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जागरूक नहीं हो रहे किसान, पराली जलाने के 23 मामले आए सामने

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Tue, 15 Oct 2019 12:09 AM IST
फतेहाबाद में एक खेत में जलती पराली
फतेहाबाद में एक खेत में जलती पराली - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। सरकार की ओर से जागरूकता अभियान चलाने और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के बावजूद जिले में पराली जलाने के मामले में कमी नहीं आ रही है। धान की कटाई शुरू होते ही जिले के किसानों ने पराली जलानी शुरू कर दी है। अब तक जिले में पराली जलाने के 23 मामले सामने आ चुके हैं। हरसैक की रिपोर्ट के अनुसार सोमवार तक जिले में पराली जलाने की 23 घटनाएं सामने आई हैं। उपायुक्त के निर्देशानुसार इन किसानों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। पिछले साल आज तक 2378 मामले सामने आए थे और इन सभी को जिला प्रशासन ने नोटिस जारी करके करीब 8 लाख रुपये की जुर्माना राशि वसूली थी। शेष किसानों को दोबारा नोटिस जारी किया गया है।
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कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो पिछले साल फतेहाबाद जिले में कुल 2378 जगहों पर पराली जलाई गई थी, जबकि इस साल अभी तक पराली जलाने की 23 घटनाएं अब तक सैटेलाइट की नजर में आ चुकी हैं। इनमें रतिया, टोहाना व फतेहाबाद उपमंडल शामिल हैं। कृषि उपनिदेशक डॉ. बलवंत सिंह सहारण के अनुसार, जिला राजस्व विभाग, कृषि विभाग व ग्राम सचिव की टीमों द्वारा पराली जलाने की वेरिफिकेशन की जा रही है। गांव स्तर पर किसानों के नाम चिह्नित कर व हरसैक से जानकारी जुटाकर इन्हें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार, कार्रवाई की जाएगी।
पिछले साल 1200 किसानों ने भरा था जुर्माना
बीते साल 2378 किसानों को पराली जलाने के मामले में नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से 1200 किसानों ने 8 लाख रुपये की जुर्माना राशि भरी थी। शेष 1178 किसानों को इस साल दोबारा नोटिस जारी किया गया है। अगर यह किसान अब जवाब नहीं देते तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। गौरतलब है कि पराली जलाने के कारण जिले का पर्यावरण काफी प्रदूषित होता है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो पराली जलाने से जहां भूमि की उर्वरा शक्ति समाप्त होती है, वहीं उपजाऊपन भी समाप्त होता है। यही नहीं मित्र कीट भी पराली जलाने के कारण मर जाते हैं, जिसका सीधा नुकसान फसल उत्पादन को होता है।
ये है जुर्माना का प्रावधान
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के अनुसार पराली को आग लगाने से पर्यावरण दूषित होता है । जिससे जहरीला धुआं मानव के शरीर को नुकसान पहुंचाता है। ट्रिब्युनल ने सरकार को निर्देश दे रखें हैं कि दो एकड़ में पराली जलाने वाले को 2500 रूपये, 5 एकड़ में आग लगाने वाले किसान को 5 हजार रूपये तथा 5 एकड़ से अधिक में आग लगाने वाले किसान को 15 हजार रूपये प्रति घटना जुर्माना वसूला जाए।
एसएसएम के बिना नहीं चला सकते कंबाइन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अनुसार, किसान एसएमएस (स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम)के बिना कंबाइन नहीं चला सकते। कंबाइन मालिक को पहले कंबाइन पर एसएमएस सिस्टम लगवाना होगा, अन्यथा किसान की कंबाइन के विरुद्ध एनजीटी के अनुसार, कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन
पराली जलाने पर रोक के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन जिले के कुछ किसान तमाम हिदायतों के बावजूद पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे किसानों को चिह्नित किया जा रहा है। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- धीरेन्द्र खड़गटा, उपायुक्त फतेहाबाद
इस बार पराली जलाने के 23 मामले सामने आए हैं। शीघ्र ही किसानों को नोटिस जारी किए जाएंगे। नोटिस का जवाब न देने पर एनजीटी के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. बलवंत सिंह सहारण कृषि उपनिदेशक, फतेहाबाद
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