अस्पताल के टॉयलेट में बच्ची का जन्म

Faridabad Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में सोमवार को डॉक्टराें की लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला ने टॅायलेट में ही एक बच्ची को जन्म दे दिया। इस महिला को पीड़ा होने के बावजूद लेबर रूम से वार्ड में जाने को कह दिया गया था। दूसरी ओर एक अन्य मामले में एक महिला को डिलीवरी के लिए दूसरे अस्पताल में जाने को कह दिया गया। बाद में गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। इन घटनाओं से गुस्साए लोगों ने सोमवार सुबह बीके अस्पताल में जमकर नारेबाजी कर रोष जताया।
गाजीपुर में रहने वाले सुरेश की पत्नी उर्मिला गर्भवती थी और सोमवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर उसे बादशाह खान अस्पताल ले जाया गया। सुरेश ने बताया कि डॉक्टराें ने पांच मिनट उर्मिला की जांच करने के बाद सुरेश को कहा कि अभी उसकी डिलीवरी का ठीक समय नहीं है। इसके बाद उर्मिला को वार्ड में खाली बेड देखकर लेट जाने के लिए कह दिया गया। जबकि उस समय उर्मिला दर्द से कराह रही थी। पत्नी को खाली बेड पर लिटाकर सुरेश अस्पताल से बाहर कुछ सामान लेने चला गया। इसके दस मिनट बाद उर्मिला टॉयलेट में गई, जहां पर उसने एक बच्ची को जन्म दे दिया।
अस्पताल स्टाफ को जब टॉयलेट में बच्ची के जन्म देने की सूचना मिली तो हड़कंप मच गया। उर्मिला को तुरंत जच्चा-बच्चा वार्ड के बेड पर ले जाया गया। उर्मिला ने बताया कि डिलीवरी होने के बाद भी उसे सुबह दस बजे तक किसी तरह का ट्रीटमेंट उपलब्ध नहीं कराया गया।


केस नंबर-2
दूसरे मामले में पन्हैड़ा गांव के रहने वाला छेदी सिंह रविवार दोपहर 12 बजे अपनी पत्नी अरुणा देवी को डिलीवरी करवाने के लिए बीके अस्पताल में लाया था। छेदी सिंह ने बताया कि शाम को डाक्टराें ने कह दिया कि अरुणा की डिलीवरी यहां नहीं हो पाएगी, कहीं और ले जाओ। छेदी सिंह के अनुसार काफी अनुरोध के बाद डाक्टराें ने इलाज शुरू किया और रात करीब 12 बजे बताया कि बच्चा पेट में मर चुका है।


केस नंबर-3
पलवल की रहने वाले पूजा आज भी बीके अस्पताल में भर्ती है। पूजा ने अस्पताल स्टाफ पर आरोप लगाया कि वह अपने पति कन्हैयालाल के साथ 28 नवंबर को डिलीवरी के लिए आई थी। यहां पर डिलीवरी के बाद बच्चे की देखभाल नहीं की गई, जिसके कारण बच्चे की मौत हो गई।


मरीजाें ने अस्पताल के खिलाफ की नारेबाजी
अस्पताल में तीन मामले होने के बाद गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। अस्पताल में अपनी पत्नी का इलाज कराने आए महेंद्र ने बताया कि जब परेशानी की सूचना अस्पताल के एक वरिष्ठ डाक्टर को दी तो तो उन्हाेंने 9 बजे अपने कार्यालय में आकर मिलने के लिए कहकर फोन काट दिया।


महिला की डिलीवरी टॉयलेट में हो गई, यह कोई लापरवाही नहीं है। डिलीवरी कहीं भी हो सकती है। डिलीवरी होने के बाद अस्पताल स्टाफ द्वारा महिला की देखरेख की गई है। वहीं अन्य दो मामलाें के बारे में मुझे किसी तरह की जानकारी नहीं है।
-ओपी मेहता, पीएमओ बीके अस्पताल।
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यह गंभीर मामला है और इस पूरे मामले की मै खुद जांच कराऊंगा। अगर मरीजाें के साथ लापरवाही के मामले हो रहे हैं तो कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
-बलराज सिंह, उपायुक्त
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इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री से व मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी। वही अस्पताल पीएमओ से अभी तक सभी मामलाें में जांच की रिपोर्ट पूछी जाएगी। क्याेंकि जांच के नाम पर वह डाक्टराें का बचाव करते हैं। इस मामले को ग्रीवेंस कमेटी में उठाकर दोषियों को सस्पेंड करने की मांग की जाएगी।
-अनीसपाल, ग्रीवेंस कमेटी सदस्य

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