हड़ताल पर रहे प्राइवेट डाक्टर्स, इधर-उधर भटकते नजर आए परेशान मरीज ू

Rohtak Bureau Updated Tue, 06 Jun 2017 07:15 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
जिलेभर के निजी अस्पताल संचालकों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल रखी। इसके चलते जिले भर के किसी भी निजी अस्पताल में मरीजों का उपचार नहीं हुआ। जिस कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उधर दूसरी ओर हड़ताल पर गए निजी चिकित्सकों ने अब सरकार को 18 अगस्त का समय दिया है। अगर 18 अगस्त तक सरकार ने मांगें नहीं मानी तो निजी चिकित्सकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी दी है। आईएमए प्रधान डॉ. मनमोहन पाहवा ने इसकी पुष्टि की है।

आपातकालीन सेवाएं भी रही ठप, सिविल अस्पताल में मरीजों ने करवाया उपचार
प्राइवेट डॉक्टर्स की हड़ताल में सबसे अहम बात ये रही कि इन अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं भी ठप रखी गई। हालांकि गनीमत रही कि मंगलवार को जिले में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ अन्यथा प्राइवेट चिकित्सकों की हड़ताल जानलेवा भी साबित हो सकती थी। इतना ही नहीं, अस्पतालों की हड़ताल में अस्पताल के अंदर स्थित मेडिकल एवं प्राइवेट लैब को भी शामिल किया गया। जिसके चलते अस्पतालों के अंदर मौजूद न तो मेडिकल खुले और न ही लैब संचालकों ने अपनी सेवाएं दी। इसके चलते भी मरीज खासे परेशान दिखे।

आईएमए के आह्वान पर थी राष्ट्रव्यापी हड़ताल, फतेहाबाद से भी गए 20 चिकित्सक
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के आह्वान पर पूरे देश में निजी चिकित्सकों ने अपने अस्पताल न केवल बंद रखे। बल्कि अस्पतालों के अंदर मिलने वाली सभी सुविधाओं पर भी 24 घंटे के लिए रोक लगा दी गई। फतेहाबाद से आईएमए प्रधान डॉ. मनमोहन पाहवा के नेतृत्व में लगभग 20 चिकित्सक मंगलवार अलसुबह ही दिल्ली की रैली में शामिल होने के लिए फतेहाबाद से निकल गए। इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मनमोहन पाहवा ने कहा कि चिकित्सकों का जीवन लगातार असुरक्षित होता जा रहा है। आए दिन अस्पतालों में तोड़-फोड़ और मारपीट की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके पीछे वजह यही है कि इनको रोकने के लिए कोई सख्त कानून नहीं है। इसके अलावा सरकार चिकित्सकों को दुकानदार की तरह व्यवहार कर रही है जबकि चिकित्सकों का प्रोफेशन सबसे पवित्र माना जाता है। ट्रेड लाइसेंस में डालने का मतलब ही यही है कि सरकार चिकित्सकों को गंभीरता से नहीं लेना चाह रही। इसलिए मजबूरन चिकित्सकों को हड़ताल का रास्ता लेना पड़ा।

इन मांगों के चलते चिकित्सक गए हड़ताल पर
जिलेभर के चिकित्सक जिन मांगों को लेकर एक दिन की हड़ताल पर गए हैं उनमें , अस्पतालों में तोड़फोड़ व चिकित्सकों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने, डॉक्टर्स व अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम हो, लाइसेंस का झंझट खत्म किए जाने, इलाज में लापरवाही के मामलों की जांच पुलिस की बजाए सिविल सर्जन या एमसीआई की कमेटी से करवाए जाने, पीएनडीटी एक्ट की त्रुटि को आपराधिक श्रेणी से बाहर करने, डाक्टरों को वकीलों एवं सीए की तरह ट्रेड लाइसेंस प्रक्रिया से बाहर रखे जाने की मांग शामिल है।

मरीजों के परिजनों ने इस तरह सुनाई व्यथा
देर रात से बच्चे की तबियत खराब है। मंगलवार सुबह दो-तीन बच्चों के अस्पताल में जाकर पता किया है लेकिन सब जगह हड़ताल की बात कही गई है। परेशान हो गया हूं। चिकित्सकों को तो हड़ताल जैसे रवैये से दूर रहना चाहिए। उनके हाथों में तो जीवन की डोर है।

सुभाष, निवासी खैरातीखेड़ा, बच्चे के इलाज के लिए पहुंचे थे।
चिकित्सकों का ये रवैया सही नहीं है। हमारे परिवार की एक बुजुर्ग महिला का उपचार एक निजी अस्पताल में पहले से चल रहा है। मंगलवार को महज एक्सरे करवा कर आगे की दवाई लेनी थी, लेकिन कंपाउंडर ने हड़ताल की बात कही। हमने कहा भी सही कि महज एक्सरे कर दो लेकिन फिर भी कोई सुनवाई नहीं। बुजुर्ग मरीज को इतनी गर्मी में बार-बार लेकर आना बहुत मुश्किल होता है।’
रणधीर, निवासी ढिंगसरा।



आज नहीं सुनी भगवान ने
हड़ताल पर रहे प्राइवेट डॉक्टर्स, इधर-उधर भटकते नजर आए परेशान मरीज
आईएमए के आह्वान पर एक दिन की रखी थी हड़ताल
अब सरकार को 18 अगस्त का अल्टीमेटम
18 अगस्त तक ना मानी गई मांगें तो बेमियादी हड़ताल की चेतावनी

06एफटीबीपी11 : निजी चिकित्सकों की हड़ताल के चलते चक्रवर्ती अस्पताल के बाहर लगा नोटिस ।
06एफटीबीपी12-13 : हड़ताल के चलते मॉडल टाऊन के एक अस्पताल में जाते और फिर वापिस लौटते मरीज एवं परिजन।
06एफटीबीपी14 : हड़ताल के चलते अपने बीमार बच्चे को उठाकर इधर-उधर भटकती एक महिला ।
06एफटीबीपी 15: हड़ताल के चलते वापिस जाने को मजबूर सुभाष
06एफटीबीपी16 : मरीज का परिजन रणधीर अपनी व्यथा सुनाते हुए ।
06एफटीबीपी17 : आईएमए के जिला प्रधान डा. मनमोहन पाहवा ।

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