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‘उमराव जान देखकर लिया कत्थक सीखने का फैसला’

Faridabad Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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सूरजकुंड (फरीदाबाद)। ताजिकिस्तान में हिंदी फिल्मों और कथा-कहानियों को खूब पसंद किया जाता है। यह रहस्योद्घाटन किया है वहां की नृत्य कलाकार निसोलैट व फारीदा ने।
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इकॉनोमिक्स की विद्यार्थी निसोलैट जहां शाहरुख की फैन है, तो डिजाइनर का कोर्स कर रही फारीदा करीना कपूर की खूबसूरती की मुरीद हैं। ये दोनों ही कलाकार अपने 15 सदस्यीय सांस्कृतिक समूह के साथ मेले में आई हैं। भारतीय क्लासिकल नृत्य कत्थक को ये पिछले तीन साल से एंबेसी ऑफ इंडिया के सांस्कृतिक विभाग के तहत सीख रही हैं। फारीदा ने बताया कि ऐश्वर्य राय की हिंदी फिल्म उमराव जान को देखकर उन्होंने भी कत्थक सीखने का फैसला लिया।

जोनबा लेबी-लेबास... गीत के बोलों पर जब ये सूरजकुंड मेला में थिरकती हैं तो चौपाल में जोश आ जाता है। इस गीत के बोल की व्याख्या करते हुए निसोलैट ने बताया कि इसमें भारत के लैला-मजनू की प्रेम कहानी की तरह युवाओं के सच्चे प्रेम को बताया गया है।
उसने सबसे पहले अभिनेता जैकी श्राफ की फिल्म किंग अंकल देखी थी। निसोलैट के अनुसार उनके देश में हिंदी फिल्मों को काफी पसंद किया जाता है। ज्यादातर घरों में हिंदी फिल्में सीडी से देखी जाती हैं।
आई लव इंडिया, कहकर निसोलैट ने बताया कि उन्हें भारतीय महिलाओं द्वारा नाक बिंधवाकर नथ डालने, अंगुली में अंगूठी पहनने व कानों में बाली पहनना अच्छा लगता है। उन्होंने बताया कि उनके देश में वैसे तो अमेरिका की आधुनिक संस्कृति का प्रभाव है, लेकिन काफी लोग आज भी भारतीय संस्कृति के कायल हैं।

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