी कोठी है। कहते हैं कांडा प्रॉपर्टी के काम के चक्कर में जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों के आवास का अक्सर चक्कर लगाया करते थे। तभी उनके मन भी इसी रोड पर महल खड़ा करने का प्रण लिया था। जैसे ही उनकी स्थिति सुधरी तो उन्हाेंने अपने सपने को मूर्त रूप देने की कार्रवाई शुरू कर दी। हाईवे से होकर सिविल लाइन की सड़क पर आने वालों को उनकी कोठी बरबस की ध्यान खींच लेती है।
कोठी के निर्माण में उठा विवाद
कायदे -कानून का उल्लंघन कर सिविल लाइन में कोठी बनाने पर उन्हें वन विभाग की टेढ़ी नजर भी झेलनी पड़ी थी। आरोप है कि उन्हाेंने भवन के निर्माण के समय बिना अनुमति हरे पेड़ काट दिए। इसको लेकर वन कोर्ट में मुकदमा चला था और उन्हें पेड़ के बदले हर्जाना और जुर्माना भरना पड़ा।
पहले चलते थे छोटी गाड़ियां पर
हुडा कार्यालय के कई कर्मचारी गोपाल कांडा को करीब से जानते हैं। उनके बीच चर्चा छिड़ते ही वे उनके बारे में बोल पड़ते हैं। कर्मचारियों की मानें तो 16 साल पहले गुड़गांव में आने पर कांडा मारुति वैन में चला करते थे। अब उन्हें लग्जरी कारों का शौक है। कहते हैं कि उनकी मारुति वैन गैस सिलेंडर पर चला करती थी।
हुडा कर्मचारियों का करते हैं सम्मान
हुडा के कर्मचारी बताते हैं कि मंत्री बनने के बाद भी गोपाल कांडा उनसे अपनापन से मिलते रहे। उनका व्यवहार पहले जैसा ही उनके साथ रहा। वे उनसे बड़े प्रेम भाव से मिला करते हैं। कहते हैं उसने संपर्क में रहने वाले कई मालदार हो चुके हैं।
फरीदाबाद रोड पर है आलीशान फार्म हाउस
गोपाल कांडा अब गोपाल गोयल नहीं रहे। कहते हैं कि गोपाल के कनेक्शन केवल हरियाणा मेें नहीं हैं। बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, दिल्ली व अन्य कई राज्यों का ऐसा कोई बड़ा अपराधी या नाम नहीं है जो गोपाल कांडा को नहीं जानता हो। बाहर से भाग कर जब लोगों को शरण लेनी होती थी तो वह कांडा के फरीदाबाद रोड पर स्थित आलीशान फार्म हाउस में पनाह लेते थे।
कद बढ़ाने को खरीदा टीवी चैनल
अपना कद बढ़ाने के लिए गोपाल कांडा ने एक के बाद एक कई काम किए। एमडीएलआर बनाने के बाद गोपाल कांडा ने मीडिया में दखलंदाजी के लिए प्रदेश के एक न्यूज चैनल को खरीद लिया। कहते हैं कि उसमें कांडा का शेयर सबसे अधिक है।
कई के राजदार हैं गोपाल कांडा
कहते हैं प्रदेश के कई बड़े अधिकारी, उद्योगपति व नेताओं की संपत्तियों का उन्हें पता है। सूत्रों की मानें तो कांडा इनेलो सरकार के एक बड़े राजनेता के बेहद करीब रहते हुए कई बड़े काम किए। उनके कारोबारी कला के सभी कायल हैं। सियासी गलियारे में जारी चर्चा की मानें तो उनकी वजह से ही कई सियासतदां बड़ी मुसीबत में घिरने से बच गए।

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गोपाल कांडा ने गुड़गांव को सोने की मुर्गी समझ कर इसका दोहन किया है। वे जो कुछ हैं, उसे गुड़गांव ने दिया है। उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच होनी चाहिए और सजा मिलनी चाहिए।
गोपीचंद गहलोत, इनेलो जिलाध्यक्ष

गोपाल कांडा पर लगे आरोपों की जांच जरूरी है। साथ ही उनके राजनैतिक राजदारों का भी पर्दाफाश होना चाहिए। उन्हें राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है।
-तिलकराज मल्होत्रा, भाजपा के जिला अध्यक्ष

गोपाल कांडा की तुरंत गिरफ्तारी हो। उनके मन में छिपे राज बाहर होने चाहिए। उनकी करतूतों को देखते हुए विधान सभा की सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।
-बेगराज यादव, हजकां जिला अध्यक्ष
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दिल्ली पुलिस ने लीगल एडवाइजर और एक अन्य कर्मी को उठाया
गुड़गांव। प्रदेश के पूर्व गृह राज्यमंत्री की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। गोपाल कांडा के खिलाफ दर्ज मामले व मिले सबूतों के बाद दिल्ली पुलिस गुड़गांव पहुंची। पुलिस ने एमडीएलआर कंपनी के लीगल एडवाइजर और एक अन्य कर्मचारी को उठाया है। उनसे गीतिका को नौकरी पर रखने और निकालने की कानूनी जांच के साथ-साथ उसके खाते में हुए पैसे के लेनदेन की जानकारी ली। दिल्ली पुलिस ने गुड़गांव पुलिस से हुई बातचीत में इसे जांच का एक हिस्सा बताया है। गुड़गांव में डीसीपी स्तर के एक अधिकारी ने एमडीएलआर कंपनी के दोनों लोगों को उठाने की पुष्टि की है। जानकारों के अनुसार एमडीएलआर कंपनी की ओर से भी पुलिस जांच में सहयोग की बात कही गई है। दिल्ली पुलिस की ओर से हुई छापेमारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा।

शस्त्र लाइसेंसों पर दिल्ली पुलिस की नजर
गुड़गांव। एयर होस्टेस की आत्महत्या के बाद गोपाल कांडा की हर हरकत पर दिल्ली पुलिस की नजर है। दिल्ली पुलिस ने गुड़गांव पुलिस से यह जानने का प्रयास किया है कि कांडा के पास कितने शस्त्र लाइसेंस हैं। कमिश्नरी की लाइसेंस शाखा के पास गोपाल कांडा के पास विदेशी पिस्टल, रायफल के साथ ही एक बंदूक का लाइसेंस होने की सूचना है। यह लाइसेंस दस साल पहले एक उपायुक्त के हस्ताक्षर पर जारी हुए हैं। पुलिस यह जानना चाह रही है कि सरकार के महत्वपूर्ण पद पर रहने के दौरान कितने लाइसेंस की सिफारिश की है। उनके काफिले में चलने वाले असलहे किस नाम से जारी हैं। गुड़गांव के अलावा सिरसा से उनके और उनके परिवार के नाम पर जारी असलहों की सूची भी तैयार की जा रही है। बताते हैं कि गोपाल कांडा के काफिले में चलने वालों के पास बेहतर असलहे हैं। उसकी टीम में रहने वाले उसके बहुत ही वफादार लोगों में से हैं।

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